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Hardoi News: जल संग्रहण, संरक्षण के साथ झील में कर सकेंगे बोटिंग
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हरदोई। बावन के सधईबेहटा के तालाब गांवों के घरों और सार्वजनिक स्थलों से निकलने वाले गंदे पानी को प्राकृतिक रूप से साफ-सुथरा करते हुए संग्रहीत और संरक्षित करेगा।
बारिश की एक-एक बूंद को सहेजने के साथ ही गांवों में गंदे पानी को प्राकृतिक रूप से साफ-सुथरा करते हुए संरक्षित और संग्रहीत किए जाने के उद्देश्य से गांवों के तालाबों का पुनरुद्धार कराया जा रहा है। लेकमैन आनंद मिल्लिगावड की कार्ययोजना पर विकास खंड बावन के सधई बेहटा में करीब 50 बीघा से अधिक भू-भाग वाले आपस में जुड़े दो तालाबों को झील के रूम में विकसित कराया जा रहा है। लेकमैन ने तालाब पर कराए काम को देखा और कहा कि जैसा मैं चाहता था, ठीक वैसे ही काम कराया गया है। दोनों तालाबों की खोदाई, बंधा निर्माण, दीवार, पिचिंग, इनलेट और आउटलेट के काम को देखा।
लेकमैन ने तालाब को कटोरा की आकृति में बनवाए जाने के लिए एक मीटर और गहरा कराने की सलाह दी। बंधा, तालाब के चारों ओर से पौधा व घास रोपण कराए जाने की बात कही। कहा कि तालाब के झील के रुप में विकसित हो जाने से यहां पर बोटिंग भी कराई जा सकेगी और यह तालाब प्रदेश के लिए मॉडल के रुप में विकसित होगा। बीडीओ डॉ. रामप्रकाश ने अब तक हुए काम की जानकारी दी और स्थलीय दिखाया भी। श्रम रोजगार उपायुक्त रवि प्रकाश सिंह, एपीओ मुख्यालय सौरभ रस्तोगी, प्रधान आशीष सिंह सोलंकी, पंचायत सचिव आनंद सिंह आदि साथ रहे।
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भू-गर्भ जल रिचार्ज के लिए बनवाई गई हैं पांच भूमिगत प्रणाली
बीडीओ डॉ. रामप्रकाश ने बताया कि धरती की कोख को पानी से लबालब करने के लिए करीब 50 बीघा से अधिक भू-भाग वाले तालाब में पांच भूमिगत पानी रिचार्ज प्रणाली बनवाई गई हैं। यह तालाब के पानी को धरती की कोख में पहुंचाने का काम करेंगे। इससे जल संग्रहण, संरक्षण के साथ ही भू-गर्भ रिचार्ज भी होता रहेगा।
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बारिश की एक-एक बूंद को सहेजने के साथ ही गांवों में गंदे पानी को प्राकृतिक रूप से साफ-सुथरा करते हुए संरक्षित और संग्रहीत किए जाने के उद्देश्य से गांवों के तालाबों का पुनरुद्धार कराया जा रहा है। लेकमैन आनंद मिल्लिगावड की कार्ययोजना पर विकास खंड बावन के सधई बेहटा में करीब 50 बीघा से अधिक भू-भाग वाले आपस में जुड़े दो तालाबों को झील के रूम में विकसित कराया जा रहा है। लेकमैन ने तालाब पर कराए काम को देखा और कहा कि जैसा मैं चाहता था, ठीक वैसे ही काम कराया गया है। दोनों तालाबों की खोदाई, बंधा निर्माण, दीवार, पिचिंग, इनलेट और आउटलेट के काम को देखा।
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लेकमैन ने तालाब को कटोरा की आकृति में बनवाए जाने के लिए एक मीटर और गहरा कराने की सलाह दी। बंधा, तालाब के चारों ओर से पौधा व घास रोपण कराए जाने की बात कही। कहा कि तालाब के झील के रुप में विकसित हो जाने से यहां पर बोटिंग भी कराई जा सकेगी और यह तालाब प्रदेश के लिए मॉडल के रुप में विकसित होगा। बीडीओ डॉ. रामप्रकाश ने अब तक हुए काम की जानकारी दी और स्थलीय दिखाया भी। श्रम रोजगार उपायुक्त रवि प्रकाश सिंह, एपीओ मुख्यालय सौरभ रस्तोगी, प्रधान आशीष सिंह सोलंकी, पंचायत सचिव आनंद सिंह आदि साथ रहे।
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भू-गर्भ जल रिचार्ज के लिए बनवाई गई हैं पांच भूमिगत प्रणाली
बीडीओ डॉ. रामप्रकाश ने बताया कि धरती की कोख को पानी से लबालब करने के लिए करीब 50 बीघा से अधिक भू-भाग वाले तालाब में पांच भूमिगत पानी रिचार्ज प्रणाली बनवाई गई हैं। यह तालाब के पानी को धरती की कोख में पहुंचाने का काम करेंगे। इससे जल संग्रहण, संरक्षण के साथ ही भू-गर्भ रिचार्ज भी होता रहेगा।