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तन से नहीं मन से बने सुंदर : अनूप महाराज
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फोटो-01- कथा सुनाते कथा व्यास अनूप ठाकुर
- फोटो : HARDOI
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बावन। ब्लॉक के ग्राम लोनार में श्रीमद्भागवत कथा में व्यास अनूप ठाकुर महाराज ने कहा कि भगवान को सुंदर तन नहीं, बल्कि सुंदर मन पसंद है। निर्मल मन जन सो मोहिं पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा! अर्थात शरीर वही सुंदर है, जिस शरीर को पाकर भगवान का भजन हो सके।
महराज ने श्रोताओं से कहा कि सोई पावन सोई सुभग शरीरा, जो तन पाई भजिई रघुवीरा! सजावटी शरीर सुंदर नहीं शरीर और मन वहीं सुंदर है जिस शरीर को पाकर ज्यादा से ज्यादा प्रभु का भजन हो सके। कहा कि इस धरा धाम पर जब जब पापाचार अत्याचार दुराचार बढ़ता है, तब परमात्मा अवतार लेकर दुष्टों को मारकर धर्म की स्थापना करते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि द्वापर युग में जब पृथ्वी पर राक्षसों के अत्याचार बढ़ने लगे तो पृथ्वी गाय का रूप धारण कर अपनी व्यथा सुनाने के लिए और उद्धार के लिए ब्रह्मा जी के पास गई। पृथ्वी पर पाप कर्म बहुत बढ़ गए यह देखकर सभी देवता भी बहुत चिंतित थे।
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ब्रह्माजी सब देवताओं को साथ लेकर पृथ्वी को भगवान विष्णु के पास क्षीर सागर ले गए। उस समय भगवान विष्णु शयन कर रहे थे। स्तुति करने पर भगवान की निद्रा भंग हो गई।
भगवान ने ब्रह्मा जी एवं सभी देवताओं को देखकर उनके आने का कारण पूछा तो पृथ्वी बोलीं कि भगवान मैं पाप के बोझ से दबी जा रही हूं मेरा उद्धार करें।
भगवान विष्णु आकाशवाणी करते हुए बोले चिंता न करें मैं अवतार लेकर पृथ्वी पर आऊंगा और इसे पापों से मुक्ति प्रदान करूंगा।
इसके बाद भगवान ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर कंस का वध कर उसके अत्याचारों से सभी को मुक्त किया। इस मौके पर मोनू सिंह राठौड़, श्रीकृष्ण सिंह राठौड़, विकास सिंह राठौर, शनि सिंह, श्याम सिंह, अनमोल त्रिवेदी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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महराज ने श्रोताओं से कहा कि सोई पावन सोई सुभग शरीरा, जो तन पाई भजिई रघुवीरा! सजावटी शरीर सुंदर नहीं शरीर और मन वहीं सुंदर है जिस शरीर को पाकर ज्यादा से ज्यादा प्रभु का भजन हो सके। कहा कि इस धरा धाम पर जब जब पापाचार अत्याचार दुराचार बढ़ता है, तब परमात्मा अवतार लेकर दुष्टों को मारकर धर्म की स्थापना करते हैं।
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भगवान श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि द्वापर युग में जब पृथ्वी पर राक्षसों के अत्याचार बढ़ने लगे तो पृथ्वी गाय का रूप धारण कर अपनी व्यथा सुनाने के लिए और उद्धार के लिए ब्रह्मा जी के पास गई। पृथ्वी पर पाप कर्म बहुत बढ़ गए यह देखकर सभी देवता भी बहुत चिंतित थे।
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ब्रह्माजी सब देवताओं को साथ लेकर पृथ्वी को भगवान विष्णु के पास क्षीर सागर ले गए। उस समय भगवान विष्णु शयन कर रहे थे। स्तुति करने पर भगवान की निद्रा भंग हो गई।
भगवान ने ब्रह्मा जी एवं सभी देवताओं को देखकर उनके आने का कारण पूछा तो पृथ्वी बोलीं कि भगवान मैं पाप के बोझ से दबी जा रही हूं मेरा उद्धार करें।
भगवान विष्णु आकाशवाणी करते हुए बोले चिंता न करें मैं अवतार लेकर पृथ्वी पर आऊंगा और इसे पापों से मुक्ति प्रदान करूंगा।
इसके बाद भगवान ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर कंस का वध कर उसके अत्याचारों से सभी को मुक्त किया। इस मौके पर मोनू सिंह राठौड़, श्रीकृष्ण सिंह राठौड़, विकास सिंह राठौर, शनि सिंह, श्याम सिंह, अनमोल त्रिवेदी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।