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Hapur News: 25 अक्तूबर को शरद पूर्णिमा, निशीथ काल में होगा मां महालक्ष्मी का पूजन
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हापुड़। शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्तूबर को श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 25 अक्तूबर को सुबह 11:55 बजे से शुरू होकर 26 अक्तूबर को सुबह 9:41 बजे तक रहेगी। चंद्रोदय शाम पांच बजे होगा। इस दिन चंद्रमा की चांदनी में खीर रखने की परंपरा है। अगले दिन सुबह इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान को केसर का तिलक लगाना चाहिए। हल्दी युक्त पीले चावल से पूजा करने और अक्षत पात्र का दान करने का विशेष महत्व है। शाम 5:40 बजे के बाद श्री सत्यनारायण भगवान की पूजा-अर्चना सहित गोधूलि बेला के धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं। मान्यता है कि इस रात श्रीमद्भागवत महापुराण के अंतर्गत रासपंचाध्यायी, पंचमी गीत या गोपी गीत का पाठ करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
निशीथ काल में करें महालक्ष्मी पूजन
शरद पूर्णिमा को मां महालक्ष्मी के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। पूजा का निशीथ काल रात 11:39 बजे से 12:30 बजे तक रहेगा। इस दौरान श्री सूक्त और कनकधारा स्तोत्र के पाठ के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान बताया गया है। पूजा में पान का पत्ता, कौड़ी, कमलगट्टा, सुपारी, एकाक्षी नारियल, अपराजिता पुष्प, हल्दी युक्त अक्षत और लौंग आदि उपलब्ध सामग्री का उपयोग किया जा सकता है। मां लक्ष्मी के मंत्रों का जप, यज्ञ और साधना भी फलदायी माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा पर मीराबाई और आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती भी मनाई जाती है। इस अवसर पर उनके जीवन और भक्ति चरित्र का श्रवण तथा वाचन करना चाहिए।
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पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान को केसर का तिलक लगाना चाहिए। हल्दी युक्त पीले चावल से पूजा करने और अक्षत पात्र का दान करने का विशेष महत्व है। शाम 5:40 बजे के बाद श्री सत्यनारायण भगवान की पूजा-अर्चना सहित गोधूलि बेला के धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं। मान्यता है कि इस रात श्रीमद्भागवत महापुराण के अंतर्गत रासपंचाध्यायी, पंचमी गीत या गोपी गीत का पाठ करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
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निशीथ काल में करें महालक्ष्मी पूजन
शरद पूर्णिमा को मां महालक्ष्मी के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। पूजा का निशीथ काल रात 11:39 बजे से 12:30 बजे तक रहेगा। इस दौरान श्री सूक्त और कनकधारा स्तोत्र के पाठ के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान बताया गया है। पूजा में पान का पत्ता, कौड़ी, कमलगट्टा, सुपारी, एकाक्षी नारियल, अपराजिता पुष्प, हल्दी युक्त अक्षत और लौंग आदि उपलब्ध सामग्री का उपयोग किया जा सकता है। मां लक्ष्मी के मंत्रों का जप, यज्ञ और साधना भी फलदायी माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा पर मीराबाई और आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती भी मनाई जाती है। इस अवसर पर उनके जीवन और भक्ति चरित्र का श्रवण तथा वाचन करना चाहिए।
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