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Hardoi News: 100 शैया अस्पताल में इलाज नहीं मिलने पर बच्चे की मौत, हंगामा

Sat, 15 Jul 2023 01:55 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 15 Jul 2023 01:55 AM IST
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Child dies due to lack of treatment in 100 bed hospital, uproar
बच्चे के शव को गोद में लेकर विलाप करती महिला। - फोटो : Samvad
नगर के 100 शैया युक्त संयुक्त अस्पताल में डायरिया से पीड़ित 5 साल के बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकों पर इलाज नहीं करने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों को समझाकर शांत किया। बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
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बुलंदशहर के रामघाट थाना क्षेत्र के गांव कुढ़ेनी निवासी निरंजन सिंह ने बताया कि उनका 5 वर्षीय बेटा पवन कुमार डायरिया से पीड़ित था। शुक्रवार को वह बच्चे को अतरौली के अवंतीबाई चौराहा स्थित 100 शैया युक्त संयुक्त चिकित्सालय में इलाज के लिए लेकर पहुंचे। काउंटर पर पर्चा बनवा लिया और बालक को ओपीडी में लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सक ने बच्चे को देखा और इमरजेंसी में ले जाने को कहा। अस्पताल में इमरजेंसी ही नहीं चल रही थी। इसी भागदौड़ में बच्चे की मौत हो गई।
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पीड़ित का भी आरोप है कि बड़े डॉक्टर अस्पताल में मौजूद थे, लेकिन वह बच्चे को देखने तक नहीं आए। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर इंस्पेक्टर क्राइम प्रमोद कुमार मौके पर पहुंचे। परिजनों को समझाकर शांत किया। अस्पताल प्रभारी डॉ. दुर्गेश कुमार ने बताया कि बच्चे का इलाज निजी चिकित्सक के यहां चल रहा था। परिजन जब यहां लेकर आए तो बालक मृत हो चुका था। चिकित्सकों द्वारा इलाज नहीं दिए जाने के आरोप बेबुनियाद हैं।
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100 शैया अस्पताल में नहीं चलती इमरजेंसी : 100 शैया अस्पताल में महज ओपीडी चलती है। इतने बड़े अस्पताल में मरीजों को इमरजेंसी सेवाओं का लाभ नहीं मिलना स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े करता है। यहां पर एक ही परिसर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 100 शैया अस्पताल चलते हैं। दोनों में ही ओपीडी होती है। लेकिन इमरजेंसी सिर्फ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही चलती है। ज्यादातर मरीज अस्पताल बड़ा होने कारण 100 शैया के ही पर्चे बनवाते हैं। लेकिन वहां इमरजेंसी नहीं होने के कारण मरीजों को सीएचसी की बिल्डिंग में भागना पड़ता है। समाजसेवी वरुण चौधरी ने बताया कि 100 शैया अस्पताल में दोपहर को ही कर्मचारी घर चले जाते हैं इसलिए उनकी मन मर्जी से इमरजेंसी सेवा मरीजों को नहीं मिल रही। यह बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का उदाहरण है।
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