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आज सुहागिनें रखेंगी निर्जला व्रत, रात 8:16 बजे होगा चंद्रोदय
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सजना है मुझे सजना के लिए--करवाचौथ त्योहार पर सजने के लिए महिलाएं जमकर बाजार में दुकान से श्रंगा
हापुड़। पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए मनाया जाने वाला करवाचौथ का त्योहार 29 अक्तूबर को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन सौभाग्यवती महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शंकर-पार्वती और चंद्रदेव की पूजा करेंगी। चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण करेंगी।
भागवत किंकर पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि चतुर्थी तिथि 28 अक्तूबर की रात 1:06 बजे से 29 अक्तूबर की रात 10:09 बजे तक रहेगी। करवाचौथ पर पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से रात 8:16 बजे तक रहेगा। चंद्रदेव के दर्शन और अर्घ्य देने का संभावित समय रात 8:16 बजे बताया गया है। उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान गणेश के वक्रतुंड स्वरूप का पूजन करना शुभ माना जाता है। सुबह 11:11 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहने के दौरान व्रत का संकल्प लेना भी शुभ रहेगा।
व्रत कथा सुनने का विशेष महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, साहूकार की बेटी करवा ने करवाचौथ का व्रत रखा था। उसके भाइयों ने भूख से व्याकुल बहन को चंद्रमा निकलने का झूठा संकेत देकर भोजन करा दिया। इसके बाद उसे पति की मृत्यु का समाचार मिला। मान्यता है कि अगले वर्ष विधि-विधान से व्रत करने पर उसका पति पुनर्जीवित हो गया। तभी से सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ यह व्रत करती आ रही हैं। पंडित संतोष तिवारी ने श्रद्धा और निष्ठा के साथ व्रत करने तथा परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लेने का संदेश दिया।
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भागवत किंकर पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि चतुर्थी तिथि 28 अक्तूबर की रात 1:06 बजे से 29 अक्तूबर की रात 10:09 बजे तक रहेगी। करवाचौथ पर पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से रात 8:16 बजे तक रहेगा। चंद्रदेव के दर्शन और अर्घ्य देने का संभावित समय रात 8:16 बजे बताया गया है। उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान गणेश के वक्रतुंड स्वरूप का पूजन करना शुभ माना जाता है। सुबह 11:11 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहने के दौरान व्रत का संकल्प लेना भी शुभ रहेगा।
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व्रत कथा सुनने का विशेष महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, साहूकार की बेटी करवा ने करवाचौथ का व्रत रखा था। उसके भाइयों ने भूख से व्याकुल बहन को चंद्रमा निकलने का झूठा संकेत देकर भोजन करा दिया। इसके बाद उसे पति की मृत्यु का समाचार मिला। मान्यता है कि अगले वर्ष विधि-विधान से व्रत करने पर उसका पति पुनर्जीवित हो गया। तभी से सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ यह व्रत करती आ रही हैं। पंडित संतोष तिवारी ने श्रद्धा और निष्ठा के साथ व्रत करने तथा परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लेने का संदेश दिया।
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