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दिव्यांग के हत्यारे को आजीवन कारावास की सजा
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दिव्यांग के हत्यारे को आजीवन कारावास की सजा
हापुड़। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट ने एक दिव्यांग की हत्या के मामले में सोमवार को निर्णय सुनाया। जिसमें न्यायाधीश बृजेंद्र मणि त्रिपाठी ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर बीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्णकांत गुप्ता और वादी के निजी अधिवक्ता गजेंद्र पाल चौहान ने बताया कि दस अप्रैल 2019 को गांव नंगौला माजरा हैदरनगर निवासी प्रेम सिंह ने नगर कोतवाली में एक तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि 9 अप्रैल 2019 की शाम करीब सात बजे गांव का ही सोरन सिंह पुत्र गुरुबक्श भाई टुक्कीराम को घर बुलाकर अपने साथ ले गया। रात करीब दस बजे तक जब उनका भाई घर वापस नहीं आया तो परिजनों ने उसकी तलाश की। भाई के नहीं मिलने पर वह अन्य परिजनों के साथ सोरन सिंह के घर पहुंचे। जहां पर सोरन सिंह भी नहीं मिला। रात भर खोजने के बाद भी उनका भाई टुक्कीराम नहीं मिला। जिसके बाद वह और अन्य परिजन 10 अप्रैल 2019 की सुबह टुक्कीराम की तलाश कर रहे थे। तभी गांव के ही अमर सिंह ने बताया कि कल रात टुक्कीराम को ट्राई साइकिल पर सवार होकर सोरन सिंह के साथ गांव सरावा अड्डे की तरफ जाते हुए देखा था। जब हम टुक्कीराम की तलाश करते हुए सरावा के जंगल में पहुंचे तो ईख के खेत में टुक्कीराम का शव पड़ा हुआ मिला। जिसके सिर पर किसी धारदार हथियार से कई वार किए गए थे।
रुपये वापस मांगने पर हत्या का लगाया था आरोप
वादी प्रेम सिंह का कहना था कि सोरन सिंह पर भाई टुक्कीराम के करीब अस्सी हजार रुपये थे। जिसके वापस मांगने पर ही सोरन सिंह ने भाई की हत्या की है। इसलिए आरोपी के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की जाए। वादी प्रेम सिंह की तहरीर पर पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज करते हुए जांच शुरू की। मामले की विवेचना कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक महावीर चौहान के द्वारा की गई। विवेचक द्वारा साक्ष्य एकत्र कर अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए। जिसके बाद से मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट में चल रही थी। उन्होंने मामले की मजबूत पैरवी करते हुए दस गवाह न्यायालय में पेश किए। साथ ही विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा प्रमाणित किया गया हत्या में प्रयुक्त हुआ हथियार व अन्य साक्ष्य भी न्यायालय में पेश किए। उनकी मजबूत पैरवी के कारण आरोपी को गिरफ्तारी के बाद से जमानत नहीं मिली। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश बृजेंद्र मणि त्रिपाठी ने आरोपी सोरन सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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हापुड़। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट ने एक दिव्यांग की हत्या के मामले में सोमवार को निर्णय सुनाया। जिसमें न्यायाधीश बृजेंद्र मणि त्रिपाठी ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर बीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्णकांत गुप्ता और वादी के निजी अधिवक्ता गजेंद्र पाल चौहान ने बताया कि दस अप्रैल 2019 को गांव नंगौला माजरा हैदरनगर निवासी प्रेम सिंह ने नगर कोतवाली में एक तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि 9 अप्रैल 2019 की शाम करीब सात बजे गांव का ही सोरन सिंह पुत्र गुरुबक्श भाई टुक्कीराम को घर बुलाकर अपने साथ ले गया। रात करीब दस बजे तक जब उनका भाई घर वापस नहीं आया तो परिजनों ने उसकी तलाश की। भाई के नहीं मिलने पर वह अन्य परिजनों के साथ सोरन सिंह के घर पहुंचे। जहां पर सोरन सिंह भी नहीं मिला। रात भर खोजने के बाद भी उनका भाई टुक्कीराम नहीं मिला। जिसके बाद वह और अन्य परिजन 10 अप्रैल 2019 की सुबह टुक्कीराम की तलाश कर रहे थे। तभी गांव के ही अमर सिंह ने बताया कि कल रात टुक्कीराम को ट्राई साइकिल पर सवार होकर सोरन सिंह के साथ गांव सरावा अड्डे की तरफ जाते हुए देखा था। जब हम टुक्कीराम की तलाश करते हुए सरावा के जंगल में पहुंचे तो ईख के खेत में टुक्कीराम का शव पड़ा हुआ मिला। जिसके सिर पर किसी धारदार हथियार से कई वार किए गए थे।
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रुपये वापस मांगने पर हत्या का लगाया था आरोप
वादी प्रेम सिंह का कहना था कि सोरन सिंह पर भाई टुक्कीराम के करीब अस्सी हजार रुपये थे। जिसके वापस मांगने पर ही सोरन सिंह ने भाई की हत्या की है। इसलिए आरोपी के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की जाए। वादी प्रेम सिंह की तहरीर पर पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज करते हुए जांच शुरू की। मामले की विवेचना कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक महावीर चौहान के द्वारा की गई। विवेचक द्वारा साक्ष्य एकत्र कर अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए। जिसके बाद से मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट में चल रही थी। उन्होंने मामले की मजबूत पैरवी करते हुए दस गवाह न्यायालय में पेश किए। साथ ही विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा प्रमाणित किया गया हत्या में प्रयुक्त हुआ हथियार व अन्य साक्ष्य भी न्यायालय में पेश किए। उनकी मजबूत पैरवी के कारण आरोपी को गिरफ्तारी के बाद से जमानत नहीं मिली। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश बृजेंद्र मणि त्रिपाठी ने आरोपी सोरन सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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