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एएओ की जांच पत्रावली ले गए पूर्व बीएसए
Hardoi
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी के ऊपर लगाए गए आरोपों की पत्रावली पूर्व बीएसए अपने साथ ही लेकर चले गए। इस कारण न्यायालय में जांच रिपोर्ट नहीं भेजी जा सकी। मामला प्रकाश में आने पर डीएम ने महोबा के डीएम को पत्र लिखकर पत्रावली भेजने का अनुरोध किया है। ताकि प्रकरण के संबंध में न्यायालय में पक्ष रखा जा सके। पत्रावली के न होने की जानकारी होते ही विभाग में हड़कंप मच गया है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रति नियुक्ति पर तैनात सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी पर वित्तीय कार्य में अनियमितता के आरोप लगने पर तत्कालीन बीएसए मसीहुज्जा सिद्दीकी की ओर से पत्रावली तैयार की गई थी जिसमें अनियमितता के संबंध में साक्ष्य थे और डीसी व वार्डेन के बयान दर्ज थे। पत्रावली जिलाधिकारी के माध्यम से परियोजना कार्यालय को भेजी गई थी। डीएम की संस्तुति पर परियोजना निदेशक ने सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी को मूल विभाग वापस करने के आदेश जारी कर दिए थे। इस पर सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी ने उच्च न्यायालय में रिट दायर की थी जिसकी सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने परियोजना निदेशक के आदेश पर स्थगन आदेश जारी करते हुए जिलाधिकारी से पुन: जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। यह आख्या उच्च न्यायालय में जिलाधिकारी की ओर से निर्धारित समय में दाखिल की जानी थी। मगर जब जिलाधिकारी ने बीएसए से पत्रावली तलब की तो पता चला कि पत्रावली कार्यालय में ही नहीं है। कार्यालय से पत्रावली न होने की जानकारी पर उसको खोजने के निर्देश हुए तो पता चला कि पूर्व बीएसए पत्रावली अपने साथ जनपद महोबा ले गए है। इस पर जिलाधिकारी अनिल कुमार ने महोबा के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पत्रावली वापस भेजने का अनुरोध किया ताकि न्यायालय में प्रशासन का पक्ष रखा जा सके। पत्रावली आने पर ही सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी पर लगाए गए आरोपों की जांच शुरू हो सकेगी। इससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
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सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रति नियुक्ति पर तैनात सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी पर वित्तीय कार्य में अनियमितता के आरोप लगने पर तत्कालीन बीएसए मसीहुज्जा सिद्दीकी की ओर से पत्रावली तैयार की गई थी जिसमें अनियमितता के संबंध में साक्ष्य थे और डीसी व वार्डेन के बयान दर्ज थे। पत्रावली जिलाधिकारी के माध्यम से परियोजना कार्यालय को भेजी गई थी। डीएम की संस्तुति पर परियोजना निदेशक ने सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी को मूल विभाग वापस करने के आदेश जारी कर दिए थे। इस पर सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी ने उच्च न्यायालय में रिट दायर की थी जिसकी सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने परियोजना निदेशक के आदेश पर स्थगन आदेश जारी करते हुए जिलाधिकारी से पुन: जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। यह आख्या उच्च न्यायालय में जिलाधिकारी की ओर से निर्धारित समय में दाखिल की जानी थी। मगर जब जिलाधिकारी ने बीएसए से पत्रावली तलब की तो पता चला कि पत्रावली कार्यालय में ही नहीं है। कार्यालय से पत्रावली न होने की जानकारी पर उसको खोजने के निर्देश हुए तो पता चला कि पूर्व बीएसए पत्रावली अपने साथ जनपद महोबा ले गए है। इस पर जिलाधिकारी अनिल कुमार ने महोबा के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पत्रावली वापस भेजने का अनुरोध किया ताकि न्यायालय में प्रशासन का पक्ष रखा जा सके। पत्रावली आने पर ही सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी पर लगाए गए आरोपों की जांच शुरू हो सकेगी। इससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
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