{"_id":"6238bbcfc3e8963d7679f6fb","slug":"armaan-wakes-up-on-seeing-the-blossom-mango-will-be-born-bumper-hardoi-news-knp686736423","type":"story","status":"publish","title_hn":"बौर को देख जागे अरमान, बंपर पैदा होगा आम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बौर को देख जागे अरमान, बंपर पैदा होगा आम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरदोई/हरपालपुर। आम की फसल पर लागू होने वाला प्राकृतिक रोटेशन चार्ट का असर हुआ तो इस बार आम का उत्पादन पिछले वर्ष की अपेक्षा ज्यादा होगा।
आम के पेड़ों में आए भरपूर बौर से अरमान जागने लगे हैं। यदि कीटों से बहुत ज्यादा नुकसान न हुआ तो भरपूर आम होने का अनुमान है। खास तौर से देसी आम के पेड़ों में बौर उम्मीदों से अधिक आया है।
जानकारों का कहना है कि दशहरी, चौंसा, लंगड़ा, बंबइया, देसी प्रजाति के आम की फसल का जो प्राकृतिक रोटेशन चार्ट माना जाता है, इसके हिसाब से ही आम की पैदावार का अनुमान लगाया जाता है।
इस चार्ट को सही मानें तो एक साल पैदावार ज्यादा होती है, उसके अगले साल कम होती है फिर उसके अगले साल ज्यादा होती और तीसरी साल में भरपूर आम होता है।
जिले में लगभग साढ़े 6,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आम के बागान हैं। प्रमुख रूप से संडीला, कोथावां, भरावन, शाहाबाद ब्लाक क्षेत्रों में किसान आम की बागवानी करते हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा बावन, हरपालपुर एवं बिलग्राम, सांडी क्षेत्रों में अभी भी देसी आमों के पेड़ हैं। गत वर्ष आम की फसल का प्राकृतिक रोटेशन के हिसाब से पेदावार कम हुई थी।
इसके कारण यहां करीब दो लाख क्विंटल आम का उत्पादन हुआ था और बाजार में आम का भाव भी 30 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम रहा था। रोटेशन के हिसाब से यह वर्ष आम के लिए फसली वर्ष है। जिसके कारण आम के उत्पादन में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
बौर में कीट के लिए जारी हो चुका अलर्ट
आम के बौर में कीट लगने को लेकर बागवानी अनुसंधान केंद्र से मिले सुझावों को लेकर उद्यान विभाग अलर्ट जारी कर चुका है। आम के बौर को कीटों से बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार दवाओं का छिड़काव कर बौर को बचाने की सलाह दी जा चुकी है।
आम्रपाली आम का मिलेगा स्वाद
उद्यान विभाग के अनुसार, जिले के आम बागवानों का रुझान आम्रपाली आम की ओर बढ़ा है। यह आम की सबसे छोटे पौधे की प्रजाति मानी जाती है। लगाने के तीसरे साल से इसमें फल आने लगते हैं।
यह बड़े गमले में भी लग जाता है। आम के शौकीनों ने दो वर्ष पहले इस ओर रुख किया था। इस बार फसल आई तो आम्रपाली का स्वाद मिलेगा।
जल्द देगा तोतापरी और आम खास दस्तक
वैसे तो तोतापरी एवं आम खास के बाग जिले में नहीं है, मगर कुछ शौकिया लोगों ने लगाया था। गैर प्रदेशों से आने वाले तोतापरी एवं आम खास, आम में मिठास कम मगर खुशबू ज्यादा होती है। इन आमों की दस्तक अप्रैल माह से बाजार में शुरू हो जाएगी।
इस समय आम का बौर पूरी तरह से पेड़ों की शाखाओं पर आ चुका है। जल्द ही यह बौर बतिया का रूप लेने लगेगा और 15 मई तक आम अपने पूर्ण आकार में आ जाएगा, जिसके बाद आम में जारी पड़ने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
- हरिओम, उद्यान निरीक्षक
विज्ञापन
आम के पेड़ों में आए भरपूर बौर से अरमान जागने लगे हैं। यदि कीटों से बहुत ज्यादा नुकसान न हुआ तो भरपूर आम होने का अनुमान है। खास तौर से देसी आम के पेड़ों में बौर उम्मीदों से अधिक आया है।
जानकारों का कहना है कि दशहरी, चौंसा, लंगड़ा, बंबइया, देसी प्रजाति के आम की फसल का जो प्राकृतिक रोटेशन चार्ट माना जाता है, इसके हिसाब से ही आम की पैदावार का अनुमान लगाया जाता है।
विज्ञापन
इस चार्ट को सही मानें तो एक साल पैदावार ज्यादा होती है, उसके अगले साल कम होती है फिर उसके अगले साल ज्यादा होती और तीसरी साल में भरपूर आम होता है।
जिले में लगभग साढ़े 6,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आम के बागान हैं। प्रमुख रूप से संडीला, कोथावां, भरावन, शाहाबाद ब्लाक क्षेत्रों में किसान आम की बागवानी करते हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा बावन, हरपालपुर एवं बिलग्राम, सांडी क्षेत्रों में अभी भी देसी आमों के पेड़ हैं। गत वर्ष आम की फसल का प्राकृतिक रोटेशन के हिसाब से पेदावार कम हुई थी।
इसके कारण यहां करीब दो लाख क्विंटल आम का उत्पादन हुआ था और बाजार में आम का भाव भी 30 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम रहा था। रोटेशन के हिसाब से यह वर्ष आम के लिए फसली वर्ष है। जिसके कारण आम के उत्पादन में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
बौर में कीट के लिए जारी हो चुका अलर्ट
आम के बौर में कीट लगने को लेकर बागवानी अनुसंधान केंद्र से मिले सुझावों को लेकर उद्यान विभाग अलर्ट जारी कर चुका है। आम के बौर को कीटों से बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार दवाओं का छिड़काव कर बौर को बचाने की सलाह दी जा चुकी है।
आम्रपाली आम का मिलेगा स्वाद
उद्यान विभाग के अनुसार, जिले के आम बागवानों का रुझान आम्रपाली आम की ओर बढ़ा है। यह आम की सबसे छोटे पौधे की प्रजाति मानी जाती है। लगाने के तीसरे साल से इसमें फल आने लगते हैं।
यह बड़े गमले में भी लग जाता है। आम के शौकीनों ने दो वर्ष पहले इस ओर रुख किया था। इस बार फसल आई तो आम्रपाली का स्वाद मिलेगा।
जल्द देगा तोतापरी और आम खास दस्तक
वैसे तो तोतापरी एवं आम खास के बाग जिले में नहीं है, मगर कुछ शौकिया लोगों ने लगाया था। गैर प्रदेशों से आने वाले तोतापरी एवं आम खास, आम में मिठास कम मगर खुशबू ज्यादा होती है। इन आमों की दस्तक अप्रैल माह से बाजार में शुरू हो जाएगी।
इस समय आम का बौर पूरी तरह से पेड़ों की शाखाओं पर आ चुका है। जल्द ही यह बौर बतिया का रूप लेने लगेगा और 15 मई तक आम अपने पूर्ण आकार में आ जाएगा, जिसके बाद आम में जारी पड़ने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
- हरिओम, उद्यान निरीक्षक