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बीईओ के निजी कर्मी बने बाबू
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Fri, 14 Aug 2015 12:08 AM IST
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शासन स्तर से टीचरों को ब्लाक स्तर पर ही समस्याओं के
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निस्तारण के लिए ब्लाक संसाधन केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। प्रति
वर्ष लाखों खर्च होने के बाद भी ब्लाक स्तर पर टीचरों की समस्याओं का
समाधान नहीं हो पा रहा है। केंद्र पर टीचरों के बिल आदि फीडिंग को कंप्यूटर
और जनरेटर आदि की सुविधा तो दे दी गई, पर यह सब मात्र शोपीस बने हुए
बीआरसी की शोभा बढ़ा रहे हैं।
केंद्र पर तैनात लेखाकार वित्तीय कार्य को छोड़कर बीईओ के निजी कर्मी बन कर रह गए हैं। इससे टीचरों को मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। ज्ञात हो कि परिषदीय स्कूलों के टीचरों के प्रशिक्षण एवं विभाग की योजनाओं के विधिवत क्रियान्वयन को हर ब्लाक में ब्लाक संसाधन बनाए गए थे।
इसके लिए शासन की ओर से टीचरों की सुविधा और शिक्षा को गुणवत्ता परक बनाने के लिए भारी भरकम फौज की नियुक्ति की गई थी। ब्लाक संसाधन केंद्र पर विषय बार पांच एबीआरसी की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा एक लिपिक, एक लेखाकार और एक अर्दली सहित कंप्यूटर आपरेटर को भी संसाधन केंद्र पर नियुक्त किया गया है।
नियमानुसार केंद्र पर प्रतिदिन सभी एबीआरसी और अन्य कर्मियों को समय से उपस्थित होना चाहिए, पर केंद्र पर कुछ को छोड़कर शेष तो आए दिन गायब ही बने रहते हैं। कुल मिलाकर लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी शिक्षा की गुणवत्ता में कोई सुधार होता नहीं दिखाई दे रहा और ब्लाक संसाधन केंद्र अपने उद्देश्य से भटक हुए हैं।
शासन की ओर से जिस उद्देश्य से कुछ टीचरों को एबीआरसी बनाया गया है, वह पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है। उधर, ब्लाक संसाधन केंद्र पर तैनात लिपिक, अर्दली, कंप्यूटर आपरेटर व लेखाकार जिला मुख्यालय पर रहते हैं, जबकि ब्लाक संसाधन केंद्र पर ही इन लोगों के रहने के निर्देश हैं, पर लिपिक सप्ताह में एक दिन बीआरसी पर पहुंचते हैं, तो अधिकतर एबीआरसी नदारद रहते हैं।
इसके अलावा ब्लाक संसाधन केंद्र पर वित्तीय अभिलेखों को तैयार करने और उनकी देखरेख के लिए हर ब्लाक पर एक-एक लेखाकार की तैनाती की गई थी। ताकि संसाधन केंद्र और उससे संबंधित स्कूलों के वित्तीय अभिलेख तैयार कर सके, पर बीआरसी पर उनका कार्य सिर्फ बीईओ के निजी कार्य तक ही सिमट कर रह गया है।
उनको वित्तीय अभिलेख निजी स्वार्थवश मुहैया नहीं कराए जाते हैं। वह बीआरसी व वरिष्ठ एबीआरसी की मिली भगत से तैयार किए जाते हैं। ब्लाक संसाधन केंद्र पर लगे कंप्यूटर, ब्राडबैंड व कंप्यूटर की स्टेशनरी के लिए प्रति वर्ष 57 हजार रुपये प्रति ब्लाक केंद्र भेजा जाता है।
इसके अलावा कार्यालय के रखरखाव व मरम्मत को बीआरसी पर सर्व शिक्षा अभियान के लिए बजट मुहैया कराया जाता है। इसके अलावा कई प्रशिक्षण के प्रति शिक्षक, शिक्षामित्र के हिसाब से बजट मुहैया कराया जाता है।
केंद्र पर तैनात लेखाकार वित्तीय कार्य को छोड़कर बीईओ के निजी कर्मी बन कर रह गए हैं। इससे टीचरों को मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। ज्ञात हो कि परिषदीय स्कूलों के टीचरों के प्रशिक्षण एवं विभाग की योजनाओं के विधिवत क्रियान्वयन को हर ब्लाक में ब्लाक संसाधन बनाए गए थे।
इसके लिए शासन की ओर से टीचरों की सुविधा और शिक्षा को गुणवत्ता परक बनाने के लिए भारी भरकम फौज की नियुक्ति की गई थी। ब्लाक संसाधन केंद्र पर विषय बार पांच एबीआरसी की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा एक लिपिक, एक लेखाकार और एक अर्दली सहित कंप्यूटर आपरेटर को भी संसाधन केंद्र पर नियुक्त किया गया है।
नियमानुसार केंद्र पर प्रतिदिन सभी एबीआरसी और अन्य कर्मियों को समय से उपस्थित होना चाहिए, पर केंद्र पर कुछ को छोड़कर शेष तो आए दिन गायब ही बने रहते हैं। कुल मिलाकर लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी शिक्षा की गुणवत्ता में कोई सुधार होता नहीं दिखाई दे रहा और ब्लाक संसाधन केंद्र अपने उद्देश्य से भटक हुए हैं।
शासन की ओर से जिस उद्देश्य से कुछ टीचरों को एबीआरसी बनाया गया है, वह पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है। उधर, ब्लाक संसाधन केंद्र पर तैनात लिपिक, अर्दली, कंप्यूटर आपरेटर व लेखाकार जिला मुख्यालय पर रहते हैं, जबकि ब्लाक संसाधन केंद्र पर ही इन लोगों के रहने के निर्देश हैं, पर लिपिक सप्ताह में एक दिन बीआरसी पर पहुंचते हैं, तो अधिकतर एबीआरसी नदारद रहते हैं।
इसके अलावा ब्लाक संसाधन केंद्र पर वित्तीय अभिलेखों को तैयार करने और उनकी देखरेख के लिए हर ब्लाक पर एक-एक लेखाकार की तैनाती की गई थी। ताकि संसाधन केंद्र और उससे संबंधित स्कूलों के वित्तीय अभिलेख तैयार कर सके, पर बीआरसी पर उनका कार्य सिर्फ बीईओ के निजी कार्य तक ही सिमट कर रह गया है।
उनको वित्तीय अभिलेख निजी स्वार्थवश मुहैया नहीं कराए जाते हैं। वह बीआरसी व वरिष्ठ एबीआरसी की मिली भगत से तैयार किए जाते हैं। ब्लाक संसाधन केंद्र पर लगे कंप्यूटर, ब्राडबैंड व कंप्यूटर की स्टेशनरी के लिए प्रति वर्ष 57 हजार रुपये प्रति ब्लाक केंद्र भेजा जाता है।
इसके अलावा कार्यालय के रखरखाव व मरम्मत को बीआरसी पर सर्व शिक्षा अभियान के लिए बजट मुहैया कराया जाता है। इसके अलावा कई प्रशिक्षण के प्रति शिक्षक, शिक्षामित्र के हिसाब से बजट मुहैया कराया जाता है।