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Hardoi News: सिरिंज खरीदकर लाओ तब अस्पताल में लगेगा एंटी रैबीज
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फोटो- 25- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाली। संवाद
पाली। न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे कागजों पर ही दुरुस्त हैं। जमीनी हकीकत बीमार है। आलम यह है कि एंटी रैबीज लगवाने के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंच रहे मरीजों को सिरिंज खुद ही खरीदकर लानी पड़ती है। महज पांच रुपये में मिलने वाली सिरिंज भी स्वास्थ्य महकमा जरूरतमंद मरीजों को उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। बाजार से लाने पर ही मरीजों को एंटी रैबीज लग पाता है।
न्यू पीएचसी में न सिर्फ नगर के बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। हर रोज औसतन 30 से 40 लोग कुत्ते और बंदर काटने के कारण यहां आते हैं। कुत्ते और बंदर के काटने पर एंटी रैबीज इंजेक्शन सबसे पहला इलाज माना जाता है। ऐसे में मरीज आनन फानन न्यू पीएचसी पहुंचते हैं। वहां पहुंचने पर तैनात स्टाफ मरीज और उनके तीमारदार से एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाने के लिए सिरिंज लाने को कहते हैं। हालांकि रैबीज इंजेक्शन के साथ सिरिंज की व्यवस्था भी सरकारी अस्पतालों में निशुल्क रहती है फिर भी मजबूरी में मरीज मेडिकल स्टोर से सिरिंज खरीदकर लाते हैं। तब इंजेक्शन लग पाता है।
केस-1
इंजेक्शन न लगाने की मिलती धमकी
फरीगहना निवासी मुनेंद्र पाल ने बताया कि उनकी पत्नी प्रेमवती (48) को कुत्ते ने काट लिया था। सोमवार को वह पत्नी को लेकर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पीएचसी पहुंचे। वहां कर्मचारी ने सिरिंज बाहर से लाने को कहा। उन्होंने विरोध किया तो इंजेक्शन न लगाने की धमकी दी गई। मजबूरन बाहर से सिरिंज खरीदकर लानी पड़ी।
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केस-2
मेडिकल स्टोर की लगानी पड़ती दौड़
नगर के मोहल्ला सराय सैफ निवासी विपिन (19) ने बताया कि उसे भी कुत्ते ने काट लिया था। सोमवार को वह इंजेक्शन लगवाने पीएचसी पहुंचे। यहां भी बाहर से सिरिंज खरीदकर लाने के लिए कहा गया। मेडिकल स्टोर से पांच रुपये की सिरिंज खरीदकर लाए तब जाकर उन्हें एंटी रैबीज का इंजेक्शन लग सका।
एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाने के लिए प्रयोग होने वाली सिरिंज उपलब्ध है। मरीजों से बाहर से सिरिंज लाने के लिए क्यों कहा गया इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी मिलने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई होगी। मरीज और तीमारदारों से भी अनुरोध है कि मेडिकल स्टोर से सिरिंज खरीदकर न लाएं। पीएचसी में सिरिंज उपलब्ध हैं। -डॉ. विनीत तिवारी, चिकित्सा प्रभारी, न्यू पीएचसी
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न्यू पीएचसी में न सिर्फ नगर के बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। हर रोज औसतन 30 से 40 लोग कुत्ते और बंदर काटने के कारण यहां आते हैं। कुत्ते और बंदर के काटने पर एंटी रैबीज इंजेक्शन सबसे पहला इलाज माना जाता है। ऐसे में मरीज आनन फानन न्यू पीएचसी पहुंचते हैं। वहां पहुंचने पर तैनात स्टाफ मरीज और उनके तीमारदार से एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाने के लिए सिरिंज लाने को कहते हैं। हालांकि रैबीज इंजेक्शन के साथ सिरिंज की व्यवस्था भी सरकारी अस्पतालों में निशुल्क रहती है फिर भी मजबूरी में मरीज मेडिकल स्टोर से सिरिंज खरीदकर लाते हैं। तब इंजेक्शन लग पाता है।
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केस-1
इंजेक्शन न लगाने की मिलती धमकी
फरीगहना निवासी मुनेंद्र पाल ने बताया कि उनकी पत्नी प्रेमवती (48) को कुत्ते ने काट लिया था। सोमवार को वह पत्नी को लेकर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पीएचसी पहुंचे। वहां कर्मचारी ने सिरिंज बाहर से लाने को कहा। उन्होंने विरोध किया तो इंजेक्शन न लगाने की धमकी दी गई। मजबूरन बाहर से सिरिंज खरीदकर लानी पड़ी।
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केस-2
मेडिकल स्टोर की लगानी पड़ती दौड़
नगर के मोहल्ला सराय सैफ निवासी विपिन (19) ने बताया कि उसे भी कुत्ते ने काट लिया था। सोमवार को वह इंजेक्शन लगवाने पीएचसी पहुंचे। यहां भी बाहर से सिरिंज खरीदकर लाने के लिए कहा गया। मेडिकल स्टोर से पांच रुपये की सिरिंज खरीदकर लाए तब जाकर उन्हें एंटी रैबीज का इंजेक्शन लग सका।
एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाने के लिए प्रयोग होने वाली सिरिंज उपलब्ध है। मरीजों से बाहर से सिरिंज लाने के लिए क्यों कहा गया इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी मिलने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई होगी। मरीज और तीमारदारों से भी अनुरोध है कि मेडिकल स्टोर से सिरिंज खरीदकर न लाएं। पीएचसी में सिरिंज उपलब्ध हैं। -डॉ. विनीत तिवारी, चिकित्सा प्रभारी, न्यू पीएचसी

फोटो- 25- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाली। संवाद

फोटो- 25- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाली। संवाद

फोटो- 25- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाली। संवाद