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38 साल से गर्मी में रेल यात्रियों को पिला रहे पानी
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sun, 14 Jun 2015 11:52 PM IST
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रेलवेगंज निवासी 85 वर्षीय राधेश्याम अग्रवाल 38 साल
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से लगातार गर्मी में रेलवे यात्रियों तक ठंडा पेयजल पहुंचाने की मुहिम चला
रहे हैं। इसके लिए उन्होंने तीन कार्यकर्ताओं को भी लगा रखा है। वह स्वयं
भी ट्रेनों तक पहुंच कर जरूरतमंद यात्रियों को पानी मुहैया कराते हैं।
बिना किसी स्वार्थ के उनका यह क्रम सुबह से शाम तक चलता है। निशुल्क पेयजल और कार्यक्षेत्र रेलवे स्टेशन को चुनने के सवाल पर कहा कि 38 वर्ष पहले गर्मी के दिनों में एक दिन वे रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, तभी दूसरी ओर से आई एक ट्रेन के रुकते ही तमाम यात्री पानी को प्लेटफार्म पर लगे पेयजल नलों पर पहुंचे।
इसी बीच एक करीब 14 साल का लड़का भी पानी के लिए ट्रेन के डिब्बे से उतरा, पर इससे पहले वो पानी ले पाता ट्रेन चल दी और उसे बिना पानी लिए ही जाना पड़ा। यह देखकर मन में आया कि क्यों न आने जाने वाली ट्रेनों के मुसाफिरों तक पानी की पहुंच बनाई जाए। इसके बाद गर्मी में हर साल यह कार्य शुरू कर दिया।
स्टेशन पर पानी ड्रम में भरते हैं, फिर बर्फ से ठंडा कर वो खुद और और उनके स्वयं सेवक लोटा लेकर ट्रेनों के रुकते ही उनके डिब्बों की ओर बढ़ जाते हैं। चावल का व्यवसाय करने वाले राधेश्याम की पत्नी लल्ली देवी की 20 वर्ष पहले मौत हो चुकी है। बेटों के पास रहते।
दुकान के सामने नि:शुल्क पेयजल के लिए वाटर कूलर भी लगवा रखा है। हर साल स्टेशन पर पेयजल बांटना उनकी आदत बन गई है। कहते हैं, जब तक सांस है यह क्रम चलेगा, क्योंकि अब शरीर साथ नहीं देता, लिहाजा कार्यकर्ताओं के माध्यम से ही पेयजल पहुंचाते हैं।
बिना किसी स्वार्थ के उनका यह क्रम सुबह से शाम तक चलता है। निशुल्क पेयजल और कार्यक्षेत्र रेलवे स्टेशन को चुनने के सवाल पर कहा कि 38 वर्ष पहले गर्मी के दिनों में एक दिन वे रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, तभी दूसरी ओर से आई एक ट्रेन के रुकते ही तमाम यात्री पानी को प्लेटफार्म पर लगे पेयजल नलों पर पहुंचे।
इसी बीच एक करीब 14 साल का लड़का भी पानी के लिए ट्रेन के डिब्बे से उतरा, पर इससे पहले वो पानी ले पाता ट्रेन चल दी और उसे बिना पानी लिए ही जाना पड़ा। यह देखकर मन में आया कि क्यों न आने जाने वाली ट्रेनों के मुसाफिरों तक पानी की पहुंच बनाई जाए। इसके बाद गर्मी में हर साल यह कार्य शुरू कर दिया।
स्टेशन पर पानी ड्रम में भरते हैं, फिर बर्फ से ठंडा कर वो खुद और और उनके स्वयं सेवक लोटा लेकर ट्रेनों के रुकते ही उनके डिब्बों की ओर बढ़ जाते हैं। चावल का व्यवसाय करने वाले राधेश्याम की पत्नी लल्ली देवी की 20 वर्ष पहले मौत हो चुकी है। बेटों के पास रहते।
दुकान के सामने नि:शुल्क पेयजल के लिए वाटर कूलर भी लगवा रखा है। हर साल स्टेशन पर पेयजल बांटना उनकी आदत बन गई है। कहते हैं, जब तक सांस है यह क्रम चलेगा, क्योंकि अब शरीर साथ नहीं देता, लिहाजा कार्यकर्ताओं के माध्यम से ही पेयजल पहुंचाते हैं।