फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   डंठल से धुआं न हो जाए तकदीर

डंठल से धुआं न हो जाए तकदीर

Sat, 29 Mar 2014 05:32 AM IST
Hardoi
Hardoi Updated Sat, 29 Mar 2014 05:32 AM IST
विज्ञापन
हरदोई। यह खबर किसानों को पढ़ने में भले ही नागवार लगे, पर चेत गए तो न सिर्फ आर्थिक लाभ होगा, बल्कि कृषि भूमि की उम्र भी बढ़ जाएगी। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि गेहूं की कटाई के बाद अगर खेत में पड़े डंठल को फूंक रहे हैं, तो डंठल नहीं, बल्कि खुद की तकदीर को धुआं कर रहे हैं।
विज्ञापन

गेहूं की कटाई होने के बाद अमूमन खेतों में आग की लंबी लौ को उठते हर किसी ने देखा होगा। यह आग खेतों में क्यों लगाई जाती है, तो यह बता दिया जाता है कि गेहूं क ी कटाई के बाद डंठल बचे थे, उनको जलाया जा रहा है, पर शायद आग लगाने वाले किसानों को खुद ही नहीं मालूम कि वह अपनी किस्मत को ही आग के हवाले कर रहे हैं। इस बाबत जिला कृषि अधिकारी अमर सिंह का कहना है कि डंठल के साथ फसल की सबसे पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ मित्र वैक्टीरिया और फ फूंद भी जल रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि भूसे के रूप में पशुओं का हक तो मारा जा रहा, भूमि की उर्वरक क्षमता को भी कम किया जा रहा है।
विज्ञापन

कृषि अधिकारी अमर सिंह का कहना है कि समय-समय पर होने वाले सेमिनार आदि द्वारा दी जाने वाली जानकारियों से कहा जा सकता कि प्रदेश में गेहूं और धान करीब 700 टन डंठल को खेतों में ही फूं क दिया जाता है। सर्वाधिक रकवा होने से गेहूं के डंठल सर्वाधिक फुंक जाते हैं। डा. मुकेश का कहना है कि कंबाइन से कटाई के बाद हाल के वर्षों में डंठल को नष्ट करना अब आम हो गया है। शोधों के मुताबिक इन डंठलों में नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश की मात्रा 0.5, 0.6 एवं 1.5 फीसदी होती है। इन्हें जलाने की बजाए यदि खेत में ही कंपोस्ट बना दिया जाए, तो खेतों को पोषक तत्व उसी समय प्राप्त हो सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

उनका कहना है कि मसलन फसलों के अवशेष से ढकी मिट्टी का तापमान सम रहने से सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ जाती है, जो अगली फसल के लिए सूक्ष्म पोषक तत्व मुहैया करते हैं। फसल का पाले व लू जैसी प्राकृतिक प्रकोपों से बचाव होता है। नमी संरक्षित रहने से सिंचाई कम करनी पड़ती है। भूमि की जलधारणा की क्षमता बढ़ती है। उर्वरकों के प्रयोग में करीब 25 फीसदी की कमी आती है। किसानों को चाहिए कि डंठलों को न जलाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed