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‘मेरे दिल की आशा, दुलारी हिंदी भाषा’
Hardoi
Updated Tue, 16 Sep 2014 05:31 AM IST
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हरदोई। मेरे दिल की आशा, मेरी प्यारी दुलारी हिंदी भाषा...कुछ इन्हीं शब्दों को लेकर जिले भर के शिक्षण संस्थाओं व अन्य संगठनों में सोमवार को भी हिंदी दिवस का आगाज हुआ। कही गोष्ठी तो कहीं प्रतियोगिताओं का दौर चला। इधर आर्य कन्या महाविद्यालय में हुई निबंध प्रतियोगिता में छात्राओं ने हिस्सा लिया।
14 सितंबर को रविवार पड़ने से सोमवार को भी हिंदी दिवस मनाने का दौर जारी रहा। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच शुद्ध हिंदी में कविता, हिंदी को लेकर व्याख्यान व परिचर्चाएं हुई। जूनियर स्कूलों से लेकर डिग्री कालेज तक में हिंदी भाषा को लेकर जोर दिया गया। आर्य कन्या महाविद्यालय में भी हिंदी दिवस उत्साह पूर्वक मनाया गया। सबसे पहले प्राचार्या डा. निर्मला यादव ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में हिंदी एक भाषा ही नहीं बल्कि हर भारतवासी की भावना है। जिसे हिंदुस्तानियों के दिलों दिमाग से अलग नहीं किया जा सकता।
कहा कि पर आधुनिक युग में बढ़ रही जरूरतों से अन्य भाषाओं का प्रचलन भी बढ़ा है या यह कहें उनकी जरूरतों को छात्र छात्राओं ने महसूस किया है, जिससे हिंदी हासिए पर दिखाई देने लगी है, पर अपने देश में यदि हिंदी को सम्मान दिलवाना है तो अन्य भाषाओं की तुलना में हर क्षेत्र में हिंदी की उपयोगिता को भी बढ़ाना होगा। इसके बाद हिंदी निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बढ़ चढ़कर छात्राओं ने अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर समस्त टीचरें मौजूद थीं।
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14 सितंबर को रविवार पड़ने से सोमवार को भी हिंदी दिवस मनाने का दौर जारी रहा। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच शुद्ध हिंदी में कविता, हिंदी को लेकर व्याख्यान व परिचर्चाएं हुई। जूनियर स्कूलों से लेकर डिग्री कालेज तक में हिंदी भाषा को लेकर जोर दिया गया। आर्य कन्या महाविद्यालय में भी हिंदी दिवस उत्साह पूर्वक मनाया गया। सबसे पहले प्राचार्या डा. निर्मला यादव ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में हिंदी एक भाषा ही नहीं बल्कि हर भारतवासी की भावना है। जिसे हिंदुस्तानियों के दिलों दिमाग से अलग नहीं किया जा सकता।
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कहा कि पर आधुनिक युग में बढ़ रही जरूरतों से अन्य भाषाओं का प्रचलन भी बढ़ा है या यह कहें उनकी जरूरतों को छात्र छात्राओं ने महसूस किया है, जिससे हिंदी हासिए पर दिखाई देने लगी है, पर अपने देश में यदि हिंदी को सम्मान दिलवाना है तो अन्य भाषाओं की तुलना में हर क्षेत्र में हिंदी की उपयोगिता को भी बढ़ाना होगा। इसके बाद हिंदी निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बढ़ चढ़कर छात्राओं ने अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर समस्त टीचरें मौजूद थीं।
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