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Hapur News: खुरपका-मुंहपका की जांच के लिए पहुंची टीम
Fri, 08 Mar 2024 10:13 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Fri, 08 Mar 2024 10:13 PM IST
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हापुड़। क्षेत्र के कुछ गांवों में खुरपका मुंहपका बीमारी से पशुओं की मौत और बीमारी फैलने के मामले में पशुपालन विभाग की टीम शुक्रवार को गांवों में पहुंची। टीम ने पशुओं का टीकाकरण कराते हुए दवाइयां दी। वहीं बीमारी से बचाव के अलावा 1962 हेल्पलाइन नंबर के बारे में भी बताया।
पिछले करीब दो माह से कई प्रकार का संक्रमण पशुओं को अपना शिकार बना रहा है। बीमारी से हापुड़, धौलाना, और हाफिजपुर क्षेत्र के गांव अयादनगर, कांठीखेड़ा, महमूदपुर, सलाई, नवादा, हसनपुर, नली हुसैनपुर में पशु ज्यादा बीमार हो रहे थे। गांवों में सैकड़ों पशुओं की मौत हो चुकी है, जबकि काफी संख्या में पशु अभी भी बीमार थे। शुक्रवार को अमर उजाला में इस संबंध में समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसके बाद शुक्रवार को चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची और पशुओं की जांच की।
चिकित्सकों की माने तो दिसंबर के बाद यह बीमारी पशुओं पर हावी रहती है। जनवरी और फरवरी में पशुओं में बीमारी फैलने का मुख्य कारण मौसम का लगातार ठंडा बने रहना है। लेकिन अब स्थिति में सुधार है। पशु चिकित्सक रोहताश कुमार ने बताया कि प्रभावित गांवों का सर्वे किया गया है। गांवों में स्थिति में सुधार है। यहां टीकाकरण कराया जा रहा है। बीमार पशुओं को दवाइयां भी दी जा रही हैं। इसके अलावा पशुओं की निगरानी की जा रही है।
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पशुओं के बीमार होने पर 1962 पर करें कॉल
गांवों में पशुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी आती है तो इसके लिए हेल्पलाइन 1962 पर जानकारी दे सकते हैं। पशु एंबुलेंस इसके लिए लगाई गई है। सूचना पर पशु को त्वरित इलाज मिलेगा। - डॉ. एलएन शुक्ला, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
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पिछले करीब दो माह से कई प्रकार का संक्रमण पशुओं को अपना शिकार बना रहा है। बीमारी से हापुड़, धौलाना, और हाफिजपुर क्षेत्र के गांव अयादनगर, कांठीखेड़ा, महमूदपुर, सलाई, नवादा, हसनपुर, नली हुसैनपुर में पशु ज्यादा बीमार हो रहे थे। गांवों में सैकड़ों पशुओं की मौत हो चुकी है, जबकि काफी संख्या में पशु अभी भी बीमार थे। शुक्रवार को अमर उजाला में इस संबंध में समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसके बाद शुक्रवार को चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची और पशुओं की जांच की।
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चिकित्सकों की माने तो दिसंबर के बाद यह बीमारी पशुओं पर हावी रहती है। जनवरी और फरवरी में पशुओं में बीमारी फैलने का मुख्य कारण मौसम का लगातार ठंडा बने रहना है। लेकिन अब स्थिति में सुधार है। पशु चिकित्सक रोहताश कुमार ने बताया कि प्रभावित गांवों का सर्वे किया गया है। गांवों में स्थिति में सुधार है। यहां टीकाकरण कराया जा रहा है। बीमार पशुओं को दवाइयां भी दी जा रही हैं। इसके अलावा पशुओं की निगरानी की जा रही है।
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पशुओं के बीमार होने पर 1962 पर करें कॉल
गांवों में पशुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी आती है तो इसके लिए हेल्पलाइन 1962 पर जानकारी दे सकते हैं। पशु एंबुलेंस इसके लिए लगाई गई है। सूचना पर पशु को त्वरित इलाज मिलेगा। - डॉ. एलएन शुक्ला, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।