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Hapur News: ऊर्जा निगम के नोटिसों में गड़बड़ी, करोड़ों का घपला उजागर
Fri, 09 Feb 2024 09:44 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Fri, 09 Feb 2024 09:44 PM IST
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हापुड़। बिजली चोरी के मामले में उपभोक्ताओं को दिए जाने वाले नोटिसों में घपलेबाजी हो रही है। सरकार नोटिस (प्रपत्र-4) में फर्जी जुर्माना बनाकर उपभोक्ताओं को थमाया जा रहा है। पोर्टल पर दर्ज राजस्व से मिलान करने पर यह फर्जीवाड़ा सामने आया है। डेढ़ साल पहले भी विजिलेंस ने इसका खुलासा कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी थी।
दरअसल, ऊर्जा निगम के हर पटल पर भ्रष्टाचार का बोल बाला है। हाल ही में स्थानीय निगम के सर्वोच्च अधिकारी अधीक्षण अभियंता यूके सिंह और जेई योगेंद्र निलंबित किए गए हैं। ऐसे में एक और बड़ा घपला सामने आ गया है, ऊर्जा मंत्रालय हापुड़ को लेकर गंभीर है। डेढ़ साल पहले करीब 50 करोड़ का घपला विजिलेंस ने खोला था, लेकिन उस समय अधिकारियों ने इसे दबा दिया।
लेकिन अब फिर 100 से अधिक ऐसे नोटिस सामने आ गए हैं। इन नोटिसों में जितना जुर्माना बनाया गया है, पोर्टल पर इसका कई गुना कम दर्ज है। ऐसे में नोटिसों से उगाही का खुला खेल डिवीजन कार्यालयों में चल रहा है। मुख्य बात यह है कि सबसे अधिक नोटिस गढ़ डिवीजन क्षेत्र के ही हैं।
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-डेढ़ साल पहले विजिलेंस ने पकड़ा था मामला-
विजिलेंस ने करीब डेढ़ साल पहले करोड़ों के ऐसे नोटिस पकड़े थे। पत्र के माध्यम से साक्ष्य सहित रिपोर्ट पुलिस महानिदेशक सतर्कता को भेजी गई थी। लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने पूरे मामले को दबा दिया।
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-संबंधित पटल के अधिकारी को बना दिया एसडीओ-
विजिलेंस ने इस मामले का खुलासा किया, जिस पर जांच भी बैठा दी गई। लेकिन राजस्व पटल को देखने वाले अधिकारी को एसडीओ धौलाना का चार्ज दे दिया गया। जबकि इस पूरे प्रकरण में उनकी भूमिका ही अहम थी, क्योंकि वही पटल के प्रभारी भी थे।
दो बिजलीघरों की लाइन बिना एस्टीमेट शिफ्ट करने की भी होगी जांच
मेरठ रोड बाईपास के नीचे दो बिजलीघरों की लाइन शिफ्ट कर दी गई थी। अब यह मामला भी तूल पकड़ रहा है। क्योंकि जांच में सामने आया है कि इसका एस्टीमेट ही नहीं बनवाया गया था। किसी फैक्टरी को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया। इस मामले की भी जांच शुरू की जा रही है।
-फैक्टरी की सप्लाई बंद रखने के मामले में फंसे अधिकारियों की बढ़ी मुश्किलें
मोदीनगर रोड स्थित फैक्टरी की सप्लाई बंद रखने के मामले में अधीक्षण अभियंता और जेई के निलंबन के बाद इनके बीच के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। निगम में तरह तरह की चर्चा है, कार्रवाई की संस्तुति कर दिए जाने की भी बात कही जा रही है।
जुर्माने में छूट पर गढ़ डिवीजन सबसे पीछे
ओटीएस में बिजली चोरी के जुर्माना में करीब 65 फीसदी तक छूट दी गई थी। लेकिन इसमें गढ़ डिवीजन सबसे पीछे रहा। क्योंकि वहां नोटिसों में सबसे अधिक फर्जीवाड़ा था।
अब ये नोटिस आए सामने-
नौशाल अली का पोर्टल पर राजस्व 16671 रुपये और नोटिस में 93 हजार रुपये, अनिल का पोर्टल पर 10190 रुपये और नोटिस में 1.60 लाख रुपये, मुन्ना चौधरी का पोर्टल पर राजस्व 3157 रुपये और नोटिस में 42 हजार रुपये इसके अलावा बहुत से नोटिस इस तरह के हैं।
-नोटिस रिसीव कराने के लिए किया घंटों का इंतजार-
मुख्य अभियंता कार्यालय से अधीक्षण अभियंता का निलंबन आदेश कर्मचारी द्वारा रिसीव कराने के लिए शुक्रवार को हापुड़ भेजा गया। बताया गया है कि काफी देर तक नोटिस नहीं लिया गया, बाद में नोटिस लिया लेकिन रिसीव नहीं किया। ऐसे में नोटिस की कॉपी गेट पर भी चस्पा की गई।
-मामला गंभीर, लेंगे संज्ञान-
इस तरह सरकारी प्रपत्रों में गड़बड़ी की गई है तो मामला गंभीर है, जिसका संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी। पुराने मामलों का भी संज्ञान लिया जाएगा।-- -एके जायसवाल, मुख्य अभियंता।
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दरअसल, ऊर्जा निगम के हर पटल पर भ्रष्टाचार का बोल बाला है। हाल ही में स्थानीय निगम के सर्वोच्च अधिकारी अधीक्षण अभियंता यूके सिंह और जेई योगेंद्र निलंबित किए गए हैं। ऐसे में एक और बड़ा घपला सामने आ गया है, ऊर्जा मंत्रालय हापुड़ को लेकर गंभीर है। डेढ़ साल पहले करीब 50 करोड़ का घपला विजिलेंस ने खोला था, लेकिन उस समय अधिकारियों ने इसे दबा दिया।
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लेकिन अब फिर 100 से अधिक ऐसे नोटिस सामने आ गए हैं। इन नोटिसों में जितना जुर्माना बनाया गया है, पोर्टल पर इसका कई गुना कम दर्ज है। ऐसे में नोटिसों से उगाही का खुला खेल डिवीजन कार्यालयों में चल रहा है। मुख्य बात यह है कि सबसे अधिक नोटिस गढ़ डिवीजन क्षेत्र के ही हैं।
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-डेढ़ साल पहले विजिलेंस ने पकड़ा था मामला-
विजिलेंस ने करीब डेढ़ साल पहले करोड़ों के ऐसे नोटिस पकड़े थे। पत्र के माध्यम से साक्ष्य सहित रिपोर्ट पुलिस महानिदेशक सतर्कता को भेजी गई थी। लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने पूरे मामले को दबा दिया।
-संबंधित पटल के अधिकारी को बना दिया एसडीओ-
विजिलेंस ने इस मामले का खुलासा किया, जिस पर जांच भी बैठा दी गई। लेकिन राजस्व पटल को देखने वाले अधिकारी को एसडीओ धौलाना का चार्ज दे दिया गया। जबकि इस पूरे प्रकरण में उनकी भूमिका ही अहम थी, क्योंकि वही पटल के प्रभारी भी थे।
दो बिजलीघरों की लाइन बिना एस्टीमेट शिफ्ट करने की भी होगी जांच
मेरठ रोड बाईपास के नीचे दो बिजलीघरों की लाइन शिफ्ट कर दी गई थी। अब यह मामला भी तूल पकड़ रहा है। क्योंकि जांच में सामने आया है कि इसका एस्टीमेट ही नहीं बनवाया गया था। किसी फैक्टरी को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया। इस मामले की भी जांच शुरू की जा रही है।
-फैक्टरी की सप्लाई बंद रखने के मामले में फंसे अधिकारियों की बढ़ी मुश्किलें
मोदीनगर रोड स्थित फैक्टरी की सप्लाई बंद रखने के मामले में अधीक्षण अभियंता और जेई के निलंबन के बाद इनके बीच के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। निगम में तरह तरह की चर्चा है, कार्रवाई की संस्तुति कर दिए जाने की भी बात कही जा रही है।
जुर्माने में छूट पर गढ़ डिवीजन सबसे पीछे
ओटीएस में बिजली चोरी के जुर्माना में करीब 65 फीसदी तक छूट दी गई थी। लेकिन इसमें गढ़ डिवीजन सबसे पीछे रहा। क्योंकि वहां नोटिसों में सबसे अधिक फर्जीवाड़ा था।
अब ये नोटिस आए सामने-
नौशाल अली का पोर्टल पर राजस्व 16671 रुपये और नोटिस में 93 हजार रुपये, अनिल का पोर्टल पर 10190 रुपये और नोटिस में 1.60 लाख रुपये, मुन्ना चौधरी का पोर्टल पर राजस्व 3157 रुपये और नोटिस में 42 हजार रुपये इसके अलावा बहुत से नोटिस इस तरह के हैं।
-नोटिस रिसीव कराने के लिए किया घंटों का इंतजार-
मुख्य अभियंता कार्यालय से अधीक्षण अभियंता का निलंबन आदेश कर्मचारी द्वारा रिसीव कराने के लिए शुक्रवार को हापुड़ भेजा गया। बताया गया है कि काफी देर तक नोटिस नहीं लिया गया, बाद में नोटिस लिया लेकिन रिसीव नहीं किया। ऐसे में नोटिस की कॉपी गेट पर भी चस्पा की गई।
-मामला गंभीर, लेंगे संज्ञान-
इस तरह सरकारी प्रपत्रों में गड़बड़ी की गई है तो मामला गंभीर है, जिसका संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी। पुराने मामलों का भी संज्ञान लिया जाएगा।