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दुष्कर्म के दोषी को सात वर्ष का कारावास
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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सात वर्ष का कारावास
हापुड। अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सात वर्ष की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 27 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र त्यागी ने बताया कि थाना देहात में एक गांव निवासी एक व्यक्ति ने 24 नवंबर 2016 को शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि गांव असौड़ा निवासी मुस्तकीम उसकी नाबालिग पुत्री को बहला फुसलाकर ले गया है। पुलिस ने मामले में जांच करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर किशोरी को बरामद किया था। नाबालिग के बयानों के आधार पर पुलिस ने आरोपी पर अपहरण कर दुष्कर्म के मामले की चार्जशीट अदालत में पेश की थी। तभी से यह मामला अपर जिला जज, विशेष न्यायधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत में चल रहा था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद बुधवार को न्यायधीश श्वेता दीक्षित ने मामले में फैसला सुनाया। जिसमें आरोपी को दोषी करार दिया। अर्थदंड न देने पर दोषी को दो साल सात महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने पीड़िता के पुर्नवास के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा एक लाख रुपये की राहत राशि देने के भी आदेश दिए। प्राधिकरण के पास धनराशि ना होने पर जिला अधिकारी एक माह के अंदर उक्त राहत राशि पीड़िता को देने के भी आदेश किए।
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हापुड। अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सात वर्ष की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 27 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र त्यागी ने बताया कि थाना देहात में एक गांव निवासी एक व्यक्ति ने 24 नवंबर 2016 को शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि गांव असौड़ा निवासी मुस्तकीम उसकी नाबालिग पुत्री को बहला फुसलाकर ले गया है। पुलिस ने मामले में जांच करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर किशोरी को बरामद किया था। नाबालिग के बयानों के आधार पर पुलिस ने आरोपी पर अपहरण कर दुष्कर्म के मामले की चार्जशीट अदालत में पेश की थी। तभी से यह मामला अपर जिला जज, विशेष न्यायधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत में चल रहा था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद बुधवार को न्यायधीश श्वेता दीक्षित ने मामले में फैसला सुनाया। जिसमें आरोपी को दोषी करार दिया। अर्थदंड न देने पर दोषी को दो साल सात महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने पीड़िता के पुर्नवास के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा एक लाख रुपये की राहत राशि देने के भी आदेश दिए। प्राधिकरण के पास धनराशि ना होने पर जिला अधिकारी एक माह के अंदर उक्त राहत राशि पीड़िता को देने के भी आदेश किए।
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