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Dolphin Calculation: डब्लूडब्लूएफ की टीम ने बिजनौर से शुरू की गणना, चार अक्तूबर को गढ़मुक्तेश्वर पहुंचेगी टीम

Mon, 02 Oct 2023 11:08 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़
अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़ Published by: श्याम जी. Updated Mon, 02 Oct 2023 11:08 PM IST
सार

दो से छह अक्टूबर तक गणना में बिजनौर से गढ़मुक्तेश्वर और गढ़मुक्तेश्वर से नरौरा बुलंदशहर के बीच डॉल्फिन की गिनती की जाएगी। इस बार एक बोट की बजाय दो बोट में टीमें डॉल्फिन की गणना करेंगी और उनकी जीपीएस लोकेशन सेट करेंगी।

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WWF team starts counting dolphins in Ganga hapur
डॉल्फिन - फोटो : Social media

विस्तार

गंगा में डॉल्फिन की गणना सोमवार से शुरू हो गई है। दो से छह अक्टूबर तक गणना में बिजनौर से गढ़मुक्तेश्वर और गढ़मुक्तेश्वर से नरौरा बुलंदशहर के बीच डॉल्फिन की गिनती की जाएगी। चार अक्टूबर को टीम गढ़मुक्तेश्वर पहुंचेगी। इस बार एक बोट की बजाय दो बोट में टीमें डॉल्फिन की गणना करेंगी और उनकी जीपीएस लोकेशन सेट करेंगी। प्रभागीय वन अधिकारी संजय कुमार मल्ल ने बताया कि डब्लूडब्लूएफ के अधिकारी चार अक्टूबर को ब्रजघाट और गढ़ क्षेत्र में पहुंचेंगे। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी जीपीएस सिस्टम से डॉल्फिन को लोकेट किया जा रहा है। दो टीमें डॉल्फिन की गणना करेंगी।

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डॉल्फिन के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए 1991 में केंद्र सरकार द्वारा बिहार में सुल्तानगंज से कहलगांव के बीच 50 किमी लंबाई में फैली गंगा नदी को विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभ्यारण्य घोषित किया गया था। यूपी में डॉल्फिन के आवास संरक्षण की पहल करते हुए विश्व प्रकृति निधि भारत एवं वन विभाग के संयुक्त प्रयास से गढ़मुक्तेश्वर से नरौरा बैराज के बीच की लगभग 100 किमी गंगा नदी को रामसर साइट 2005 में घोषित कराया गया था।
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पर्यावरणविद व डॉल्फिन गार्जियन भारतभूषण गर्ग ने बताया कि वर्ष 2018 में बिजनौर से लेकर नरौरा तक रामसर साइट में 28 डॉल्फिन मौजूद थी। वर्ष 2019 मे बढ़कर 32 और 2020 में हुई गणना में 41 तक गिनती पहुंच गई, जिसमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं। इसके बाद से लगातार इनकी संख्या बढ़ रही है।
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विशषज्ञों के अनुसार, डॉल्फिन का एक नाम गांगेय है। जिसकी उत्पत्ति गंगा अवतरण के समय से ही मानी गई है। यह साफ और शुद्ध जल मे निवास और प्रजनन करती है। यह भी कहा जा सकता है कि जहां डॉल्फिन होती है, वहां का पानी बिनी किसी टेस्टिंग के पीने योग्य होता है। इस बार भी इनकी संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

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