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या देवि सर्वभूतेषु तुष्टि रूपेण संस्थिता...
Hardoi
Updated Sun, 05 Oct 2014 05:32 AM IST
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हरदोई। करें सुरा संपूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च, दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडाशुभदास्तु मे... मंत्रों की पंक्तियां रविवार को नवरात्र के चौथे दिन घरों से लेकर मंदिरों तक में सुनाई देती रही। इसके अलावा श्रद्धालुओं के जयघोष से वातावरण पूरे दिन भक्तिमय बना रहा।
बताया गया कि नवरात्र के चौथे दिन रविवार को कूष्मांडा माता की पूजा की गई। भक्तों ने पूरे उत्साह से इन माता का विधि विधान से पूजन अर्चन किया। इस दिन भी शहर के लगभग सभी मंदिरों में मां के दर्शनों व उनकी पूजा अर्चन को लाइन लगी रही। भक्तों की लंबी चौड़ी भीड़ और मां के दर्शनों में आ रही दिक्कतों के बाद भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई। शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि कूष्मांडा अष्टभुजा देवी हैं, जो खुश होने पर अपने भक्तों को आयु, यश, बल और आरोग्य का वरदान देती है। इनकी कांति व आभा सूर्य के समान प्रकाशमान है।
उन्होंने बताया कि जब सृष्टि का विस्तार नहीं हुआ था, तो कूष्मांडा देवी ने ही सृष्टि का विस्तार किया। भगवती माता का यह स्वरूप अन्नपूर्णा का है। प्रकृति का दोहन और लोगों को भूख प्यास से व्याकुल देखकर मां ने शाकुंभरी का रूप धरा। शाक से धरती को पल्लवित किया और शताक्षी बनकर असुरों का संहार किया। इधर, जिले भर में मां को प्रसन्न करने के लिए पूजन अर्चन होता रहा। मंदिरों से लेकर घरों तक में पूजन अर्चन व भजन होते दिखाई दिए। मंदिरों में मां दुर्गा महायज्ञ का आयोजन भी शुरू हो चुके हैं।
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बताया गया कि नवरात्र के चौथे दिन रविवार को कूष्मांडा माता की पूजा की गई। भक्तों ने पूरे उत्साह से इन माता का विधि विधान से पूजन अर्चन किया। इस दिन भी शहर के लगभग सभी मंदिरों में मां के दर्शनों व उनकी पूजा अर्चन को लाइन लगी रही। भक्तों की लंबी चौड़ी भीड़ और मां के दर्शनों में आ रही दिक्कतों के बाद भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई। शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि कूष्मांडा अष्टभुजा देवी हैं, जो खुश होने पर अपने भक्तों को आयु, यश, बल और आरोग्य का वरदान देती है। इनकी कांति व आभा सूर्य के समान प्रकाशमान है।
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उन्होंने बताया कि जब सृष्टि का विस्तार नहीं हुआ था, तो कूष्मांडा देवी ने ही सृष्टि का विस्तार किया। भगवती माता का यह स्वरूप अन्नपूर्णा का है। प्रकृति का दोहन और लोगों को भूख प्यास से व्याकुल देखकर मां ने शाकुंभरी का रूप धरा। शाक से धरती को पल्लवित किया और शताक्षी बनकर असुरों का संहार किया। इधर, जिले भर में मां को प्रसन्न करने के लिए पूजन अर्चन होता रहा। मंदिरों से लेकर घरों तक में पूजन अर्चन व भजन होते दिखाई दिए। मंदिरों में मां दुर्गा महायज्ञ का आयोजन भी शुरू हो चुके हैं।
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