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Hardoi News: पीडियाट्रिक वार्ड के बेड फुल, बेंच पर किया जा रहा बच्चों का इलाज

Thu, 30 May 2024 10:49 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 30 May 2024 10:49 PM IST
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Beds in pediatric ward are full, children are being treated on benches.
हरदोई। मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल का पीडियाट्रिक वार्ड खुद ही बीमार हो गया है। 10 बेड के वार्ड में 12 बच्चे भर्ती हैं। बीमार बच्चों को भटकना न पड़े इसलिए बेंचनुमा बेड पर भर्ती कर बच्चों का उपचार किया जा रहा है। पीडियाट्रिक वार्ड के बाहर भी गंदा पानी एकत्र है।
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जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में बच्चों को इलाज के लिए भर्ती किया जाता है। इन दिनों भीषण गर्मी के कारण बच्चे उल्टी-दस्त और पेट दर्द से परेशान होकर ओपीडी में पहुंच रहे हैं। कुछ बच्चों को तो दवा देकर ही वापस भेजा जा रहा है, जबकि कुछ की हालत गंभीर होने पर इन्हें पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। लगातार मरीजों के आने के कारण पीडियाट्रिक वार्ड में बेड कम पड़ने लगे हैं।
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दरअसल 10 बेड के इस वार्ड में बृहस्पतिवार को 12 बच्चे भर्ती मिले। इनमें से दो बच्चों का इलाज बेंचनुमा बेड पर भर्ती कर किया जा रहा है। वार्ड से जुड़े सूत्र बताते हैं कि गंभीर हालत में आने वाले मरीजों को भर्ती करना जरूरी होता है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में चार बेंच भी इसी वार्ड में डाल दी गई हैं। ऐसा मरीजों को सहूलियत देने के लिए किया गया है।
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सादिकपुर निवासी सुमन की बेटी गौरी की तबीयत उल्टी-दस्त और पेट दर्द के कारण खराब हो गई थी। उसे ओपीडी में डॉक्टर ने भर्ती करने की सलाह दी। बेड खाली नहीं थे तो बेंच डालकर भर्ती किया गया।

रजुआपुर निवासी रिंकू की बेटी अंजना भी पेट दर्द से परेशान थी। ओपीडी में चिकित्सक को दिखाया तो भर्ती करने की सलाह दी। पीडियाट्रिक वार्ड में पहुंचे तो बेड खाली नहीं थे। एक बेंच डालकर भर्ती किया गया।

पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती मरीजोंं को राहत देने के लिए चार एसी लगे हैं। बृहस्पतिवार को यहां दो एसी खराब मिले। दो चल रहे थे। भर्ती मरीजों के तीमारदारों ने बताया कि कई दिनों से दो एसी ही चल रहे हैं।


हर मरीज को बेहतर सुविधा दिए जाने की कोशिश की जा रही है। बेड से अधिक मरीज आ रहे हैं तो यथा संभव वैकल्पिक व्यवस्था कर उन्हें भी उपचार दिया जा रहा है। एसी खराब हाेने की बात संज्ञान में नहीं थी। अब पता चला है तो सही करा देंगे। -डॉ. आर्य देश दीपक, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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