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शास्त्र भी कहते ताली भी बजाओ, थाली भी बजाओ, वायरस भगाओ...
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हरदोई। कोरोना वायरस से जंग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनता कर्फ्यू का समर्थन सनातन धर्म प्रचार मंडल ने भी किया है। लोगों से अपील की है कि ताली व थाली बजाने से नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं। ऐसा हमारे शास्त्रों में भी वर्णित है।
शास्त्रों के जानकार व महर्षि वेद व्यास जनसेवा समिति के सचिव शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि 22 मार्च रविवार को शाम पांच बजे घरों से ही ताली बजाकर, थाली बजाकर, घंटी बजाकर लोगों का आभार जताने की पीएम की अपील का सभी समर्थन करें।
प्रधानमंत्री की अपील के पीछे भी भारतीय संस्कृति और विज्ञान छिपा है। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म-संस्कृति में करतल ध्वनि, घंटा ध्वनि, शंख ध्वनि का अपना महत्व है। मंदिर हों या घर, इन ध्वनियों का पूजा पद्धति में विशेष स्थान है। घंटियां बजाने से हमारे शरीर के सभी सात उपचार केंद्र सक्रिय होते हैं।
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हरदोई। पं. सुनील शास्त्री ने कहा कि जब घंटा और घंटी बजाई जाती है तो वातावरण में कंपन पैदा होता है। कंपन का फायदा ये है कि इसके क्षेत्र में आने वाले सभी जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है। शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मानव शरीर में अधिक ऊर्जा का संचार होता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
हरदोई। सनातन धर्म प्रचार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. सनत मिश्रा का कहना है कि ताली भी बजाओ, थाली भी बजाओ। अमंगल को दूर करने के लिए तुलसी ने भी रामचरितमानस में इसका वर्णन किया गया है। पारंपरिक पूजा पद्धति में शंख, कांस्य, घंट इत्यादि की ध्वनि का आयुर्वेद के अलावा शिवपुराण में भी विशेष महत्व बताया गया है। मंगल ध्वनि से जीवन से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
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शास्त्रों के जानकार व महर्षि वेद व्यास जनसेवा समिति के सचिव शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि 22 मार्च रविवार को शाम पांच बजे घरों से ही ताली बजाकर, थाली बजाकर, घंटी बजाकर लोगों का आभार जताने की पीएम की अपील का सभी समर्थन करें।
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प्रधानमंत्री की अपील के पीछे भी भारतीय संस्कृति और विज्ञान छिपा है। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म-संस्कृति में करतल ध्वनि, घंटा ध्वनि, शंख ध्वनि का अपना महत्व है। मंदिर हों या घर, इन ध्वनियों का पूजा पद्धति में विशेष स्थान है। घंटियां बजाने से हमारे शरीर के सभी सात उपचार केंद्र सक्रिय होते हैं।
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हरदोई। पं. सुनील शास्त्री ने कहा कि जब घंटा और घंटी बजाई जाती है तो वातावरण में कंपन पैदा होता है। कंपन का फायदा ये है कि इसके क्षेत्र में आने वाले सभी जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है। शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मानव शरीर में अधिक ऊर्जा का संचार होता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
हरदोई। सनातन धर्म प्रचार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. सनत मिश्रा का कहना है कि ताली भी बजाओ, थाली भी बजाओ। अमंगल को दूर करने के लिए तुलसी ने भी रामचरितमानस में इसका वर्णन किया गया है। पारंपरिक पूजा पद्धति में शंख, कांस्य, घंट इत्यादि की ध्वनि का आयुर्वेद के अलावा शिवपुराण में भी विशेष महत्व बताया गया है। मंगल ध्वनि से जीवन से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।