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नोट बंदी: सपा का ‘विरोध’, सब्जियों से पटी रोड
ब्यूरो अमर उजाला, हापुड़
Updated Mon, 05 Dec 2016 09:10 PM IST
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नोटबंदी से किसान हो गया बर्बाद
- फोटो : अमर उजाला
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अब तक नोट बंदी के मामले में चुप्पी साधे बैठे सपाइयों ने सोमवार को ऐसा विरोध प्रदर्शन किया कि लोग हैरान ही नहीं परेशान भी हो गए। तहसील चौपले पर ट्रैक्टर ट्राली में सब्जियां लादकर पहुंचे कार्यकर्ताओं ने सड़क पर जगह-जगह सब्जियां फेंक दीं।
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इससे सब्जियां उठाने के लिए लोगों में मारामारी मच गई। सड़क पर सब्जियों और लोगों की भीड़ के कारण लंबा जाम लग गया। साथ ही कई वाहन चालक फिसल कर घायल भी हो गए। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने किसी तरह जाम खुलवाया।
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सोमवार दोपहर हापुड़ विधान सभा क्षेत्र के विधानसभा प्रत्याशी तेजपाल के नेतृत्व में कार्यकर्ता ट्रैक्टर ट्राली और दूसरे वाहनों में सवार होकर तहसील चौपले पर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने यहां मोदी सरकार के नोट बंदी की नीतियों को गलत ठहराते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
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कार्यकर्ताओं ने बीच सड़क पर ट्रैक्टर ट्रालियों को खड़ा कर सब्जियां सड़क पर फेंकनी शुरू कर दी। आलू, गोभी, बैंगन आदि सब्जियों का सड़क पर जगह-जगह ढेर लग गया। सब्जियां सड़क पर पड़ी देख आसपास के लोग उठाने के लिए जुट गए।
इससे सड़क पर जाम लग गया। जैसे तैसे पुलिस ने जाम खुलवाया तो चौराहों पर पड़ी सब्जियां कुचलने से हुई फिसलन से कई बाइक सवार गिरकर घायल हो गए। चौराहे पर चारो ओर गंदगी का अंबार लग गया। देर शाम तक सड़क पर अफरातफरी मची रही।
प्रदर्शन के दौरान किसानों की समस्याओं को लेकर कार्यकर्ताओं ने खूब हंगामा किया, लेकिन इसमें किसान शामिल नहीं हुए। पार्टी के जिलाध्यक्ष किशन सिंह तोमर सहित कई पदाधिकारी भी प्रदर्शन के दौरान मौजूद नहीं थे। हालांकि उन्होंने फोन पर प्रदर्शन को समर्थन की बात जरूर कही।
किसानों के आह्वान पर ही यह प्रदर्शन किया गया था। इसमें किसान अपनी सब्जी लेकर पहुंचे थे। सड़क पर सब्जियां फेंककर प्रदर्शन करने का तरीका गलत था। किसी भी विरोध प्रदर्शन से जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए। इस संबंध में कार्यकर्ताओं से बात की जाएगी। किशन सिंह तोमर, सपा जिलाध्यक्ष
फोटो फाइल संख्या 05 एचपीआर पीएच-11, फोटो संख्या:एक नंबर
सोमवार को बैंकों में तड़के से ही ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी। लंबी कतारों में लगे ग्राहक अपनी बारी का इंतजार करते कई बार एक दूसरे से उलझते रहे। सुबह से लेकर दोपहर तक ग्राहक लाइन में लगे रहे लेकिन कैश नहीं मिल सका। ऐसे में उनकी मुश्किलें बरकरार हैं।
नोटबंदी के 26 दिन बाद भी हालात जस के तस हैं। रविवार को अवकाश के बाद सोमवार को बैंक खुले तो ग्राहकों की भीड़ लग गई। कई बैंकों में कैश की किल्लत बरकरार रही, ऐसे में ग्राहकों को मुख्य बैंकों की शाखाओं पर निर्भर रहना पड़ा।
अपनी बारी के इंतजार में ग्राहक एक दूसरे से भिड़ते नजर आए। वहीं, एटीएम सुविधा भी अब तक बहाल नहीं हो सकी है। एलडीएम एपी चतुर्वेदी ने बताया कि बैंकों को कैश उपलब्ध कराया जा रहा है। जल्द ही बैंकों में हालात सुधर जाएंगे।
वहीं पिलखुवा में भारतीय स्टेट बैंक में पैसे निकालने पहुंचे कुलदीप, मोहित और संदीप ने कहा कि सुबह नौ बजे से बैंक के बाहर कतार में लगे थे, दोपहर करीब एक बजे नंबर आ सका।
एसबीआई के प्रबंधक सुशील कुमार ने बताया कि भीड़ से निपटने के लिए अतिरिक्त काउंटर खोले गए थे। गढ़ में रमेश, वीरपाल, सुखबीर, सुनील, वेदप्रकाश, अमित, खलील, जमीर का आरोप है कि बैंक कर्मियों का रवैया ठीक नहीं है।
कैश आने के बाद सिर्फ उन्हीं लोगों को पैसा दिया जाता है, जो उनके परिचित होते हैं। इससे आम लोगों को हर दिन बैरंग लौटना पड़ता है। शाखा प्रबंधक एसके दीक्षित का कहना है कि ऊपर से कैश नहीं आया। इससे लाइन में खड़े लोगों को पैसा नहीं मिल पाया।
भारत विकासशील देशों की सूची में अग्रणी है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्तर भी सुधर रहा है, लेकिन अचानक हुई नोटबंदी ने देहात अंचल में दशकों पुरानी यादें ताजा कर दी हैं। परचून की दुकान पर ग्रामीण अनाज के बदले सामान खरीद रहे हैं।
दुग्ध इकाइयों से पैसे न मिलने के कारण पशुपालक घर पर ही रातब तैयार कर रहे हैं। देहात में इन दिनों फ्लैश बैक जैसा नजारा देखने को मिल रहा है। नोट बंदी के बाद देहात अंचल के लोग नई करेंसी देखने को तरस गए हैं,
क्योंकि देहात अंचल में खुली बैंक शाखाओं में कभी कभार ही पैसा पहुंच रहा है। अधिकांश बैंकों की शाखाओं में कैश खत्म का नोटिस चस्पा है। इस समस्या से उबरने के लिए ग्रामीणों ने जरूरत का सामान जुटाने का तरीका ढूंढ निकाला है।
दशकों पूर्व जिस तरह ग्रामीण अनाज के बदले दुकानों से सामान खरीदते थे, इन दिनों भी ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। दुकानदार भी ग्रामीणों की समस्या को समझ रहे हैं, अनाज के बदले उन्हें जरूरत का सामान दिया जा रहा है।
दुग्ध इकाइयों पर निर्भर पशुपालकों को नोटबंदी के चलते इकाइयों से भुगतान नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में पशुओं को रातब उपलब्ध कराना पशुपालकों के लिए चुनौती भरा साबित हो रहा है।
इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने घर पर ही गेहूं, बाजरा, जई, ज्वार से रातब बनाना शुरू कर दिया है। एलडीएम एपी चतुर्वेदी का कहना है कि देहात की बैंक शाखाओं में कैश भिजवाया जाता है। वह खुद निरीक्षण कर बैंकों के हालात जानेंगे।
तहसील चौपले पर प्रदर्शन के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने चौधरी चरण सिंह की मूर्ति पर प्रदर्शन किया। हापुड़ विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी तेजपाल प्रमुख ने कहा कि केंद्र सरकार हिटलर शाही पर उतर आई है।
नोटबंदी से सरकार ने सवा सौ करोड़ लोगों को लाइन में खड़ा कर दिया है। व्यापारी नेता संजय अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि मैं तो फकीर हूं, जब चाहूंगा झोला उठाकर चल दूंगा। ऐसा बयान पूरे देश को स्तब्ध कर देने वाला है।
जिला प्रवक्ता राजेश शर्मा ने कहा कि नोटबंदी की समस्या को कम करने के लिए सरकार द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। इस दौरान जिला उपाध्यक्ष संजय यादव, छात्रसभा प्रदेश सचिव पंकज त्यागी, ईश्वर सिंह, पुरुषोत्तम वर्मा, शहर अध्यक्ष हसीन चौधरी आदि रहे।