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मरीज की आंख का किया गलत ऑपरेशन
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मरीज की आंख का किया गलत ऑपरेशन
हापुड़। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने वादी के ऑपरेशन के कारण खराब हुई आंख के लिए चिकित्सक व अस्पताल प्रबंधक को जिम्मेदार ठहराया है। जिसके लिए वादी को आपरेशन में आए खर्च व साठ हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं।
आयोग के अध्यक्ष आनंद बिहारी श्रीवास्तव ने बताया कि गांव उबारपुर थाना हाफिजपुर निवासी सतेंद्र कुमार ने उनके न्यायालय में एक वाद दायर किया। जिसमें उसने कहा कि वह अपने पिता अमर सिंह को आंखों की जांच के लिए रामा आस्पताल एवं मेडिकल कालेज में लेकर गया। जहां पर उसने अपने पिता की आंखों की जांच डॉ. डीजे पांडे से कराई। चिकित्सक ने मोतिया बिंद होने की बात कहते हुए ऑपरेशन कराने के लिए कहा। जिस पर वादी ने 12 जनवरी 2018 को अपने पिता को रामा अस्पताल में भर्ती कराया और 13 जनवरी 2018 को उनका ऑपरेशन किया गया। चिकित्सकों ने 18 जनवरी 2018 को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। जिसके 15 दिन बाद वह अपने पिता को अस्पताल में दिखाने के लिए पहुंचा। जहां पर आंख में रोशनी कम की उनके द्वारा शिकायत की गई। चिकित्सक पीजे पांडे ने कहा कि दवा डालते रहने के लिए कहा, लेकिन आंख में कोई सुधार न होने पर वह अपने पिता को दो फरवरी 2018 को लेकर अस्पताल पहुंचा। चिकित्सक डीजे पांडे ने मेरठ में एक चिकित्सक से जांच कराने की सलाह दी। जहां जांच कराने पर पता चला की उनकी आंख खराब हो गई है। जिसके बाद वह रामा अस्पताल में डॉ. डीजे पांडे के पास पहुंचा और अन्य चिकित्सकों द्वारा बताई गई ऑपरेशन में कमी के बारे में बताया। जिस पर उन्होंने उसके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए अस्पताल से भगा दिया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने अपना फैसला सुनाया। जिसमें कहा कि अस्पताल प्रबंधक व चिकित्सक वादी को आपरेशन में आया खर्च तीन हजार चार सौ 63 रुपये अदा करें। साथ ही वादी व उसके पिता को हुई आर्थिक व मानसिक क्षति के लिए पचास हजार रुपये का भुगतान करे। इसके अलावा मुकदमे में व्यय हुए दस हजार रुपये भी वादी को दिए जाएं। समस्त धनराशि का भुगतान आदेश की तिथि से एक माह के अंदर किया जाए।
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हापुड़। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने वादी के ऑपरेशन के कारण खराब हुई आंख के लिए चिकित्सक व अस्पताल प्रबंधक को जिम्मेदार ठहराया है। जिसके लिए वादी को आपरेशन में आए खर्च व साठ हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं।
आयोग के अध्यक्ष आनंद बिहारी श्रीवास्तव ने बताया कि गांव उबारपुर थाना हाफिजपुर निवासी सतेंद्र कुमार ने उनके न्यायालय में एक वाद दायर किया। जिसमें उसने कहा कि वह अपने पिता अमर सिंह को आंखों की जांच के लिए रामा आस्पताल एवं मेडिकल कालेज में लेकर गया। जहां पर उसने अपने पिता की आंखों की जांच डॉ. डीजे पांडे से कराई। चिकित्सक ने मोतिया बिंद होने की बात कहते हुए ऑपरेशन कराने के लिए कहा। जिस पर वादी ने 12 जनवरी 2018 को अपने पिता को रामा अस्पताल में भर्ती कराया और 13 जनवरी 2018 को उनका ऑपरेशन किया गया। चिकित्सकों ने 18 जनवरी 2018 को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। जिसके 15 दिन बाद वह अपने पिता को अस्पताल में दिखाने के लिए पहुंचा। जहां पर आंख में रोशनी कम की उनके द्वारा शिकायत की गई। चिकित्सक पीजे पांडे ने कहा कि दवा डालते रहने के लिए कहा, लेकिन आंख में कोई सुधार न होने पर वह अपने पिता को दो फरवरी 2018 को लेकर अस्पताल पहुंचा। चिकित्सक डीजे पांडे ने मेरठ में एक चिकित्सक से जांच कराने की सलाह दी। जहां जांच कराने पर पता चला की उनकी आंख खराब हो गई है। जिसके बाद वह रामा अस्पताल में डॉ. डीजे पांडे के पास पहुंचा और अन्य चिकित्सकों द्वारा बताई गई ऑपरेशन में कमी के बारे में बताया। जिस पर उन्होंने उसके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए अस्पताल से भगा दिया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने अपना फैसला सुनाया। जिसमें कहा कि अस्पताल प्रबंधक व चिकित्सक वादी को आपरेशन में आया खर्च तीन हजार चार सौ 63 रुपये अदा करें। साथ ही वादी व उसके पिता को हुई आर्थिक व मानसिक क्षति के लिए पचास हजार रुपये का भुगतान करे। इसके अलावा मुकदमे में व्यय हुए दस हजार रुपये भी वादी को दिए जाएं। समस्त धनराशि का भुगतान आदेश की तिथि से एक माह के अंदर किया जाए।
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