{"_id":"6830a2f82ad1a79ba302b37f","slug":"reiki-was-going-on-for-nine-months-the-team-came-to-hapur-10-times-hapur-news-c-135-1-hpr1002-124828-2025-05-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hapur News: नौ महीने से चल रही थी रेकी, 10 बार हापुड़ आई थी टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hapur News: नौ महीने से चल रही थी रेकी, 10 बार हापुड़ आई थी टीम
विज्ञापन
हापुड़। मोनाड विश्वविद्यालय में फर्जी मार्कशीट के रैकेट का खुलासा करने के लिए एसटीएफ ने नौ महीने पहले जाल बिछाना शुरू किया था। इस बीच गोपनीय तरीके से टीम करीब 10 बार हापुड़ आई थी। इसके साथ हरियाणा समेत कई प्रदेशों में भी लगातार नजर रखी गई। प्रकरण में संलिप्त लोगों को अलग-अलग पकड़ा जा सकता था, लेकिन पूरे गैंग को एक साथ पकड़ने के लिए टीम ने दिनरात रेकी की।
एसटीएफ सूत्रों के अनुसार सितंबर 2024 में एक शिकायती पत्र उन्हें मिला था। टीम हर बिंदु पर सुराग तलाशती रही, इस बीच टीम 10 बार हापुड़ भी आई और विश्वविद्यालय में भी गई। हर गतिविधि को देखा, साथ ही छात्रों से भी बातचीत की।
कार्रवाई वाले दिन हरियाणा में हजारों फर्जी मार्कशीट पकड़ने और इसी दिन विश्वविद्यालय में छापे के दौरान विश्वविद्यालय के मालिक समेत पूरे रैकेट का एक साथ पकड़े जाना कोई संयोग नहीं है, बल्कि एसटीएफ की कड़ी सतर्कता ही इसका परिणाम है। क्योंकि नौ महीने से टीम ने जो जाल बिछाया था, उसमें एक-एक कर सभी आरोपी फंसते चले गए। विशेष बात यह भी है कि आरोपियों को जेल भेजने से पहले करीब तीन घंटे तक सुनवाई हुई।
विज्ञापन
माफियाओं के बीच विवाद बना कारण
इस प्रकरण को करीब से देख रहे लोगों की मानें तो बड़े माफियाओं के बीच का विवाद ही इस खुलासे का कारण है। बता दें कि वर्ष 2024 में नोएडा में अनिल कपूर ने आत्महत्या कर ली थी, जोकि उस समय विश्वविद्यालय में सचिव थे। हालांकि उनकी आत्महत्या की गुत्थी आज भी उलझी हुए है। इसके अलावा विश्वविद्यालय को बेचने और इसके एवज में मिली राशि भी संदेह के घेरे में है। इस बिंदु को भी एसटीएफ ने जांच में शामिल किया है।
विज्ञापन
एसटीएफ सूत्रों के अनुसार सितंबर 2024 में एक शिकायती पत्र उन्हें मिला था। टीम हर बिंदु पर सुराग तलाशती रही, इस बीच टीम 10 बार हापुड़ भी आई और विश्वविद्यालय में भी गई। हर गतिविधि को देखा, साथ ही छात्रों से भी बातचीत की।
विज्ञापन
कार्रवाई वाले दिन हरियाणा में हजारों फर्जी मार्कशीट पकड़ने और इसी दिन विश्वविद्यालय में छापे के दौरान विश्वविद्यालय के मालिक समेत पूरे रैकेट का एक साथ पकड़े जाना कोई संयोग नहीं है, बल्कि एसटीएफ की कड़ी सतर्कता ही इसका परिणाम है। क्योंकि नौ महीने से टीम ने जो जाल बिछाया था, उसमें एक-एक कर सभी आरोपी फंसते चले गए। विशेष बात यह भी है कि आरोपियों को जेल भेजने से पहले करीब तीन घंटे तक सुनवाई हुई।
विज्ञापन
माफियाओं के बीच विवाद बना कारण
इस प्रकरण को करीब से देख रहे लोगों की मानें तो बड़े माफियाओं के बीच का विवाद ही इस खुलासे का कारण है। बता दें कि वर्ष 2024 में नोएडा में अनिल कपूर ने आत्महत्या कर ली थी, जोकि उस समय विश्वविद्यालय में सचिव थे। हालांकि उनकी आत्महत्या की गुत्थी आज भी उलझी हुए है। इसके अलावा विश्वविद्यालय को बेचने और इसके एवज में मिली राशि भी संदेह के घेरे में है। इस बिंदु को भी एसटीएफ ने जांच में शामिल किया है।