{"_id":"6564eb18df3ec8127e0b6fae","slug":"one-who-cannot-conquer-himself-cannot-be-alexander-hapur-news-c-135-1-hpr1001-5248-2023-11-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hapur News: न खुद को जीत पाए जो सिकंदर हो नहीं सकता...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hapur News: न खुद को जीत पाए जो सिकंदर हो नहीं सकता...
विज्ञापन
हापुड़। काव्यदीप संस्था के तत्वावधान में आयोजित कवि सम्मेलन और पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में कवियों ने अपनी रचनाओं से समा बांध दिया। कवयित्री कमलेश त्रिवेदी की चार पुस्तकों का लोकार्पण हुआ।
डॉ. अशोक मैत्रेय ने पढ़ा जरा सी बाढ़ आते ही लगे जो तोड़ने सीमा, वह कोई ताल है उथला समंदर हो नहीं सकता। डॉ. मधु चतुर्वेदी ने पढ़ा न खुद को जीत पाए जो सिकंदर हो नहीं सकता, बिना अभ्यास के कोई सिकंदर हो नहीं सकता। उमेश शर्मा ने पढ़ा जिंदगी के रास्ते में हादसे होते रहे, हम समंदर के किनारे दोस्तो प्यासे रहे।
पारूल त्यागी ने पढ़ा संबंधों की अपनी परिभाषा होती है, कभी चर कभी अचर कभी स्थिर कभी अस्थिर होया करते हैं। मुशर्रफ चौधरी ने पढ़ा कोई भी जिंदगी में तमाशा नहीं किया, हम ने खुलूसो प्यार का सौदा नहीं किया। महावीर वर्मा मधुर ने पढ़ा हमने की कोशिश की जब भी, जग ने मुझे रुलाया है, मेरे सारे जख्मों को जग ने कांटों से सहलाया है।
विज्ञापन
एमएल तेजियान ने पढ़ा सागर सारा उलट दे, आजा मेरे पास, मयखाने में बूंद से कब बुझती है प्यास। राकेश कुमार ने पढ़ा सुबह जगाने वाले पिंगल कहां गए मां, वो दुआ सलाम, कुशल मंगल कहां गए मां। पंडित शिव प्रकाश शर्मा ने पढ़ा राधा तेरी इस नगरी में, हम राधा गाने आए हैं, हमें लगा कि तुम भी रूठी हो हम तुम्हें मनाने आए हैं।
इस दौरान कमलेश त्रिवेदी की युगधर्म, चतुर्पथ, अंर्तध्वनि, आहट पद पुस्तकों का विमोचन हुआ। महेश वर्मा दिव्यमणि, अशोक कुमार शर्मा, प्रदीप कुमार, ऊषा, अवनीत, विकास त्यागी, रामवीर आकाश, राजचैतन्य ने भी रचनाएं पढ़ीं।
-- -
विज्ञापन
डॉ. अशोक मैत्रेय ने पढ़ा जरा सी बाढ़ आते ही लगे जो तोड़ने सीमा, वह कोई ताल है उथला समंदर हो नहीं सकता। डॉ. मधु चतुर्वेदी ने पढ़ा न खुद को जीत पाए जो सिकंदर हो नहीं सकता, बिना अभ्यास के कोई सिकंदर हो नहीं सकता। उमेश शर्मा ने पढ़ा जिंदगी के रास्ते में हादसे होते रहे, हम समंदर के किनारे दोस्तो प्यासे रहे।
विज्ञापन
पारूल त्यागी ने पढ़ा संबंधों की अपनी परिभाषा होती है, कभी चर कभी अचर कभी स्थिर कभी अस्थिर होया करते हैं। मुशर्रफ चौधरी ने पढ़ा कोई भी जिंदगी में तमाशा नहीं किया, हम ने खुलूसो प्यार का सौदा नहीं किया। महावीर वर्मा मधुर ने पढ़ा हमने की कोशिश की जब भी, जग ने मुझे रुलाया है, मेरे सारे जख्मों को जग ने कांटों से सहलाया है।
विज्ञापन
एमएल तेजियान ने पढ़ा सागर सारा उलट दे, आजा मेरे पास, मयखाने में बूंद से कब बुझती है प्यास। राकेश कुमार ने पढ़ा सुबह जगाने वाले पिंगल कहां गए मां, वो दुआ सलाम, कुशल मंगल कहां गए मां। पंडित शिव प्रकाश शर्मा ने पढ़ा राधा तेरी इस नगरी में, हम राधा गाने आए हैं, हमें लगा कि तुम भी रूठी हो हम तुम्हें मनाने आए हैं।
इस दौरान कमलेश त्रिवेदी की युगधर्म, चतुर्पथ, अंर्तध्वनि, आहट पद पुस्तकों का विमोचन हुआ। महेश वर्मा दिव्यमणि, अशोक कुमार शर्मा, प्रदीप कुमार, ऊषा, अवनीत, विकास त्यागी, रामवीर आकाश, राजचैतन्य ने भी रचनाएं पढ़ीं।