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Hardoi News: एक साल में मरम्मत पर 22 लाख रुपये खर्च, पांच माह बाद अब फिर एक्सरे मशीन का ट्रायल
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फोटो-19- डिजिटल मशीन से एक्स-रे करता कर्मचारी। संवाद
हरदोई। पांच माह के लंबे अंतराल के बाद मेडिकल कॉलेज की डिजिटल एक्सरे मशीन दुरुस्त होने का दावा किया गया है। कार्यदायी संस्था के अभियंताओं ने मशीन की मरम्मत के बाद ट्रायल शुरू कर दिया है। ट्रायल सफल रहा तो हर रोज एक्सरे के लिए आने वाले लगभग 350 मरीजों को राहत मिलेगी। मशीन की मरम्मत पर पिछले लगभग एक साल में 22 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
मेडिकल कॉलेज की डिजिटल एक्सरे मशीन काफी पुरानी हो चुकी है और जनपद में रोजाना 150 से 200 मरीजों के करीब 350 से अधिक एक्सरे होने के कारण लोड अधिक पड़ रह है। यही वजह होती है कि डिजिटल एक्सरे मशीन आए दिन खराब हो जाती है। वर्ष 2025 में जनवरी से सितंबर के बीच मशीन पांचवी बार खराब हुई थी। इसके बाद डिजिटल एक्सरे मशीन काम नहीं कर पाई। बता दें, कि बीते पांच माह से मशीन खराब खड़ी है और इस पर अभी तक करीब 22 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। लंबे इंतजार के बाद कार्यदायी संस्था सायरिक्स के अभियंता प्रद्युम्द्व उनके सहयोगी ने एक बार फिर मशीन की कमियों को दूर किया है। हेड ट्यूब और पीसीबी की दिक्कतों को ठीक करने के बाद अब ट्रायल की प्रक्रिया चल रही है। इंजीनियरों का कहना है कि ट्रायल के परिणाम सही आने पर आम मरीजों के लिए सुविधा शुरू हो जाएगी।
औसतन 200 मरीजों के हर रोज होते एक्सरे
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 200 से अधिक मरीजों का एक्सरे होता है। वहीं, पोर्टेबल मशीन से दिन भर में बमुश्किल 60 से 65 एक्सरे ही हो पाते हैं। इसके बाद मशीन को कुछ देर के लिए आराम देना होता है। कई बार तो अधिक लोड की वजह से पोर्टेबल मशीन भी खराब हो चुकी है। पोर्टेबल मशीन अधिक लोड न ले पाने के कारण मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। साथ ही जरुरतमंद मरीजों को 200 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक निजी सेंटरों पर खर्च करना पड़ता है।
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जांची जा रही मशीन की गुणवत्ता
हरदोई। डिजिटल एक्सरे मशीन की गुणवत्ता की जांच शुरू कर दी गई। बताया जा रहा है कि रोजाना अधिक से अधिक मरीजों की जांच कर फिल्म की गुणवत्ता देखी जा रही है। बताया गया कि इसके पहले बनवाई गई मशीन में दृश्यता साफ नहीं आ रही थी। हालांकि, अब गुणवत्ता सही आ रही है। धीरे-धीरे मशीन पर लोड बढ़ाया जाएगा और फिर गुणवत्ता जांची जाएगी। सब कुछ सही रहा तो एक्सरे कर पाने के लिए इसी मशीन का प्रयोग होगा।
मशीन को दुरुस्त कर दिया गया है। फिलहाल ट्रायल लिया जा रहा है। रिपोर्ट सही आने पर इसे तत्काल मरीजों के लिए संचालित कर दिया जाएगा।
डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज की डिजिटल एक्सरे मशीन काफी पुरानी हो चुकी है और जनपद में रोजाना 150 से 200 मरीजों के करीब 350 से अधिक एक्सरे होने के कारण लोड अधिक पड़ रह है। यही वजह होती है कि डिजिटल एक्सरे मशीन आए दिन खराब हो जाती है। वर्ष 2025 में जनवरी से सितंबर के बीच मशीन पांचवी बार खराब हुई थी। इसके बाद डिजिटल एक्सरे मशीन काम नहीं कर पाई। बता दें, कि बीते पांच माह से मशीन खराब खड़ी है और इस पर अभी तक करीब 22 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। लंबे इंतजार के बाद कार्यदायी संस्था सायरिक्स के अभियंता प्रद्युम्द्व उनके सहयोगी ने एक बार फिर मशीन की कमियों को दूर किया है। हेड ट्यूब और पीसीबी की दिक्कतों को ठीक करने के बाद अब ट्रायल की प्रक्रिया चल रही है। इंजीनियरों का कहना है कि ट्रायल के परिणाम सही आने पर आम मरीजों के लिए सुविधा शुरू हो जाएगी।
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औसतन 200 मरीजों के हर रोज होते एक्सरे
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 200 से अधिक मरीजों का एक्सरे होता है। वहीं, पोर्टेबल मशीन से दिन भर में बमुश्किल 60 से 65 एक्सरे ही हो पाते हैं। इसके बाद मशीन को कुछ देर के लिए आराम देना होता है। कई बार तो अधिक लोड की वजह से पोर्टेबल मशीन भी खराब हो चुकी है। पोर्टेबल मशीन अधिक लोड न ले पाने के कारण मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। साथ ही जरुरतमंद मरीजों को 200 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक निजी सेंटरों पर खर्च करना पड़ता है।
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जांची जा रही मशीन की गुणवत्ता
हरदोई। डिजिटल एक्सरे मशीन की गुणवत्ता की जांच शुरू कर दी गई। बताया जा रहा है कि रोजाना अधिक से अधिक मरीजों की जांच कर फिल्म की गुणवत्ता देखी जा रही है। बताया गया कि इसके पहले बनवाई गई मशीन में दृश्यता साफ नहीं आ रही थी। हालांकि, अब गुणवत्ता सही आ रही है। धीरे-धीरे मशीन पर लोड बढ़ाया जाएगा और फिर गुणवत्ता जांची जाएगी। सब कुछ सही रहा तो एक्सरे कर पाने के लिए इसी मशीन का प्रयोग होगा।
मशीन को दुरुस्त कर दिया गया है। फिलहाल ट्रायल लिया जा रहा है। रिपोर्ट सही आने पर इसे तत्काल मरीजों के लिए संचालित कर दिया जाएगा।
डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज