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Hardoi News: नाबालिग से दुष्कर्म में सात साल की सजा

Thu, 18 Jun 2026 11:15 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:15 PM IST
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Car overturns after hitting divider while driver was checking route on mobile map; one dead.
हरदोई। नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी कथित प्रेमी को अपर जिला जज (विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट) मनमोहन सिंह ने सात साल की सजा सुनाई है। उस पर बीस हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। जुर्माने की आधी रकम बतौर क्षतिपूर्ति किशोरी को देने के आदेश दिए हैं। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। पूरे मामले में नामजद एक महिला को बरी कर दिया गया है।
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मझिला थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने छह मई 2017 को तत्कालीन एसपी से शिकायत की थी। इसमें बताया था कि 23 अप्रैल को उसकी बेटी (16) शौच के लिए घर से गई थी और फिर वापस नहीं आई। इसकी शिकायत 25 अप्रैल को थाने में थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी बीच पता चला कि शाहजहांपुर जनपद के रौजा थाना क्षेत्र के डीगुरपुर निवासी रामू कुछ लोगों की मदद से उसकी बेटी को बहलाकर ले गए थे।
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एसपी के आदेश पर रामू के साथ ही गांव निवासी प्रमोद, विनोद और सुनीता पर भी प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इन तीनोें पर भी किशोरी को बहलाकर रामू के साथ भेज देने का आरोप था। सात सितंबर 2019 को पुलिस ने आंझी स्टेशन के पास से किशोरी को खोज लिया। विवेचना के बाद पुलिस ने रामू और सुनीता के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। रामू पर दुष्कर्म और सुनीता पर बहलाने के आरोपों की पुष्टि हुई थी।
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अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। इसके साथ ही 11 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपर जिला जज ने रामू को सात साल की सजा सुनाई है। सुनीता को बरी कर दिया है।



किशोरी ने पहले कहा मर्जी से गई और शादी कर ली, बाद में मुकरी
किशोरी के बयान पूरे मामले में कई बार बदले। घटना के पांच माह बाद पुलिस ने किशोरी को तलाश लिया था। पुलिस केा दिए बयान में किशोरी ने कहा था कि उसके गांव में रामू की बहन ब्याही है। यहां रामू के आने जाने के दौरान नजदकियां हो गई थीं। वह अपनी मर्जी से रामू के साथ गई थी और शादी भी की थी। अपनी मर्जी से ही दोनों दिल्ली गए थे और वहां पांच माह साथ में रहे थे। मजिस्ट्रेट के सामने भी यही बयान दोहराए थे। सुनवाई के दौरान जब किशोरी को न्यायालय में बुलाया गया तो उसने बयान पलट दिए। उसने कहा कि रामू उसे बहलाकर ले गया और दुष्कर्म किया था। इस पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने पूछा की 5 महीने तक उसने विरोध क्यों नहीं किया तो उसका कोई जवाब नहीं दे सकी।



कानून की नजर में नाबालिग की सहमति शून्य....
अपर जिला जज ने स्कूल के दस्तावेजों की जांच की। इससे यह साबित हुआ कि घटना के समय किशोरी की उम्र 16 साल दो माह थी। अपर जिला जज ने कहा कि नाबालिग की सहमति या मर्जी कानून की नजर में शून्य मानी जाती है। अगर किशोरी अपनी मर्जी से जाने संबंध बनाने की बात स्वीकार भी कर ले, तो भी कानून उसे अपराध ही मानेगा क्योंकि नाबालिग सही-गलत का फैसला लेने के लिए कानूनन परिपक्व नहीं होती।
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