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दो साल में तीन गुना बढ़े दाम, अखबार की रद्दी 27 रुपये किलो
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दो साल में तीन गुना बढ़े दाम, अखबार की रद्दी 27 रुपये किलो
हापुड़। बढ़ती महंगाई से जहां घरों का बजट बिगड़ा है, वहीं कुछ राहत भरी खबर भी है। आपके घरों में रखा कबाड़ अब आपको के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। इसे बिल्कुल भी बेकार न समझो। आपके स्टोर रुम में पड़े कबाड़ के दाम पिछले दो साल से तीन गुना तक बढ़ गए हैं। अखबार की रद्दी अब 27 रुपये किलो हो चुकी है और इसकी डिमांड भी दूसरे कबाड़ से अधिक है। अखबार के दाम दो साल में आठ रुपये से 27 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। जबकि लोहे का कबाड़ अब 42 रुपए किलो तक बिक रहा है।
अक्सर घरों में प्रयोग होने वाली अखबार की रद्दी को हम व्यर्थ समझने लगते हैं और ऐसे ही कबाड़ में फेंक देते हैं। इसके अलावा घरों में प्रयोग होने वाले उपकरणों के टूट फूट जाने पर यह कबाड़ में रख दिए जाते हैं। ज्यादातर लोगों के घरों में जो स्टोर रूम होते हैं उनमें यह कबाड़ रख दिया जाता है। कई बार कबाड़ी वाले आते हैं तो कम दामों पर दे दिया जाता है। लेकिन अब यह कबाड़ बेकार नहीं और लोगों को इसके मुंह मांगे दाम मिल रहे हैं।
कबाड़ियों की बढ़ी संख्या
रद्दी और अधिकतर हर प्रकार के कबाड़ की कीमतों में आए उछाल के बाद शहर में कबाड़ बीनने वालों और रद्दी खरीदने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। कबाड़ बीनने वालों ने बताया कि अभी तक दिन में बमुश्किल 50 रुपये कमा पाते थे, लेकिन अब दो सौ रुपये तक की बोतल, रद्दी एकत्र हो जाती है।
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कबाड़ बीनने वालों ने बताया कि पहले जब वह कबाड़ लेकर बड़ी दुकानों पर जाते थे वहां बहुत कम रुपये मिलते थे। लेकिन इन दिनों ठीक रेट मिल रहा है। रद्दी के अलावा लोहा, शीशा, प्लास्टिक, गत्ते के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है।
पिछले दो वर्षों में प्रति किलो बढ़े रेट
कबाड़ पहले अब
पुराना अखबार 8 27
लोहा 30 45
गत्ता 12 19
प्लास्टिक 18 25
शीशा 2 5
टीन 15 18
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हापुड़। बढ़ती महंगाई से जहां घरों का बजट बिगड़ा है, वहीं कुछ राहत भरी खबर भी है। आपके घरों में रखा कबाड़ अब आपको के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। इसे बिल्कुल भी बेकार न समझो। आपके स्टोर रुम में पड़े कबाड़ के दाम पिछले दो साल से तीन गुना तक बढ़ गए हैं। अखबार की रद्दी अब 27 रुपये किलो हो चुकी है और इसकी डिमांड भी दूसरे कबाड़ से अधिक है। अखबार के दाम दो साल में आठ रुपये से 27 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। जबकि लोहे का कबाड़ अब 42 रुपए किलो तक बिक रहा है।
अक्सर घरों में प्रयोग होने वाली अखबार की रद्दी को हम व्यर्थ समझने लगते हैं और ऐसे ही कबाड़ में फेंक देते हैं। इसके अलावा घरों में प्रयोग होने वाले उपकरणों के टूट फूट जाने पर यह कबाड़ में रख दिए जाते हैं। ज्यादातर लोगों के घरों में जो स्टोर रूम होते हैं उनमें यह कबाड़ रख दिया जाता है। कई बार कबाड़ी वाले आते हैं तो कम दामों पर दे दिया जाता है। लेकिन अब यह कबाड़ बेकार नहीं और लोगों को इसके मुंह मांगे दाम मिल रहे हैं।
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कबाड़ियों की बढ़ी संख्या
रद्दी और अधिकतर हर प्रकार के कबाड़ की कीमतों में आए उछाल के बाद शहर में कबाड़ बीनने वालों और रद्दी खरीदने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। कबाड़ बीनने वालों ने बताया कि अभी तक दिन में बमुश्किल 50 रुपये कमा पाते थे, लेकिन अब दो सौ रुपये तक की बोतल, रद्दी एकत्र हो जाती है।
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कबाड़ बीनने वालों ने बताया कि पहले जब वह कबाड़ लेकर बड़ी दुकानों पर जाते थे वहां बहुत कम रुपये मिलते थे। लेकिन इन दिनों ठीक रेट मिल रहा है। रद्दी के अलावा लोहा, शीशा, प्लास्टिक, गत्ते के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है।
पिछले दो वर्षों में प्रति किलो बढ़े रेट
कबाड़ पहले अब
पुराना अखबार 8 27
लोहा 30 45
गत्ता 12 19
प्लास्टिक 18 25
शीशा 2 5
टीन 15 18