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Hardoi News: गैरइरादतन हत्या में 20 साल बाद पिता-पुत्र समेत चार को पांच-पांच साल की सजा
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हरदोई। गैरइरादतन हत्या के 20 साल पुराने मामले में पिता-पुत्र समेत चार अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया है।
विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति व जनजाति उत्पीड़न) सुनील कुमार सिंह ने चारों अभियुक्तों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई। साथ ही 48 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भी काटनी होगी। जुर्माने की आधी रकम बतौर क्षतिपूर्ति मृतक की पत्नी को भी देने के आदेश विशेष न्यायाधीश ने दिए हैं।
बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के दौलतपुर मजरा बक्शापुर गांव निवासी कुंवर ने 14 जून 2005 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उसने गांव के ही वीरेंद्र का खेत कूत पर लिया था। यही खेत पहले गांव के रामप्रसाद के पास था। गांव का ही राम प्रसाद इसी बात को लेकर, कुंवर और उसके परिजनों से नाराज था। 14 जून को कुंवर और उसका बेटा शिवप्रसाद, पत्नी चमेली रात करीब नौ बजे गांव के ही कल्लू के दरवाजे के सामने खड़े थे। इसी बीच रामप्रसाद अपने पुत्र श्याम सुंदर, राजेश, शोभाराम के साथ आया और गाली गलौज करने लगा। मना करने पर चारों ने मिलकर लाठी डंडों से पिटाई कर दी थी। शोर सुनकर कई लोग मौके पर आ गए तो आरोपी जान से मारने की धमकी देकर भाग निकले।
मारपीट में घायल शिव प्रसाद को हरदोई के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां से उसे लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया था। वहां 21 जुलाई को शिव प्रसाद की मौत हो गई थी। पुलिस ने गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज कर आरोपियों को जेल भेजा था। इसकी सुनवाई चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से पांच गवाह व 14 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर विशेष न्यायाधीश ने सजा सुनाई है।
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विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति व जनजाति उत्पीड़न) सुनील कुमार सिंह ने चारों अभियुक्तों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई। साथ ही 48 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भी काटनी होगी। जुर्माने की आधी रकम बतौर क्षतिपूर्ति मृतक की पत्नी को भी देने के आदेश विशेष न्यायाधीश ने दिए हैं।
बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के दौलतपुर मजरा बक्शापुर गांव निवासी कुंवर ने 14 जून 2005 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उसने गांव के ही वीरेंद्र का खेत कूत पर लिया था। यही खेत पहले गांव के रामप्रसाद के पास था। गांव का ही राम प्रसाद इसी बात को लेकर, कुंवर और उसके परिजनों से नाराज था। 14 जून को कुंवर और उसका बेटा शिवप्रसाद, पत्नी चमेली रात करीब नौ बजे गांव के ही कल्लू के दरवाजे के सामने खड़े थे। इसी बीच रामप्रसाद अपने पुत्र श्याम सुंदर, राजेश, शोभाराम के साथ आया और गाली गलौज करने लगा। मना करने पर चारों ने मिलकर लाठी डंडों से पिटाई कर दी थी। शोर सुनकर कई लोग मौके पर आ गए तो आरोपी जान से मारने की धमकी देकर भाग निकले।
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मारपीट में घायल शिव प्रसाद को हरदोई के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां से उसे लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया था। वहां 21 जुलाई को शिव प्रसाद की मौत हो गई थी। पुलिस ने गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज कर आरोपियों को जेल भेजा था। इसकी सुनवाई चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से पांच गवाह व 14 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर विशेष न्यायाधीश ने सजा सुनाई है।
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