{"_id":"58b9a92a4f1c1b9e6483133e","slug":"loss-of-government-stamp-duty","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार को एक करोड़ के स्टांप शुल्क की चपत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार को एक करोड़ के स्टांप शुल्क की चपत
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Fri, 03 Mar 2017 11:04 PM IST
विज्ञापन
स्टांप ड्यूटी
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्टांप ड्यूटी के नाम हापुड़ में करोड़ों के राजस्व को चूना लगाने का मामला प्रकाश में आया है। मामला किसानों की भूमि अधिग्रहण के मुआवजे और फिर दूसरी जमीन की खरीद की स्टांप ड्यूटी में छूट से जुड़ा है।
विज्ञापन
किसानों ने मुआवजा तो केंद्र सरकार से लिया, मगर छूट प्रदेश सरकार के नियमों के तहत ले ली। मामला एडीएम की पकड़ में आया तो उन्होंने सभी फाइलें तलब करके जांच बैठा दी। प्रशासन के इस कदम के बाद से किसानों और सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में तैनात अधिकारियों में हड़कंप मचा है।
विज्ञापन
माना जा रहा कि इस तरह के मामलों की जांच अगर प्रदेश भर में कराई जाए तो सरकार को लगी अरबों की चपत का खुलासा हो सकता है। प्रदेश में केंद्र सरकार की अनेक परियोजनाओं के लिए भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है।
विज्ञापन
इनमें विशेष रूप से रेलवे की डेडिकेटिड फ्रेट कोरिडोर परियोजना है जो संपूर्ण उत्तर प्रदेश के मध्य से गुजरेगी। इसके लिए अर्जित भूमि का मुआवजा वितरित किया जा रहा है। इसी तरह कई राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ीकरण किया जा रहा है।
नोएडा में तैनात डीआईजी स्टांप जीपी सिंह के अनुसार 2005 में राज्य सरकार ने जारी अपने एक आदेश में कहा था कि स्टेट परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई भूमि के मुआवजे की रकम से अगर कोई व्यक्ति उसी कीमत की जमीन कहीं खरीदता है तो उसे स्टांप शुल्क नहीं देना होगा।
हापुड़ प्रशासन को अब जानकारी मिली है कि कुछ किसानों की जमीन तो केंद्रीय स्तर पर अधिग्रहित की गई थी, मगर उन्होंने स्टांप में छूट राज्य सरकार के नियमों के तहत ले ली। इसमें सब रजिस्ट्रार आफिस में तैनात अधिकारियों की संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
आंकडे़ बताते हैं कि हापुड़ तहसील के रजिस्ट्री कार्यालय में सब रजिस्ट्रार प्रथम के यहां 21 रजिस्ट्रियां हुई। इनमें कुल 6.44 करोड़ की जमीन खरीदी गई, जिस पर 38.44 लाख के स्टांप की सरकार को चपत लगी। इसी प्रकार सब रजिस्ट्रार द्वितीय के यहां 5 रजिस्ट्री हुईं,
जिनसे 2.18 करोड़ की जमीन खरीद गईं। यहां भी 13.98 लाख रुपये के स्टांप की चपत लगी। कुल मिलाकर करीब 52.42 लाख रुपये के स्टांप की चपत हापुड़ तहसील क्षेत्र के बैनामों में लगी है।
जबकि धौलाना में भी करीब 24 बैनामों में लगभग 48 लाख रुपये की चपत स्टांप शुल्क नहीं देने से लगी है। जमीन खरीदने वालों में कई लोग जिले से बाहर के हैं। हापुड़ में बैनामा कराने वालों में अलका, कृष्ण दत्त त्यागी, सुदेश, रिछपाल, पवनवीर, सुनील, अनीता, अर्जुन, राधेश्याम आदि शामिल हैं।
एडीएम (वित्त एवं राजस्व) रजनीश राय से इस संबंध में जानकारी करने पर उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए नोटिस जारी किए गए हैं। लगता है कि रजिस्ट्री विभाग ने राज्य सरकार के आदेश पर ध्यान नहीं दिया।
उल्लेखनीय है कि यह मामला एक किसान के किसी कारणवश कोर्ट में चले जाने के बाद खुल सका है। सब रजिस्ट्रार सुबोध राय का कहना है कि हापुड़ से पहले इस तरह के बैनामे मेरठ, बागपत समेत अनेक जिलों में पिछले चार साल से हो रहे हैं।
इसलिए हापुड़ जिले में भी इस तरह के मामलों में बिना स्टांप शुल्क लिए बैनामे किये गये हैं। हालांकि अब मामले का खुलासा होने पर संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए जाएंगे।