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दस साल में आठ मीटर गिरा जिले का भूगर्भ जलस्तर
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दस साल में आठ मीटर गिरा जिले का जलस्तर
हापुड़। भूगर्भ से शुद्ध पेयजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, हापुड़ जिले का जलस्तर महज दस साल में आठ मीटर तक खिसक गया है। भूगर्भ विभाग ने जिले के तीन ब्लॉकों को डार्क जोन घोषित किया है। तीनों ही ब्लॉक अत्यधिक जल दोहन की श्रेणी में हैं, सिर्फ धौलाना ही इस श्रेणी से बाहर रखा गया है। जिला प्रशासन भले ही तालाबों के संरक्षण से इस संकट को खत्म करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन लोग जब तक जल संचयन के प्रति जागरूक नहीं होंगे स्थिति में सुधार आना मुश्किल है।
वर्ष 2016 में भूगर्भ विभाग ने जिले के चारों ब्लॉकों का सर्वे किया था, इसमें जलस्तर तेजी से गिरता पाया गया। गढ़, सिंभावली और हापुड़ ब्लॉक में हालत सबसे खराब दिखी तो इस क्षेत्र को डार्क जोन घोषित कर दिया गया। नए नलकूप कनेक्शन पर रोक लगा दी गई, जो वर्ष 2020 में फिर से खोली गई।
वर्ष 2019 में भूगर्भ अधिनियम जारी हुआ, इसमें बिना अनुमति के घर या किसी अन्य स्थान पर सबमर्सिबल लगाने के लिए लघु सिंचाई विभाग से अनुमति लेने के आदेश हुए। अनुमति नहीं लेने पर बोरिंग रद्द करने का भी आदेश था।
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लेकिन गांव, गली के हर घर में बिना अनुमति सबमर्सिबल हैं, जिनके जरिए अंधाधुंध शुद्ध पेयजल बर्बाद किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा खेतों में तालाब पर अनुदान भी मुहैया कराया जा रहा है।
डार्क जोन श्रेणी से बाहर है धौलाना
जिले के चार ब्लॉक में हापुड़, सिंभावली और गढ़ डार्क जोन में हैं, इनमें सबसे अधिक जलस्तर सिंभावली ब्लॉक का गिरा है। जबकि धौलाना ब्लॉक ही इस संकट से बचा है, यहां जल का स्तर 8.22 मीटर तक है।
जल संचयन नहीं होना बड़ा खतरा
गांवों में तालाब सिमट जाने के कारण बारिश के पानी का संचयन नहीं हो पा रहा। यह पानी इधर उधर फैलकर ही बर्बाद हो जाता है। जिसके चलते भूगर्भ जल के स्तर पर कोई असर नहीं पड़ रहा।
भूगर्भ जलस्तर को प्रभावित करने वाले कारक
* घरों में लगे सबमर्सिबल से जल दोहन।
* धुलाई केंद्रों पर वाहनों की धुलाई में जल दोहन।
* अत्यधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के लिए नलकूपों द्वारा जल दोहन।
* शहर, देहात में सिमटते तालाब और अतिक्रमण।
* बारिश के पानी का संचयन न होना।
जिले के चारों ब्लॉकों में भूगर्भ जल का स्तर-
ब्लॉक वर्तमान जलस्तर दस साल पहले
सिंभावली 16.10 मीटर 8.12 मीटर
हापुड़ 14.08 मीटर 7.10 मीटर
गढ़मुक्तेश्वर 12.87 मीटर 6.55 मीटर
धौलाना 8.22 मीटर। 5.32 मीटर
(नोट: धौलाना ब्लॉक ही डार्क जोन से बाहर है।)
बिना अनुमति बोरिंग से जल दोहन पर कार्रवाई
बिना अनुमति के बोरिंग कर भूगर्भ जल का दोहन करना गलत है। यह बोरिंग अध्यादेश का उल्लंघन है। अभियान चलाकर जल दोहन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।--शेर सिंह, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विभाग।
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हापुड़। भूगर्भ से शुद्ध पेयजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, हापुड़ जिले का जलस्तर महज दस साल में आठ मीटर तक खिसक गया है। भूगर्भ विभाग ने जिले के तीन ब्लॉकों को डार्क जोन घोषित किया है। तीनों ही ब्लॉक अत्यधिक जल दोहन की श्रेणी में हैं, सिर्फ धौलाना ही इस श्रेणी से बाहर रखा गया है। जिला प्रशासन भले ही तालाबों के संरक्षण से इस संकट को खत्म करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन लोग जब तक जल संचयन के प्रति जागरूक नहीं होंगे स्थिति में सुधार आना मुश्किल है।
वर्ष 2016 में भूगर्भ विभाग ने जिले के चारों ब्लॉकों का सर्वे किया था, इसमें जलस्तर तेजी से गिरता पाया गया। गढ़, सिंभावली और हापुड़ ब्लॉक में हालत सबसे खराब दिखी तो इस क्षेत्र को डार्क जोन घोषित कर दिया गया। नए नलकूप कनेक्शन पर रोक लगा दी गई, जो वर्ष 2020 में फिर से खोली गई।
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वर्ष 2019 में भूगर्भ अधिनियम जारी हुआ, इसमें बिना अनुमति के घर या किसी अन्य स्थान पर सबमर्सिबल लगाने के लिए लघु सिंचाई विभाग से अनुमति लेने के आदेश हुए। अनुमति नहीं लेने पर बोरिंग रद्द करने का भी आदेश था।
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लेकिन गांव, गली के हर घर में बिना अनुमति सबमर्सिबल हैं, जिनके जरिए अंधाधुंध शुद्ध पेयजल बर्बाद किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा खेतों में तालाब पर अनुदान भी मुहैया कराया जा रहा है।
डार्क जोन श्रेणी से बाहर है धौलाना
जिले के चार ब्लॉक में हापुड़, सिंभावली और गढ़ डार्क जोन में हैं, इनमें सबसे अधिक जलस्तर सिंभावली ब्लॉक का गिरा है। जबकि धौलाना ब्लॉक ही इस संकट से बचा है, यहां जल का स्तर 8.22 मीटर तक है।
जल संचयन नहीं होना बड़ा खतरा
गांवों में तालाब सिमट जाने के कारण बारिश के पानी का संचयन नहीं हो पा रहा। यह पानी इधर उधर फैलकर ही बर्बाद हो जाता है। जिसके चलते भूगर्भ जल के स्तर पर कोई असर नहीं पड़ रहा।
भूगर्भ जलस्तर को प्रभावित करने वाले कारक
* घरों में लगे सबमर्सिबल से जल दोहन।
* धुलाई केंद्रों पर वाहनों की धुलाई में जल दोहन।
* अत्यधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के लिए नलकूपों द्वारा जल दोहन।
* शहर, देहात में सिमटते तालाब और अतिक्रमण।
* बारिश के पानी का संचयन न होना।
जिले के चारों ब्लॉकों में भूगर्भ जल का स्तर-
ब्लॉक वर्तमान जलस्तर दस साल पहले
सिंभावली 16.10 मीटर 8.12 मीटर
हापुड़ 14.08 मीटर 7.10 मीटर
गढ़मुक्तेश्वर 12.87 मीटर 6.55 मीटर
धौलाना 8.22 मीटर। 5.32 मीटर
(नोट: धौलाना ब्लॉक ही डार्क जोन से बाहर है।)
बिना अनुमति बोरिंग से जल दोहन पर कार्रवाई
बिना अनुमति के बोरिंग कर भूगर्भ जल का दोहन करना गलत है। यह बोरिंग अध्यादेश का उल्लंघन है। अभियान चलाकर जल दोहन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।--शेर सिंह, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विभाग।