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बावन : गोशाला में मवेशियों को दफन करने के लिए खुदे रहते हैं गड्ढे
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फोटो- 32- गोशाला के अंदर गड्ढे में दफन किया गया मवेशी। अमर उजाला
- फोटो : HARDOI
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गोशालाओं में बंद छुट्टा मवेशियों को पर्याप्त मात्रा में चारा-भूसा और पानी उपलब्ध कराने के शासन-प्रशासन के निर्देश हैं लेकिन बावन गोशाला का कुछ और ही नजारा है। यहां मवेशियों के लिए चारा-पानी के न के बराबर है जबकि मरने के बाद दफनाने को इंतजाम है।
ग्राम पंचायत बावन में लगभग 100 बीघा से अधिक क्षेत्रफल में गोशाला बनी है। प्रशासन का दावा है कि इसमें 250 से अधिक मवेशी रह सकते हैं। शनिवार को गोशाला में 199 मवेशी थे। इनमें ज्यादातर धूप में बैठे थे जबकि सफाईकर्मी और केयरटेकर पेड़ की छांव में आराम कर रहे थे। गोशाला में ही एक मवेशी गंभीर अवस्था में पड़ा मिला।
बीमारी के चलते किसी भी वक्त उसकी भी मौत हो सकती है। गोशाला की सबसे खास बात यह है कि परिसर में कई जगहों पर गड्ढे खुदे हुए हैं। इनका क्षेत्रफल देख हर कोई बता देगा कि मृत मवेशियों को ही दफन करने के लिए यह खोदे गए हैं।
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बावन गोशाला में मवेशियों की मौत के बाद उन्हें यहां खोदे गए गड्ढों में दफन भी किया जा रहा है। दफन किए गए कई मवेशियों के अवशेष अब भी मौके पर पड़े हैं। मवेशियों को दफनाने में भी हीलाहवाली हो रही है।
गोशाला में बंद मवेशियों को 20 दिन से हरा चारा नहीं मिला है। सूखा भूसा भी नाममात्र को ही उपलब्ध है। दाना भी गोशाला में नहीं है।
छह अगस्त को डीएम पुलकित खरे ने डीडीओ (जिला विकास अधिकारी) राजितराम मिश्रा के साथ गोशाला का निरीक्षण किया था। तब उन्होंने इस गोशाला को मॉडल गोशाला के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए थे, इसके ठीक उलट अब स्थिति बेहद खराब है। ब्यूरो
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अनीसुल हसन ने बताया कि भूसा मंगाया है। बजट न होने के कारण उधार लेकर काम चलाया जा रहा है। ग्राम सचिव सुनील पाल ने बताया कि चार अक्तूूबर को खाते में केवल चार सौ रुपये थे।
पांच को करीब डेढ़ लाख रुपये खाते में आ गए हैं। इससे कमियों को दूर कराया जाएगा। गोशाला के केयरटेकर रमेश कुमार ने बताया कि 20 दिनों से हरा चारा नहीं आ रहा है। ग्राम सचिव सप्ताह में एक दिन और प्रधान प्रतिनिधि सप्ताह में दो बार व्यवस्थाएं देखने आते हैं।
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सवायजपुर तहसील क्षेत्र के भरखनी गांव स्थित गोशाला में शनिवार दोपहर बाद एक मवेशी की मौत हो गई। गोशाला में हर रोज आने वाले पशु चिकित्सक डॉ. धर्मेंद्र वर्मा ने बताया कि जिस मवेशी की मौत हुई है वह काफी कमजोर था।
जितना दाना और चारा मवेशी की जरूरत थीवह भी नहीं मिल पा रहा था। इसकी सूचना गोशाला में तैनात सफाई कर्मी रामौतार राजपूत ने ग्राम प्रधान को दी। गांव निवासी सर्वेश, चंद्रावती आदि ने बताया कि शुक्रवार शाम भी दो मवेशियों की मौत हुई थी, लेकिन ट्रैक्टर से लादकर उनको कहीं भेज दिया गया।
एसडीएम कपिल देव यादव ने बताया कि मामला गंभीर है। बीडीओ विद्याशंकर कटियार से पूछताछ कर जल्द ही गोशाला का औचक निरीक्षण करेंगे। खामियां मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। ब्यूरो
विकास खंड के गौरा गांव में 12 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में विकसित गौरा गोशाला में जलभराव है। इसके चलते यहां मवेशी बीमार भी हो रहे हैं। पशु चिकित्सक डॉ. मंजुला ने बताया कि शुक्रवार को उन्होंने गोशाला का निरीक्षण किया था। कुछ मवेशियों की पैरों की खाल कट रही है। साथ ही संक्रमण होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि मवेशियों को किसी दूसरी गोशाला में भेजाना जरूरी है। ब्यूरो
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ग्राम पंचायत बावन में लगभग 100 बीघा से अधिक क्षेत्रफल में गोशाला बनी है। प्रशासन का दावा है कि इसमें 250 से अधिक मवेशी रह सकते हैं। शनिवार को गोशाला में 199 मवेशी थे। इनमें ज्यादातर धूप में बैठे थे जबकि सफाईकर्मी और केयरटेकर पेड़ की छांव में आराम कर रहे थे। गोशाला में ही एक मवेशी गंभीर अवस्था में पड़ा मिला।
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बीमारी के चलते किसी भी वक्त उसकी भी मौत हो सकती है। गोशाला की सबसे खास बात यह है कि परिसर में कई जगहों पर गड्ढे खुदे हुए हैं। इनका क्षेत्रफल देख हर कोई बता देगा कि मृत मवेशियों को ही दफन करने के लिए यह खोदे गए हैं।
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बावन गोशाला में मवेशियों की मौत के बाद उन्हें यहां खोदे गए गड्ढों में दफन भी किया जा रहा है। दफन किए गए कई मवेशियों के अवशेष अब भी मौके पर पड़े हैं। मवेशियों को दफनाने में भी हीलाहवाली हो रही है।
गोशाला में बंद मवेशियों को 20 दिन से हरा चारा नहीं मिला है। सूखा भूसा भी नाममात्र को ही उपलब्ध है। दाना भी गोशाला में नहीं है।
छह अगस्त को डीएम पुलकित खरे ने डीडीओ (जिला विकास अधिकारी) राजितराम मिश्रा के साथ गोशाला का निरीक्षण किया था। तब उन्होंने इस गोशाला को मॉडल गोशाला के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए थे, इसके ठीक उलट अब स्थिति बेहद खराब है। ब्यूरो
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अनीसुल हसन ने बताया कि भूसा मंगाया है। बजट न होने के कारण उधार लेकर काम चलाया जा रहा है। ग्राम सचिव सुनील पाल ने बताया कि चार अक्तूूबर को खाते में केवल चार सौ रुपये थे।
पांच को करीब डेढ़ लाख रुपये खाते में आ गए हैं। इससे कमियों को दूर कराया जाएगा। गोशाला के केयरटेकर रमेश कुमार ने बताया कि 20 दिनों से हरा चारा नहीं आ रहा है। ग्राम सचिव सप्ताह में एक दिन और प्रधान प्रतिनिधि सप्ताह में दो बार व्यवस्थाएं देखने आते हैं।
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सवायजपुर तहसील क्षेत्र के भरखनी गांव स्थित गोशाला में शनिवार दोपहर बाद एक मवेशी की मौत हो गई। गोशाला में हर रोज आने वाले पशु चिकित्सक डॉ. धर्मेंद्र वर्मा ने बताया कि जिस मवेशी की मौत हुई है वह काफी कमजोर था।
जितना दाना और चारा मवेशी की जरूरत थीवह भी नहीं मिल पा रहा था। इसकी सूचना गोशाला में तैनात सफाई कर्मी रामौतार राजपूत ने ग्राम प्रधान को दी। गांव निवासी सर्वेश, चंद्रावती आदि ने बताया कि शुक्रवार शाम भी दो मवेशियों की मौत हुई थी, लेकिन ट्रैक्टर से लादकर उनको कहीं भेज दिया गया।
एसडीएम कपिल देव यादव ने बताया कि मामला गंभीर है। बीडीओ विद्याशंकर कटियार से पूछताछ कर जल्द ही गोशाला का औचक निरीक्षण करेंगे। खामियां मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। ब्यूरो
विकास खंड के गौरा गांव में 12 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में विकसित गौरा गोशाला में जलभराव है। इसके चलते यहां मवेशी बीमार भी हो रहे हैं। पशु चिकित्सक डॉ. मंजुला ने बताया कि शुक्रवार को उन्होंने गोशाला का निरीक्षण किया था। कुछ मवेशियों की पैरों की खाल कट रही है। साथ ही संक्रमण होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि मवेशियों को किसी दूसरी गोशाला में भेजाना जरूरी है। ब्यूरो