{"_id":"ea3e87325986ffafee459400064807fb","slug":"create-an-atmosphere-of-tranquility-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘देश में अमन-चैन का बनाएं माहौल’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘देश में अमन-चैन का बनाएं माहौल’
ब्यूरो/ अमर उजाला, हरदोई
Updated Mon, 06 Apr 2015 12:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोपामऊ कस्बे में आयोजित शफक कार्यक्रम के तहत
विज्ञापन
विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ीं अहम हस्तियों ने गोपामऊ की सुनहरी स्मृतियों
को सामने रख पहले के माहौल को फिर जिंदा करने की सीख दी। तालीमी और दीनी
क्षेत्रों में अलग पहचान बनाने वाली यहां की शख्सियतों का हवाला देकर
गोपामऊ की इल्मी शिनाख्त को फिर से तरोताजा करने के रास्ते सुझाए गए।
अध्यक्षता करते हुए एडीशनल एडवोकेट जफरयाब जिलानी ने कहा कि उलमा-ए-कराम ने दीनी तालीम ही नहीं, मुल्क को गुलामी से निजात दिलाने में भी कुरबानियां दीं। हिंदुस्तान धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। गोपामऊ में उलेमा व राजाओं ने तारीख और दीन को बनाने का काम किया।
मुसलिम इस मुल्क में दूसरे धर्म की तरह ही हक रखने वाले शहरी हैं, जो किसी के रहमो करम पर यहां नहीं रह रहे। हम एक मुसलमान की हैसियत से यहां रह रहे हैं। आज भी भारत में कट्टरपंथियों से ज्यादा धर्मनिरपेक्ष लोग मौजूद हैं और इनके रहते यहां कौम को कोई खतरा नहीं है।
इल्मी और अदबी लोगों की जिम्मेदारी है कि वह मदरसों को तारीख का ज्ञान दें। केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस ने भी कौम पर जुल्म किए। हाशिमपुरा मामले में गैर मुसलिम मीडिया कर्मी ने मुसलिमों की मदद कर यह साबित किया कि अब भी इंसानियत मौजूद है।
देश में एकता का माहौल बनाएं। नफरतों को मोहब्बतों पर हावी न होने दें। अगर नफरतें बढ़ रही हैं तो हमें अपने अंदर की कमियों पर गौर कर इन्हें दूर करने की कोशिश करनी चाहिए। दीनी वक्ता मौलाना मुफ्ती शकील ने कहा कि दीन से जुड़ें और इंसानियत व तहजीब को बाकी रखें।
शायर वासिफ फारूकी ने कहा कि तमन्ना है कि अपनी मिट्टी में दफन होने का एजाज हासिल हो। जहांगीराबाद संस्थान आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी के निदेशक ख्वाजा मोहम्मद रफी ने कहा कि कामयाबी पाने को अल्लाह की चाहत को अपनी चाहत बना लें। बिहार से आए हसीब अनवर ने तालीम को तहरीक बनाने की जरूरत बताई।
कायनात इंस्टीट्यूट आफ इंफार्मेशन के डायरेक्टर मोहम्मद आफाक ने कहा कि तालीम और अमल ही बाकी रह जाने वाले हैं। यही व्यक्ति की पहचान बनते हैं। इस मौके पर संयोजक मोहम्मद सअद फारूकी, मोहम्मद तलहा अदनान, सऊदुल अनस व शारिक इकबाल ने व्यवस्थाएं देखीं।
उधर, किताब तजकिरा-ए-आलामे गोपामऊ व अद्दुल असाम का विमोचन जिलानी, मुफ्ती शकील व अन्य ने किया। इस दौरान अलीगढ़ मुसलिम यूनीवर्सिटी के अरबी विभाग के प्रोफेसर सलाहुद्दीन उमरी गोपामवी भी मौजूद थे। इसके अलावा शायर वासिफ फारूकी, नईमुददीन आदि को सम्मानित किया गया।
अध्यक्षता करते हुए एडीशनल एडवोकेट जफरयाब जिलानी ने कहा कि उलमा-ए-कराम ने दीनी तालीम ही नहीं, मुल्क को गुलामी से निजात दिलाने में भी कुरबानियां दीं। हिंदुस्तान धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। गोपामऊ में उलेमा व राजाओं ने तारीख और दीन को बनाने का काम किया।
मुसलिम इस मुल्क में दूसरे धर्म की तरह ही हक रखने वाले शहरी हैं, जो किसी के रहमो करम पर यहां नहीं रह रहे। हम एक मुसलमान की हैसियत से यहां रह रहे हैं। आज भी भारत में कट्टरपंथियों से ज्यादा धर्मनिरपेक्ष लोग मौजूद हैं और इनके रहते यहां कौम को कोई खतरा नहीं है।
इल्मी और अदबी लोगों की जिम्मेदारी है कि वह मदरसों को तारीख का ज्ञान दें। केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस ने भी कौम पर जुल्म किए। हाशिमपुरा मामले में गैर मुसलिम मीडिया कर्मी ने मुसलिमों की मदद कर यह साबित किया कि अब भी इंसानियत मौजूद है।
देश में एकता का माहौल बनाएं। नफरतों को मोहब्बतों पर हावी न होने दें। अगर नफरतें बढ़ रही हैं तो हमें अपने अंदर की कमियों पर गौर कर इन्हें दूर करने की कोशिश करनी चाहिए। दीनी वक्ता मौलाना मुफ्ती शकील ने कहा कि दीन से जुड़ें और इंसानियत व तहजीब को बाकी रखें।
शायर वासिफ फारूकी ने कहा कि तमन्ना है कि अपनी मिट्टी में दफन होने का एजाज हासिल हो। जहांगीराबाद संस्थान आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी के निदेशक ख्वाजा मोहम्मद रफी ने कहा कि कामयाबी पाने को अल्लाह की चाहत को अपनी चाहत बना लें। बिहार से आए हसीब अनवर ने तालीम को तहरीक बनाने की जरूरत बताई।
कायनात इंस्टीट्यूट आफ इंफार्मेशन के डायरेक्टर मोहम्मद आफाक ने कहा कि तालीम और अमल ही बाकी रह जाने वाले हैं। यही व्यक्ति की पहचान बनते हैं। इस मौके पर संयोजक मोहम्मद सअद फारूकी, मोहम्मद तलहा अदनान, सऊदुल अनस व शारिक इकबाल ने व्यवस्थाएं देखीं।
उधर, किताब तजकिरा-ए-आलामे गोपामऊ व अद्दुल असाम का विमोचन जिलानी, मुफ्ती शकील व अन्य ने किया। इस दौरान अलीगढ़ मुसलिम यूनीवर्सिटी के अरबी विभाग के प्रोफेसर सलाहुद्दीन उमरी गोपामवी भी मौजूद थे। इसके अलावा शायर वासिफ फारूकी, नईमुददीन आदि को सम्मानित किया गया।