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Hardoi News: बिजली सुधार के लिए 203 करोड़ का बजट, फिर भी 30 फीसदी काम बाकी

Tue, 18 Mar 2025 12:12 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई Updated Tue, 18 Mar 2025 12:12 AM IST
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A budget of 203 crores has been allocated for power improvement, yet 30% work is still pending
फोटो-18- मल्लावां के गोसंवा में स्थित विद्युत उपकेंद्र। संवाद
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- रिवैंप योजना से जनवरी तक काम पूरा करने का दिया गया था समय, निर्बाध बिजली आपूर्ति और फीडरों को अलग करने का कराया जाना है काम
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। केंद्र सरकार की ओर से निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए शुरू की गई रिवैंप योजना में प्रगति थम सी गई है। जिले में योजना के तहत कई स्थानों पर काम पूरा किया जा चुका है, लेकिन अभी भी 30 फीसदी तक काम अधूरा है। जबकि यह कार्य जनवरी में पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन मार्च भी समाप्त होने वाला है। अधिकारियों की अनदेखी के चलते यह कार्य निर्धारित अवधि में पूरे नहीं हो सके।
रिवैंप विद्युत सुधार योजना के तहत 24 घंटे बिजली आपूर्ति और फाल्ट होने पर सिर्फ एक ही लाइन प्रभावित किए जाने से संबंधित कार्य कराए जाने हैं। इसके लिए 33 व 11 केवी की नई लाइन का निर्माण, क्षमता वृद्धि, लो वोल्टेज में सुदृढ़ीकरण और सुरक्षित विद्युत आपूर्ति के लिए आर्म्ड सर्विस केबिल लगाने पर काम कराया गया है।
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इसके अलावा त्रुटिरहित सही बिल, समय पर बिल व भुगतान के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर भी इसी योजना से लगाए जा रहे हैं। योजना के तहत जिले में 203 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है, इसमें से 126 करोड़ रुपये खर्च कर काम कराए जा चुके हैं। शहर में तो योजना के तहत लगभग काम पूरा हो गया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी 30 फीसदी काम पूरा होना बाकी है। अधिकारियों से सहयोग की कमी के चलते काम समयावधि में पूरा नहीं हो पा रहा है।
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योजना से सात प्रकार के काम कराए जाने हैं
रिवैंप योजना से जिले में सात प्रकार के काम कराए जाने हैं। इनमें एलटी लाइनों पर आर्म्ड केबल लगाने, विद्युत कंडक्टरों और डैमेज केबलों को बदलने, लो वोल्टेज की समस्या को दूर करने के लिए फीडरों को अलग-अलग करने, 11 केवीए लाइन के फीडरोंं काे बनाने के लिए, 11 केवीए लाइनों की वृद्धि और 33 केवीए लाइनों में वृद्धि कर उनको दोबारा से संचालित करने का काम कराया जा रहा है।

चोरी रोकने के लिए बिछाई जा चुकीं आर्म्ड केबल
जिन क्षेत्रों में बिजली चोरी के अधिक मामले आए हैं। वहां पर आर्म्ड केबलें डाली गई हैं। इनमें शहर में आवास विकास कालोनी, रेलवे गंज फीडर दो, सरकुलर रोड, महोलिया शिवपार, एमजी मार्ग, डॉ. भूरा फीडर और कलक्ट्रेट फीडर पर लाइनें बिछाई जा चुकी हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्म्ड केबलें बिछाई जा चुकी हैं।

छह फीडरों को अलग करने का काम अधूरा पड़ा
जिले के शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में फीडराें को अलग करने का काम कराया जा रहा है। इसका काम ही अभी प्रगति नहीं पकड़ पा रहा है। अधिक लोड वाले फीडरों को हटाकर दूसरा फीडर बनाकर लोड कम किया जा रहा है। शहर के आशा नगर को चरौली से अलग कर दिया गया है और आशा गांव के नए फीडर से आपूर्ति दी गई। डिगिया फीडर और भरिगवां फीडर को भी अलग कर दिया गया। जिले के 33 फीडरों को अलग करने का काम है। 27 पूरे किए जा चुके हैं छह में काम अभी अधूरा है। इसमें माधौगंज के तकनौर व गौरा और मल्लावां का गोंसवा के तेंदुआ का फीडर अलग करने का काम कराया जा रहा है।

बिजनेस प्लान फिर रिवैंप से कराया गया काम
बिजली विभाग ने कई स्थानोंं पर काम दो बार कराए हैं। पहले बिजनेस प्लान से शहर में बिजली लाइनों को बदला गया। इस पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे वहीं, अब रिवैंप से आर्म्ड लाइनें डाली गईं। जिस पर भी करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी दोबारा काम कराया गया है।


वर्जन
छह माह के लिए योजना का किया जा सकता है विस्तार

रिवैंप योजना से जिले में 70 फीसदी काम पूरा हो गया है और अब 30 फीसदी काम ही अधूरा है। वैसे तो मार्च तक पूरा करने के निर्देश हैं। उम्म्मीद है कि काम पूरा हो जाएगा। वैसे छह माह के लिए योजना का विस्तार भी किया जा सकता है।-वैभव कुमार, सर्किल इंजीनियर, रिवैंप योजना

योजना की लगातार मानीटरिंग की जा रही है। काम कराने के दौरान कई प्रकार की तकनीकी समस्याएं आती हैं। इस वजह से काम अवधि में पूरा होने में देरी होती है। कोशिश की जा रही है जो समय अवधि दी गई है उसमें काम पूरा कराया जाए।-रमेश चंद्र, अधीक्षण अभियंता
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