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पटाखों की बिक्री पर लगी रोक, इस बार बिना शोरगुल की रहेगी दिवाली
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सख्ती - पटाखों की बिक्री पर रोक, इस बार बिना शोरगुल की रहेगी दिवाली
हापुड़। दिवाली पर इस बार पटाखों और आतिशबाजी का शोर नहीं सुनाई देगी। बढ़ते प्रदूषण और धौलाना की पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट को देखते हुए जिला प्रशासन ने पटाखों की बिक्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। इस बार ग्रीन पटाखों की बिक्री भी नहीं की जाएगी। इसकी रोकथाम के लिए डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है।
दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में दीवाली के आसपास आतिशबाजी के कारण प्रदूषण की स्थिति खतरनाक हो जाती है। ऐसे में कई दिनों तक गंभीर हालात बने रहते हैं। ऐसे में चार साल पहले एनजीटी ने सामान्य पटाखों की बिक्री पर रोक लगाते हुए कुछ शर्तों के साथ दिवाली पर ग्रीन पटाखों की बिक्री के ही आदेश दिए थे। तीन वर्षों से यहां केवल ग्रीन पटाखे जलाने और इनकी ही बिक्री के आदेश थे। ग्रीन पटाखों को लेकर गाइडलाइंस जारी होने के बाद उसी के अनुसार पटाखों की बिक्री मात्र एक चिन्हित स्थान पर होती थी। लेकिन इस बार पुराने नियम भी लागू नहीं होंगे और पटाखों की बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा।
खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा एक्यूआई -
जिलेे में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। बारिश बंद होने के बाद जिले में एक्यूआई का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। पिछले दो तीन दिन से एक्यूआई 275 के आसपास पर चल रहा है। अगले कुछ दिनों में इसके और बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। ऐसे में एनजीटी की गाइड लाइन है कि एक्यूआई तीन सौ ऊपर जाता है तो किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री न की जाए। इसी बात को देखते हुए जिले में इस बार पटाखों की बिक्री को प्रतिबंधित किया है।
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धौलाना कांड की पुनरावृत्ति रोकना भी मकसद
एनजीटी की ओर से दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री के लिए अभी तक कोई आदेश नहीं दिया गया है। लेकिन हापुड़ जिला प्रशासन ने इस बार इसे गंभीरता से ले रहा है। कुछ माह पहले धौलाना की अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट और इसके बाद 18 लोगों की मौत के बाद से जिला प्रशासन अभी तक हिला हुआ है। ऐसे में ऐसे हादसे की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए पटाखों की बिक्री को प्रतिबंधित करना मुख्य कारण माना जा रहा है।
पटाखों की बिक्री के साथ जलाना भी प्रतिबंधित
नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं। अक्सर देखा जाता है कि आतिशबाजी के शौकीन आसपास के जनपदों जहां पटाखों की बिक्री हो रही है, जैसे अमरोहा आदि से पटाखे खरीदकर लाते हैं और यहां छुड़ाते हैं। इसकी रोकथाम के लिए अधिकारियों ने बार्डर पर पहरा सख्त कर दिया है। वाहनों की चेकिंग के अलावा आतिशबाजी छुड़ाने वालों पर भी कार्रवाई की तैयारी है।
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए लिया निर्णय
जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार बिगड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। आदेशों का पालन कराने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। - मेधा रूपम, डीएम, हापुड़।
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हापुड़। दिवाली पर इस बार पटाखों और आतिशबाजी का शोर नहीं सुनाई देगी। बढ़ते प्रदूषण और धौलाना की पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट को देखते हुए जिला प्रशासन ने पटाखों की बिक्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। इस बार ग्रीन पटाखों की बिक्री भी नहीं की जाएगी। इसकी रोकथाम के लिए डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है।
दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में दीवाली के आसपास आतिशबाजी के कारण प्रदूषण की स्थिति खतरनाक हो जाती है। ऐसे में कई दिनों तक गंभीर हालात बने रहते हैं। ऐसे में चार साल पहले एनजीटी ने सामान्य पटाखों की बिक्री पर रोक लगाते हुए कुछ शर्तों के साथ दिवाली पर ग्रीन पटाखों की बिक्री के ही आदेश दिए थे। तीन वर्षों से यहां केवल ग्रीन पटाखे जलाने और इनकी ही बिक्री के आदेश थे। ग्रीन पटाखों को लेकर गाइडलाइंस जारी होने के बाद उसी के अनुसार पटाखों की बिक्री मात्र एक चिन्हित स्थान पर होती थी। लेकिन इस बार पुराने नियम भी लागू नहीं होंगे और पटाखों की बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा।
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खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा एक्यूआई -
जिलेे में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। बारिश बंद होने के बाद जिले में एक्यूआई का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। पिछले दो तीन दिन से एक्यूआई 275 के आसपास पर चल रहा है। अगले कुछ दिनों में इसके और बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। ऐसे में एनजीटी की गाइड लाइन है कि एक्यूआई तीन सौ ऊपर जाता है तो किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री न की जाए। इसी बात को देखते हुए जिले में इस बार पटाखों की बिक्री को प्रतिबंधित किया है।
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धौलाना कांड की पुनरावृत्ति रोकना भी मकसद
एनजीटी की ओर से दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री के लिए अभी तक कोई आदेश नहीं दिया गया है। लेकिन हापुड़ जिला प्रशासन ने इस बार इसे गंभीरता से ले रहा है। कुछ माह पहले धौलाना की अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट और इसके बाद 18 लोगों की मौत के बाद से जिला प्रशासन अभी तक हिला हुआ है। ऐसे में ऐसे हादसे की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए पटाखों की बिक्री को प्रतिबंधित करना मुख्य कारण माना जा रहा है।
पटाखों की बिक्री के साथ जलाना भी प्रतिबंधित
नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं। अक्सर देखा जाता है कि आतिशबाजी के शौकीन आसपास के जनपदों जहां पटाखों की बिक्री हो रही है, जैसे अमरोहा आदि से पटाखे खरीदकर लाते हैं और यहां छुड़ाते हैं। इसकी रोकथाम के लिए अधिकारियों ने बार्डर पर पहरा सख्त कर दिया है। वाहनों की चेकिंग के अलावा आतिशबाजी छुड़ाने वालों पर भी कार्रवाई की तैयारी है।
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए लिया निर्णय
जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार बिगड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। आदेशों का पालन कराने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। - मेधा रूपम, डीएम, हापुड़।