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अलर्ट: तेजी से घट रहा जलस्तर
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Tue, 16 May 2017 10:01 PM IST
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पानी का स्तर
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में पानी का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। हालात यह हैं कि बड़ी संख्या में हैंडपंप सूख रहे हैं। नदी और तालाबों में भी पानी कम है। नतीजतन, इस भयंकर गर्मी में शहर के लोग पानी की किल्लत से बेहाल हैं। पानी की बर्बादी से समस्या और जटिल हो गई है।
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जल संरक्षण को लेकर सरकार द्वारा तरह-तरह की योजनाएं बनाई जाती हैं, बावजूद इसके लोग चेतने को तैयार नहीं है। इसके कारण गर्मियां शुरू होते ही जिले में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। कई हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। शहर के अलावा गांवों के तालाबों का स्तर भी घटने लगा है।
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जिले में कुल 11,690 हैंडपंप लगे हैं। गर्मियों से पहले आंकड़ों में करीब 200 हैंडपंप सूखे थे। इनमें से 80 हैंडपंपों को दूषित पानी देने के कारण रेड मार्क लगा दिया गया था। गर्मियां शुरू हो गईं, इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे।
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वर्तमान में देहात क्षेत्र की स्थिति काफी भयावह है। देहात क्षेत्र में लगे बीस फीसदी हैंडपंपों ने फिलहाल पानी देना ही बंद कर दिया है।
पानी की लगातार किल्लत के बावजूद लोग जल संरक्षण को लेकर जागरूक नहीं हो रहे हैं। अधिकारियों का भी इस ओर ध्यान नहीं है। केवल तहसील, जिला मुख्यालय एवं एचपीडी के कार्यालय में ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं।
जबकि, 300 वर्ग मीटर के मकान बनाने एवं कामर्शियल एवं मल्टीस्टोरी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाना अनिवार्य है। इसके बिना नक्शा पास नहीं होता, लेकिन नक्शा पास करते समय इन नियमों की ओर ध्यान नहीं दिया जाता।
शहरी क्षेत्रों में समरसेबिल का प्रयोग टंकी भरने तक ही सीमित है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर समरसेबिल लगवाए जा रहे हैं लेकिन यहां पानी का दुरुपयोग भी काफी है। इस पर रोक लगनी चाहिए। जलसंरक्षण को लेकर जनता को गंभीर होना चाहिए, जिससे पानी की किल्लत न झेलनी पड़े।
जलस्तर में सुधार के लिए प्रयास शुरू किए जा चुके हैं। तालाबों को कब्जा मुक्ता कराने के आदेश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं। इसके अलावा इस दिशा में प्रचार-प्रसार के साथ व्यापक कदम उठाए जाएंगे। कृष्णा करुणेश, डीएम