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गढ़मुक्तेश्वर में लिवर कैंसर से एक और महिला की मौत
अमर उजाला, गढ़मुक्तेश्वर
Updated Mon, 15 Feb 2016 01:09 AM IST
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बहादुरगढ़ निवासी एक महिला की रविवार को लिवर कैंसर से मौत हो गई। उसका मेरठ के अस्पताल में कई दिनों से इलाज चल रहा था। गढ़ और सिंभावली तहसील में 45 दिन में 11 लोगों को कैंसर शिकार बना चुका है।
वहीं पांच साल में 150 लोग जान गवां चुके हैं। क्षेत्र में कैंसर और हेपेटाइटिस के मामले बढ़ने के लिए लोग भूजल के प्रदूषण को जिम्मेदार मान रहे हैं।
बहादुरगढ़ गांव निवासी पप्पू सिंह की पत्नी प्रकाशी (40) की लिवर कैंसर से रविवार को मौत हो गई। उसका इलाज मेरठ के निजी अस्पताल में चल रहा था। वह काफी दिनों से बीमार थी।
बता दें कि गांव मानकचौक, हशूपुर, वैट, बक्सर, सेहल, रतूूपुरा, पसवाड़ा, भगवानपुर, श्यामपुर जट्ट, डिबाई, फुलडेहरा, रझैटी, जखैड़ा रहमतपुर, सलोनी का भूजल बुरी तरह दूषित है।
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गंगा किनारे के गांव ज्यादा प्रदूषित
गढ़ और सिंभावली तहसील में हेपेटाइटिस, कैंसर, पेट की बीमारी आदि के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका कारण यहां फैक्ट्रियों के दूषित पानी गंगा में गिरना है।
सिंभावली डिस्टलरी और स्याना के दूध प्लांटों का वेस्ट भी गंगा में गिर रहा रहा है। इस पानी में शीशा, कोबाल्ट और ऑर्सेनिक की मात्रा होती है।
स्वास्थ्य विभाग भी बेखबर
गांवों में कैंसर से हो रहीं मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग बेखबर है। बहादुरगढ़ और सिंभावली-बक्सर सहित आसपास के दो दर्जन से भी अधिक गांवों में कैंसर से पीड़ित मरीज खासी तादाद में हैं, लेकिन ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आ पाया है, जिसमें डायग्नोज होने के बाद किसी मरीज की जान बच पाई हो।
हेपेटाइटिस और कैंसर के लिए दूषित पानी जिम्मेदार नहीं है। कैंसर होने के अन्य कारण है। स्वास्थ्य विभाग कैैंप लगवाकर मरीजों की जांच करवाता है। आगे भी कैंप लगाकर मरीजों की जांच की जाएगी। - अधीक्षक डॉ. रविंद्र, सीएचसी
जिन स्थानों पर भूजल दूषित है, वहां के पानी के नमूने लेकर जांच कराई जाएगी। पूठ में गिर रहे नाले को भी रुकवाया जाएगा। पानी का सैंपल लेकर जांच की जाएगी। इसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। - केबी सिंह, एसडीएम
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वहीं पांच साल में 150 लोग जान गवां चुके हैं। क्षेत्र में कैंसर और हेपेटाइटिस के मामले बढ़ने के लिए लोग भूजल के प्रदूषण को जिम्मेदार मान रहे हैं।
बहादुरगढ़ गांव निवासी पप्पू सिंह की पत्नी प्रकाशी (40) की लिवर कैंसर से रविवार को मौत हो गई। उसका इलाज मेरठ के निजी अस्पताल में चल रहा था। वह काफी दिनों से बीमार थी।
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बता दें कि गांव मानकचौक, हशूपुर, वैट, बक्सर, सेहल, रतूूपुरा, पसवाड़ा, भगवानपुर, श्यामपुर जट्ट, डिबाई, फुलडेहरा, रझैटी, जखैड़ा रहमतपुर, सलोनी का भूजल बुरी तरह दूषित है।
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गंगा किनारे के गांव ज्यादा प्रदूषित
गढ़ और सिंभावली तहसील में हेपेटाइटिस, कैंसर, पेट की बीमारी आदि के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका कारण यहां फैक्ट्रियों के दूषित पानी गंगा में गिरना है।
सिंभावली डिस्टलरी और स्याना के दूध प्लांटों का वेस्ट भी गंगा में गिर रहा रहा है। इस पानी में शीशा, कोबाल्ट और ऑर्सेनिक की मात्रा होती है।
स्वास्थ्य विभाग भी बेखबर
गांवों में कैंसर से हो रहीं मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग बेखबर है। बहादुरगढ़ और सिंभावली-बक्सर सहित आसपास के दो दर्जन से भी अधिक गांवों में कैंसर से पीड़ित मरीज खासी तादाद में हैं, लेकिन ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आ पाया है, जिसमें डायग्नोज होने के बाद किसी मरीज की जान बच पाई हो।
हेपेटाइटिस और कैंसर के लिए दूषित पानी जिम्मेदार नहीं है। कैंसर होने के अन्य कारण है। स्वास्थ्य विभाग कैैंप लगवाकर मरीजों की जांच करवाता है। आगे भी कैंप लगाकर मरीजों की जांच की जाएगी। - अधीक्षक डॉ. रविंद्र, सीएचसी
जिन स्थानों पर भूजल दूषित है, वहां के पानी के नमूने लेकर जांच कराई जाएगी। पूठ में गिर रहे नाले को भी रुकवाया जाएगा। पानी का सैंपल लेकर जांच की जाएगी। इसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। - केबी सिंह, एसडीएम