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Hapur News: राम वन गमन की कथा सुन भावुक हुए भक्त

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 22 Oct 2026 11:34 PM IST
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Ram katha
ब्रजघाट में श्रीराम कथा सुनाते व्यास सुशील मिश्रा। संवाद
ब्रजघाट। गंगानगरी के भागीरथी वृद्धाश्रम में चल रही श्रीराम कथा में बृहस्पतिवार को व्यास आचार्य सुशील मिश्रा ने राम वन गमन की कथा सुनाई। जिसे सुनकर भक्त भावुक हो गए। वहीं, श्रीराम और भरत के प्रेम की कथा सुनकर सभी की आंखें भर आईं।
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व्यास ने कहा कि श्रीराम के राजतिलक की घोषणा के बाद दासी मंथरा के बहकाने में आकर रानी कैकेयी कोप भवन में जाकर बैठ गईं। राजा दशरथ ने उन्हें मनाने का प्रयास किया। लेकिन रानी ने उन्हें युद्ध के दौरान दिए गए दो वचनों की याद दिलाई। इनमें से एक में उन्होंने भरत के लिए अयोध्या की राजगद्दी और दूसरे वचन में राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। माता की आज्ञा और पिता के वचन का पालन करने के लिए राम सहर्ष वन गमन के लिए तैयार हो गए। उनके साथ लक्ष्मण और जानकी भी संन्यासी वेश धारण कर वन को चल दिए।
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इसकी जानकारी मिलते ही प्रजाजन भी साथ चल पड़े। जिन्हें समझाकर राम ने अयोध्या भेज दिया। तीनों चित्रकूट में पर्णकुटी बनाकर रहने लगे। राजा दशरथ ने पुत्र वियोग में प्राण त्याग दिए।
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ननिहाल से लौटे भरत, शत्रुघ्न को सारा प्रकरण पता चला, तो भरत ने अपनी माता कैकेयी को धिक्कारा। वह श्रीराम, भाभी और लक्ष्मण को लाने के लिए वन जाने को तैयार हो गए। उनके साथ तीनों माताएं, सामंत, प्रजा भी वन के लिए चले। भरत भाई राम के वनवास के लिए स्वयं को दोषी मानते हुए अपने आप को धिक्कारते हुए चले। भरत का भाई के प्रति प्रेम देखकर भक्त भाव विह्वल हो गए। व्यास ने कहा कि भाई के प्रेम से बढ़कर कोई निधि संसार में नहीं है। इस दौरान महिपाल शर्मा, सुशील चौधरी, सुशील शर्मा, राकेश शर्मा, धर्मपाल सिंह, राजवीर सिंह, तेजपाल सिंह, राजेंद्र त्यागी मौजूद रहे। संवाद
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