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गुस्साए एमपीडब्लू का कलक्ट्रेट में प्रदर्शन
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Tue, 14 Apr 2015 12:31 AM IST
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उत्तर प्रदेश एमपीडब्लू एसोसिएशन के बैनर तले
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कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए एमपीडब्लू ने मल्टीपरपज हेल्थ वर्कर पुरुष
को एक वर्ष का प्रशिक्षण करवाकर स्वास्थ्य कार्यकर्ता पुरुष पद पर समायोजन
की मांग की। एमपीडब्लू ने सोमवार को कलक्ट्रेट परिसर में विरोध प्रदर्शन
करने के बाद मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन नगर
मजिस्ट्रेट को सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
मल्टीपरपज हेल्थ वर्कर पुरुष के पद से एक वर्षीय प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वास्थ्य कार्यकर्ता पुरुष पद पर समायोजित होने के लिए एमपीडब्लू कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कलक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष देश दीपक द्विवेदी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में 3,575 एमपीडब्लू संविदा कर्मी प्रदेश में तीन साल से निरंतर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
वह लोग गांव गांव जाकर डेंगू, मलेरिया, इंसेफलाइटिस, कालाजार जैसी अन्य कई खतरनाक बीमारियों पर रोकथाम का प्रयास करते हैं। प्रदेश भर में इन बीमारियों के बढ़ने के कारण अब हेल्थ वर्कर पुरुषों की तैनाती आवश्यक हो गई है। बताया कि एक दैनिक समाचार पत्र में मुख्य सचिव ने रेग्यूलर पदों की संख्या 7751 बताई है, जबकि हकीकत है कि वर्ष 99 से हेल्थ वर्कर पुरुषों की नियुक्तियां नहीं की गईं, जबकि अब जरूरत बढ़ने लगी है।
कहा कि मल्टी परपज हेल्थ वर्कर पुरुष और स्वास्थ्य कार्यकर्ता पुरुष के कार्य एवं दायित्व समान हैं, ऐसे में हेल्थ वर्कर पुरुष के पद पर नियुक्ति पाने का हक सबसे पहले एमपीडब्लू का है, वहीं अब एमपीडब्लू को तीन वर्ष की सेवा देने के बाद हटाया जा रहा है।
उन्हाेंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन देकर एमपीडब्लू को प्रशिक्षण करवाकर समायोजित करने की मांग की। कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो वह लोग धरना प्रदर्शन करेंगे। इस मौके पर धीरेंद्र सिंह चौहान, प्रतीक द्विवेदी और श्रीओम आदि मौजूद थे।
मल्टीपरपज हेल्थ वर्कर पुरुष के पद से एक वर्षीय प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वास्थ्य कार्यकर्ता पुरुष पद पर समायोजित होने के लिए एमपीडब्लू कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कलक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष देश दीपक द्विवेदी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में 3,575 एमपीडब्लू संविदा कर्मी प्रदेश में तीन साल से निरंतर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
वह लोग गांव गांव जाकर डेंगू, मलेरिया, इंसेफलाइटिस, कालाजार जैसी अन्य कई खतरनाक बीमारियों पर रोकथाम का प्रयास करते हैं। प्रदेश भर में इन बीमारियों के बढ़ने के कारण अब हेल्थ वर्कर पुरुषों की तैनाती आवश्यक हो गई है। बताया कि एक दैनिक समाचार पत्र में मुख्य सचिव ने रेग्यूलर पदों की संख्या 7751 बताई है, जबकि हकीकत है कि वर्ष 99 से हेल्थ वर्कर पुरुषों की नियुक्तियां नहीं की गईं, जबकि अब जरूरत बढ़ने लगी है।
कहा कि मल्टी परपज हेल्थ वर्कर पुरुष और स्वास्थ्य कार्यकर्ता पुरुष के कार्य एवं दायित्व समान हैं, ऐसे में हेल्थ वर्कर पुरुष के पद पर नियुक्ति पाने का हक सबसे पहले एमपीडब्लू का है, वहीं अब एमपीडब्लू को तीन वर्ष की सेवा देने के बाद हटाया जा रहा है।
उन्हाेंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन देकर एमपीडब्लू को प्रशिक्षण करवाकर समायोजित करने की मांग की। कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो वह लोग धरना प्रदर्शन करेंगे। इस मौके पर धीरेंद्र सिंह चौहान, प्रतीक द्विवेदी और श्रीओम आदि मौजूद थे।