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Hapur News: नवजातों को जकड़ रहा पीलिया, सरकारी अस्पताल में बढ़े मरीज
Fri, 08 Dec 2023 10:19 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Fri, 08 Dec 2023 10:19 PM IST
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हापुड़। मौसम में बदलाव के साथ नवजातों को पीलिया जकड़ रहा है, नर्सरी में फोटोथेरेपी के लिए काफी संख्या में लोग बच्चों को लेकर पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की नर्सरी में इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की संख्या अधिक है। जबकि निजी अस्पतालों में भी ऐसे बच्चों की भरमार है। नर्सरी में बच्चे को रखने का खर्च प्रतिदिन करीब दस से 15 हजार रुपये आ रहा है।
गढ़ रोड सीएचसी में सिर्फ एक नर्सरी है, जिसमें गंभीर नवजात बच्चों को भर्ती किया जाता है। जबकि जिला अस्पताल की नर्सरी पिछले एक साल से बंद पड़ी है। गढ़ रोड सीएचसी की नर्सरी की क्षमता 15 नवजातों को भर्ती करने की है। लेकिन इन दिनों बच्चों में पीलिया, फेफड़े सिकुड़ने जैसी बीमारियां आ रही हैं। आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग की नर्सरी में नवजातों को भर्ती कराने के लिए वेटिंग शुरू हो गई है। बेड खाली होते ही उस पर दूसरे बच्चे को जगह दी जाती है। यहां सेवाएं निशुल्क हैं, जबकि जिले के निजी अस्पतालों में बनी करीब सात नर्सरियां भी अब फुल हो गई हैं। जहां का खर्च गरीब परिवारों के लिए वहन करना आसान नहीं है।
जिले की आठ नर्सरियों में भर्ती नवजातों की स्थिति-
* कुल भर्ती नवजात-- -- 115
* पीलिया से पीड़ित-- -- 43
* आरडीएस से पीड़ित-- -22
* एमएएस से पीड़ित-- -- 5
* हाइपोथर्मिया से पीड़ित-- 21
* फेफड़े संबंध समस्या-- -24
एक किलो से कम वजन के बच्चे को रेफर करते हैं चिकित्सक-
स्वास्थ्य विभाग की नर्सरी में आधुनिक सुविधाओं की कमी है। एक किलोग्राम से कम वजन के बच्चों को रेफर करना ही विकल्प होता है। साथ ही अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों को भी मेरठ भेजा जाता है। पीलिया व सामान्य बीमारियां को दूर करने के लिए यहां अच्छी सुविधाएं हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पालकी नारंग ने बताया कि पीलिया तब होता है जब आपके बच्चे के रक्त में बिलीरुबिन की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है। बिलीरुबिन एक रसायन है जिसे आपका शरीर तब बनाता है जब यह पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं को तोड़ता है। यदि आपके बच्चे का लीवर बिलीरुबिन से छुटकारा पाने के लिए पर्याप्त विकसित नहीं हुआ है, तो यह बनना शुरू हो सकता है। बिलीरुबिन के इस निर्माण के कारण आपके बच्चे की त्वचा पीली दिखने लगती है।
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-इन समस्याओं के साथ पीलिया होता है गंभीर-
* रक्त संक्रमण (सेप्सिस)।
* माता पिता से अलग ब्लड ग्रुप।
* जन्म के दौरान गंभीर समस्याओं का सामना करना या चोट लगना।
* बहुत अधिक लाल रक्त कोशिकाएं।
* निम्न ऑक्सीजन स्तर (हाइपोक्सिया)।
* पित्त की गति, एक ऐसी स्थिति जिसमें बच्चे की पित्त नलिकाएं अवरुद्ध या जख्मी हो जाती हैं ।
* आंतरिक रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्या होना।
* अन्य वायरल या जीवाणु संक्रमण।
* मां के खून और बच्चे के खून के बीच एक असंगति।
* लीवर में खराबी होना या लीवर का ठीक से काम न करना।
* एंजाइम की कमी के साथ जन्म होना।
* आपके बच्चे की लाल रक्त कोशिकाओं की एक असामान्यता जिसके कारण वह तेजी से टूटती हैं।
कोट -
नर्सरी में भर्ती होने वाले नवजातों की देखरेख के लिए बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। नवजातों को बचाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। पीलिया से पीड़ित नवजातों को फोटोथेरेपी का लाभ दिया जा रहा है। कोई गंभीर स्थिति नहीं है।-- डॉ.दिनेश खत्री, सीएचसी अधीक्षक।
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गढ़ रोड सीएचसी में सिर्फ एक नर्सरी है, जिसमें गंभीर नवजात बच्चों को भर्ती किया जाता है। जबकि जिला अस्पताल की नर्सरी पिछले एक साल से बंद पड़ी है। गढ़ रोड सीएचसी की नर्सरी की क्षमता 15 नवजातों को भर्ती करने की है। लेकिन इन दिनों बच्चों में पीलिया, फेफड़े सिकुड़ने जैसी बीमारियां आ रही हैं। आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग की नर्सरी में नवजातों को भर्ती कराने के लिए वेटिंग शुरू हो गई है। बेड खाली होते ही उस पर दूसरे बच्चे को जगह दी जाती है। यहां सेवाएं निशुल्क हैं, जबकि जिले के निजी अस्पतालों में बनी करीब सात नर्सरियां भी अब फुल हो गई हैं। जहां का खर्च गरीब परिवारों के लिए वहन करना आसान नहीं है।
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जिले की आठ नर्सरियों में भर्ती नवजातों की स्थिति-
* कुल भर्ती नवजात
* पीलिया से पीड़ित
* आरडीएस से पीड़ित
* एमएएस से पीड़ित
* हाइपोथर्मिया से पीड़ित
* फेफड़े संबंध समस्या
एक किलो से कम वजन के बच्चे को रेफर करते हैं चिकित्सक-
स्वास्थ्य विभाग की नर्सरी में आधुनिक सुविधाओं की कमी है। एक किलोग्राम से कम वजन के बच्चों को रेफर करना ही विकल्प होता है। साथ ही अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों को भी मेरठ भेजा जाता है। पीलिया व सामान्य बीमारियां को दूर करने के लिए यहां अच्छी सुविधाएं हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पालकी नारंग ने बताया कि पीलिया तब होता है जब आपके बच्चे के रक्त में बिलीरुबिन की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है। बिलीरुबिन एक रसायन है जिसे आपका शरीर तब बनाता है जब यह पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं को तोड़ता है। यदि आपके बच्चे का लीवर बिलीरुबिन से छुटकारा पाने के लिए पर्याप्त विकसित नहीं हुआ है, तो यह बनना शुरू हो सकता है। बिलीरुबिन के इस निर्माण के कारण आपके बच्चे की त्वचा पीली दिखने लगती है।
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-इन समस्याओं के साथ पीलिया होता है गंभीर-
* रक्त संक्रमण (सेप्सिस)।
* माता पिता से अलग ब्लड ग्रुप।
* जन्म के दौरान गंभीर समस्याओं का सामना करना या चोट लगना।
* बहुत अधिक लाल रक्त कोशिकाएं।
* निम्न ऑक्सीजन स्तर (हाइपोक्सिया)।
* पित्त की गति, एक ऐसी स्थिति जिसमें बच्चे की पित्त नलिकाएं अवरुद्ध या जख्मी हो जाती हैं ।
* आंतरिक रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्या होना।
* अन्य वायरल या जीवाणु संक्रमण।
* मां के खून और बच्चे के खून के बीच एक असंगति।
* लीवर में खराबी होना या लीवर का ठीक से काम न करना।
* एंजाइम की कमी के साथ जन्म होना।
* आपके बच्चे की लाल रक्त कोशिकाओं की एक असामान्यता जिसके कारण वह तेजी से टूटती हैं।
कोट -
नर्सरी में भर्ती होने वाले नवजातों की देखरेख के लिए बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। नवजातों को बचाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। पीलिया से पीड़ित नवजातों को फोटोथेरेपी का लाभ दिया जा रहा है। कोई गंभीर स्थिति नहीं है।