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गौरेया के लिए बनेंगे एक हजार नेस्ट बॉक्स

Tue, 23 Feb 2016 09:57 PM IST
अमर उजाला, गढ़
अमर उजाला, गढ़ Updated Tue, 23 Feb 2016 09:57 PM IST
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one thousand nest made for sparrow.
लुप्त होती जा रही गौरेया को बचाने के लिए 20 मार्च को गौरेया दिवस मनाया जाएगा। इसके लिए वन विभाग की ओर से नई पहल की गई है।
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जनसहयोग के माध्यम से विभाग जिले में गौरेया को बसाने के लिए एक हजार से अधिक (नेस्ट बाक्स) घोंसले बनाएगा। विभाग ने प्रचार-प्रसार भी शुरू कर दिया है।

पेड़ों की कटान तथा बढ़ती मकानों की संख्या के कारण गौरेया अब लुप्त होती जा रही है। इसी गौरेया की चहचाहट बढ़ाने के लिए वन विभाग ने एक नई पहल शुरू की है।

डीएफओ पदमनाथ सिंह ने बताया कि धन के अभाव में इस प्रयास को सफल बनाने के लिए विभाग की ओर से जनसहयोग की अपील की गई है।
 
डीएफओ पदमनाथ सिंह ने बताया कि जिले में गौरेया के लिए एक हजार नेस्ट बॉक्स (घोंसले) बनाए जाएंगे। बाक्स की लंबाई-चौड़ाई करीब 15 से 25 सेमी होगी।

 घोंसले में घुसने के लिए गेट (छिद्र) करीब 31 मिली मीटर का होगा। जिससे उसमें कौआ आदि अन्य कोई पक्षी गौरेया या उसके बच्चों को नुकसान न पहुंचा सके। बॉक्स के निचले भाग में दो मिमी के पांच-छह छिद्र होंगे, जिससे मकान के अंदर हवा आर-पार हो सके।
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गौरेया के लुप्त होने का सबसे बड़ा कारण छोटे पेड़ों, झाड़ियों के काटे जाने के कारण इसके प्रजनन में कमी होती गई। गौरेया चांदनी, बबूल, कनेर, नीबू, अमरूद, अनार, मेंहदी, बॉस आदि पेड़ों को पसंद करती है।
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इन्हीं पेड़ों पर वह ज्यादा देर तक निवास करती है, जो कम होते जा रहे है। इसके अतिरिक्त मोबाइल टावर शहरों तथा गांवों में लगाए जा रहे है। इनसे निकलने वाली इलेक्ट्रो मैगनेटिक किरणें गौरंया को उत्तेजित करती है और उनकी प्रजनन क्षमता को कम करती है।
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