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आशीर्वाद से मंगल, राजयोग का कमंडल

Fri, 04 Oct 2013 05:38 AM IST
Hardoi
Hardoi Updated Fri, 04 Oct 2013 05:38 AM IST
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‘शारदीय नवरात्र में क्या घर और क्या मंदिर। हर जगह मां की मूर्ति को सजाने में श्रद्धालुओं द्वारा गुरुवार से ही तैयारियों का दौर शुरू हो गया। इधर, मंदिरों में भी मां के दरबार की साफ सफाई का दौर शुरू कर दिया गया। नवरात्र में वैसे तो हर मंदिर में ही मां के जयकारे सुनाई देते हैं, पर शहर के श्रवण देवी मंदिर, फू लमती देवी मंदिर, दुर्गा मंदिर, बाबा सिद्धनाथ मंदिर, तुरंत नाथ मंदिर, शिव भोले मंदिर, मौनी बाबा मंदिर आदि में विशेष पूजन अर्चन होती है। नवरात्र क ी तैयारियों को लेकर पूजन आदि की सामग्री की खरीदारी शुरू हो चुकी है। दुकानों पर सामग्री के दामों के तेवर देख श्रद्धालु सकते में आ गए। चाहे कुट्टू का आटा हो या फिर व्रत में खाए जाने वाले मूंगफली के दाने। हर किसी में अबकी महंगाई दिख रही हैं। इसके अलावा लौंग से लेकर कपूर व चंदन से लेकर बंदन भी महंगाई से सराबोर है। उपवास में फलों का सेवन क र पाना भी काफी मुश्किल है। फलों के कुछ दिनों की अपेक्षा ही अपने तेवर और कड़े कर चुके हैं। सदर बाजार के थोक विक्रेता जय का कहना है कि महंगाई का असर हर कहीं पड़ा है। पूजन सामग्री से लेकर फलों तक इसका असर देखने को मिल रहा है। कहना गलत न होगा कि सामग्री खरीदते वक्त श्रद्धालुओं को कुछ झटका तो जरूर लगेगा।’
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हरदोई। शक्ति स्वरूपा महादुर्गा की उपासना के शारदीय नवरात्र शनिवार से शुरू हो रहे हैं। अबकी नौ दिन की बजाए आठ दिनों के नवरात्र होंगे। इसके लिए भक्तों द्वारा तैयारियां भी की जाने लगी हैं। चंदन की खुशबू से सराबोर श्रद्धा से परिपूर्ण समां में पूरे आठ दिन चहुंओर मां ही मां के जयघोष सुनाई देंगे।
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शारदीय नवरात्र के शुभारंभ के पहले दिन शनिवार को घट स्थापना की जाएगी। उसके बाद नियमित रूप से होने वाला पूजन आदि विधिवत रूप से किया जाता रहेगा। शास्त्रों के जानकारों का कहना है कि पहले दिन माता दुर्गा की प्रतिमा तथा कलश की स्थापना की जाती है। इसके बाद ही नवरात्र के उत्सव का प्रारंभ होता है। माता दुर्गा व घट स्थापना की विधि का वर्णन करते हुए उमाकांत शास्त्री ने बताया कि पवित्र स्थान की मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें जौ, गेहूं बोएं। फिर उनके ऊपर अपनी शक्ति के अनुसार बनवाए गए सोने, तांबे व मिट्टी के कलश को स्थापित करें। कलश के ऊपर सोना, चांदी, तांबा, मिट्टी, पत्थर या चित्रमयी मूर्ति की प्रतिष्ठा करने का विधान है।
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मूर्ति यदि कच्ची मिट्टी, कागज या सिंदूर आदि से बनी हो और स्नानादि से उसमें विकृति आने की संभावना हो तो उसके ऊपर शीशा लगा दें। मूर्ति न हो तो कलश के पीछे स्वास्तिक व उसके दोनों कोनों में दुर्गाजी का चित्र, पुस्तक तथा शालिग्राम को विराजित कर भगवान विष्णु का पूजन कर दें। बताया कि पूजन सात्विक हो, राजस या तामसिक नहीं, इस बात का विशेष ध्यान रखें। मां शैलपुत्री के स्वरूप का पूजन समेत आराधना, उपासना, उपवास करने से मनुष्य को शारीरिक व मानसिक शक्ति मिलती है। नवरात्र में मां के नौ रूपों का पूजन किया जाता है। नवरात्र की शुरुआत पांच अक्तूबर से होगी। शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि साधक को राजयोग की प्राप्ति होने के साथ आरोग्यता मिलेगी। मां लोगों को हर तरह के भय, बाधा, रोग व दोष से मुक्ति दिलाएगी।
उधर, नवरात्रि व्रत के आरंभ में स्वास्तिक वाचन शांति पाठ करके संकल्प करें और सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा कर विधि विधान से पूजन अर्चन करें। फिर मुख्य मूर्ति का षोडशोपचार पूजन करें। दुर्गा की आराधना अनुष्ठान में महाकाली महालक्ष्मी, महा सरस्वती का पूजन व दुर्गा सप्तसती का नियमित रूप से पाठ करें।
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कलश स्थापना को लेकर दिख रहे योग
हरदोई। शास्त्रों के जानकारों का कहना है कि वैसे तो कलश स्थापना के मां भगवती के पहले दिन हर पल योग शुभ हैं, पर इसके बाद भी कुछ मुहूर्त बन रहे हैं। ज्योतिष निर्णायक मंडल के सदस्य शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि प्रतिपदा शनिवार को सुबह पांच बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक कलश की स्थापना की जा सकेगी। कलश स्थापना को लेकर भी विधि विधान से स्थापना करनी चाहिए।
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पूजन में मां की मूर्ति का भी है महत्व
हरदोई। वास्तु के महत्व को मौजूदा समय में बताने या समझाने की अब कोई जरूरत नहीं है। कहा जाता है कि मां के व्रत से पूर्व उनकी की जाने वाली मूर्ति स्थापना व कलश स्थापना में भी यदि वास्तु का ख्याल रखा जाए तो मां की कृपा दुगुनी हो सकती है। ईशान कोण यानि उत्तर पूर्व में मां की मूर्ति एवं कलश की स्थापना, यदि अखंड को जलाना हो तो उसे आग्नेय कोण यानी पूर्व दक्षिण में रखा जाए, पूजन करते समय मुंह पूर्व व उत्तर दिशा में रखा जाए और ध्यान रखें कि पूजन का स्थल पवित्र हो, स्नान घर आदि से भी पर्याप्त दूरी हो।

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नवरात्र के लिए मंदिरों में होने लगी सफाई
कछौना। शारदीय नवरात्र के आगमन को लेकर नगर व ग्रामीण क्षेत्र के मंदिरों में साफ सफाई व रंग रोगन कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। मालूम हो कि शनिवार से नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। जिसका लेकर माता के भक्त खासे उत्साहित हैं।
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