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Hardoi News: बारिश की बूंदों को सहेजने के लिए बनवाए जा रहे 640 अमृत सरोवर
Fri, 28 Feb 2025 11:01 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
Updated Fri, 28 Feb 2025 11:01 PM IST
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फोटो 22 : अमृत सरोवर की खोदाई करते मनरेगा श्रमिक। स्रोत : विभाग
- 1,293 ग्राम पंचायतों में ,1305 तालाबों को अमृत सरोवर बनाए जाने के लिए चिह्नित किया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। बारिश की एक-एक बूंद सहेजने और धरती की कोख को पानी से लबालब किए जाने के लिए 640 तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मनरेगा मद से जल संरक्षण और संगृहण के लिए किए जाने वाले काम से जॉब कार्डधारक परिवारों को गांव में ही रोजगार भी मिल रहा है। प्रशासन ने चिह्नित तालाबों को बरसात से पहले अमृत सरोवर के रूप में विकसित कराने का लक्ष्य रखा है।
प्रधानमंत्री के बारिश की एक-एक बूंद को सहेजने के संकल्प को साकार रूप दिए जाने के लिए प्रशासन ने गांवों के तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किए जाने की मुहिम चलाई है। चालू वित्तीय वर्ष में 1,293 ग्राम पंचायतों में ,1305 तालाबों को अमृत सरोवर बनाए जाने के लिए चिह्नित किया गया है। तालाबों की दोबारा से खोदाई कराते हुए गहरा कराया जा रहा है। इसी के साथ तालाबों पर पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से पौधरोपण, पाथ-वे और बेंच आदि बनवाए जा रहे हैं।
कोट
बढ़ती आबादी और भू-जल दोहन से भूमिगत जलस्तर में गिरावट आ रही है। धरती की कोख को लबालब किए जाने के लिए बारिश के पानी को संग्रहीत और संरक्षित किए जाने के लिए सरकारी भवनों पर रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाए जा रहे हैं। गांवों में तालाबों, झीलों और पोखरों को बीडीओ के माध्यम से चिह्नित कराते हुए अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिससे मनरेगा श्रमिकों को रोजगार भी मिल रहा है।-सौम्या गुरूरानी, सीडीओ
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647 तालाबों को अमृत सरोवर बनाया जा चुका
श्रम रोजगार उपायुक्त रवि प्रकाश सिंह ने बताया कि चिह्नित 1,305 तालाबों में से 647 तालाबों को मनरेगा मद से अमृत सरोवर के रूप में विकसित करा लिया गया है। शेष पर काम चल रहा है। 18 तालाबों पर अभी किन्हीं कारणों के चलते काम शुरू नहीं हो पाया है।
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- 1,293 ग्राम पंचायतों में ,1305 तालाबों को अमृत सरोवर बनाए जाने के लिए चिह्नित किया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। बारिश की एक-एक बूंद सहेजने और धरती की कोख को पानी से लबालब किए जाने के लिए 640 तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मनरेगा मद से जल संरक्षण और संगृहण के लिए किए जाने वाले काम से जॉब कार्डधारक परिवारों को गांव में ही रोजगार भी मिल रहा है। प्रशासन ने चिह्नित तालाबों को बरसात से पहले अमृत सरोवर के रूप में विकसित कराने का लक्ष्य रखा है।
प्रधानमंत्री के बारिश की एक-एक बूंद को सहेजने के संकल्प को साकार रूप दिए जाने के लिए प्रशासन ने गांवों के तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किए जाने की मुहिम चलाई है। चालू वित्तीय वर्ष में 1,293 ग्राम पंचायतों में ,1305 तालाबों को अमृत सरोवर बनाए जाने के लिए चिह्नित किया गया है। तालाबों की दोबारा से खोदाई कराते हुए गहरा कराया जा रहा है। इसी के साथ तालाबों पर पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से पौधरोपण, पाथ-वे और बेंच आदि बनवाए जा रहे हैं।
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कोट
बढ़ती आबादी और भू-जल दोहन से भूमिगत जलस्तर में गिरावट आ रही है। धरती की कोख को लबालब किए जाने के लिए बारिश के पानी को संग्रहीत और संरक्षित किए जाने के लिए सरकारी भवनों पर रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाए जा रहे हैं। गांवों में तालाबों, झीलों और पोखरों को बीडीओ के माध्यम से चिह्नित कराते हुए अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिससे मनरेगा श्रमिकों को रोजगार भी मिल रहा है।-सौम्या गुरूरानी, सीडीओ
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647 तालाबों को अमृत सरोवर बनाया जा चुका
श्रम रोजगार उपायुक्त रवि प्रकाश सिंह ने बताया कि चिह्नित 1,305 तालाबों में से 647 तालाबों को मनरेगा मद से अमृत सरोवर के रूप में विकसित करा लिया गया है। शेष पर काम चल रहा है। 18 तालाबों पर अभी किन्हीं कारणों के चलते काम शुरू नहीं हो पाया है।