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गढ़ में अभी तक जीत की मंजिल तक नहीं पहुंचा हाथी
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गढ़ में अभी तक जीत की मंजिल तक नहीं पहुंचा हाथी
हापुड़।विधानसभा चुनाव में इस बार बसपा ने जिले की तीनों सीटों पर काफी मंथन के बाद प्रत्याशियों को टिकट दिया है। गढ़ सीट से तीन बार विधायक रहे मदन चौहान चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि हापुड़ में दो बार के विधायक धर्मपाल के पुत्र मनीष सिंह को टिकट दिया गया है। धौलाना से वासिद प्रधान मैदान में हैं। फिलहाल तीनों ही सीटों पर बसपा मजबूत स्थिति में है लेकिन स्थिति चुनौती पूर्ण है। गढ़ में अभी तक बसपा का खाता भी नहीं खुला है और हापुड़ में मुख्य पार्टियों से बसपा पीछे है।
हापुड़ सीट की बात करें तो यहां पहले नंबर पर कांग्रेस, दूसरे पर भाजपा और तीसरे नंबर पर बसपा की स्थिति रही है। धौलाना में बसपा ने एक बार जीत हासिल की है। इस बार तीनों ही सीटों पर विधायक रह चुके दिग्गज मैदान में हैं। ऐसे में तीनों ही सीटों पर घमासान होता दिख रहा है। बसपा के लिए इस बार दलित वोट बैंक को साधकर रखना चुनौती है क्योंकि आसपा ने भी अपना प्रत्याशी उतारा है। वहीं दूसरे दलों की नजर भी इसी वोट बैंक पर है।
जिले की गढ़मुक्तेश्वर विधान सभा सीट पर कांग्रेस, भाजपा व सपा का अधिक दबदबा रहा है। निर्दलीय प्रत्याशी भी यहां अपनी जीत का परचम लहरा चुके हैं, लेकिन बसपा का खाता अभी तक नहीं खुला है। हालांकि सपा से टिकट नहीं मिलने से दल बदलकर चुनाव लड़ रहे पूर्व विधायक मदन चौहान यहां से तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। लेकिन पिछले चुनाव में वे तीसरे नंबर पर रहे थे। इस बार देखना होगा कि उनके आने से बसपा का खाता खोलेगा या अपनों की बेरुखी करने पर पार्टी का वोट बैंक उन्हें नकार देगा।
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हापुड़ सीट पर जहां सभी प्रत्याशी इसी जाति वर्ग से लड़ रहे हैं, ऐसे में यहां दलित वोट बैंक किसके खाते में जाएगा यह कहना मुश्किल होगा। इसी सीट पर कांग्रेस के गजराज सिंह और विजयपाल आढ़ती की दलित वोट बैंक में अच्छी पैठ है। हालांकि बसपा के मनीष सिंह को अपने पिता की विरासत का भी सियासी फायदा मिल रहा है। युवा होने का फायदा भी मिल सकता है। नगर पालिका के चुनाव में बसपा से टिकट न मिलने पर वो निदर्लीय चुनाव लड़े थे। उसमें भाजपा के प्रत्याशी से कुछ ही वोटों से हारे थे। वहीं धौलाना में पिछली बार के विधायक रहे असलम चौधरी इस बार सपा से मैदान में हैं। उनके जाने के बाद बसपा ने वासिद प्रधान को टिकट दिया है। पूर्व विधायक के समक्ष उनके वोट बैंक में सेंध मारना वासिद के लिए आसान नहीं होगा। दूसरी ओर भाजपा से धर्मेश तोमर भी यहां से जीत चुके हैं।
हापुड़ विधानसभा सीट पर मिली बसपा के प्रत्याशियों को जीत
वर्ष विधायक
2002 धर्मपाल सिंह
2007 धर्मपाल सिंह
---
धौलाना विधानसभा सीट -
वर्ष विधायक
2017 असलम चौधरी
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हापुड़।विधानसभा चुनाव में इस बार बसपा ने जिले की तीनों सीटों पर काफी मंथन के बाद प्रत्याशियों को टिकट दिया है। गढ़ सीट से तीन बार विधायक रहे मदन चौहान चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि हापुड़ में दो बार के विधायक धर्मपाल के पुत्र मनीष सिंह को टिकट दिया गया है। धौलाना से वासिद प्रधान मैदान में हैं। फिलहाल तीनों ही सीटों पर बसपा मजबूत स्थिति में है लेकिन स्थिति चुनौती पूर्ण है। गढ़ में अभी तक बसपा का खाता भी नहीं खुला है और हापुड़ में मुख्य पार्टियों से बसपा पीछे है।
हापुड़ सीट की बात करें तो यहां पहले नंबर पर कांग्रेस, दूसरे पर भाजपा और तीसरे नंबर पर बसपा की स्थिति रही है। धौलाना में बसपा ने एक बार जीत हासिल की है। इस बार तीनों ही सीटों पर विधायक रह चुके दिग्गज मैदान में हैं। ऐसे में तीनों ही सीटों पर घमासान होता दिख रहा है। बसपा के लिए इस बार दलित वोट बैंक को साधकर रखना चुनौती है क्योंकि आसपा ने भी अपना प्रत्याशी उतारा है। वहीं दूसरे दलों की नजर भी इसी वोट बैंक पर है।
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जिले की गढ़मुक्तेश्वर विधान सभा सीट पर कांग्रेस, भाजपा व सपा का अधिक दबदबा रहा है। निर्दलीय प्रत्याशी भी यहां अपनी जीत का परचम लहरा चुके हैं, लेकिन बसपा का खाता अभी तक नहीं खुला है। हालांकि सपा से टिकट नहीं मिलने से दल बदलकर चुनाव लड़ रहे पूर्व विधायक मदन चौहान यहां से तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। लेकिन पिछले चुनाव में वे तीसरे नंबर पर रहे थे। इस बार देखना होगा कि उनके आने से बसपा का खाता खोलेगा या अपनों की बेरुखी करने पर पार्टी का वोट बैंक उन्हें नकार देगा।
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हापुड़ सीट पर जहां सभी प्रत्याशी इसी जाति वर्ग से लड़ रहे हैं, ऐसे में यहां दलित वोट बैंक किसके खाते में जाएगा यह कहना मुश्किल होगा। इसी सीट पर कांग्रेस के गजराज सिंह और विजयपाल आढ़ती की दलित वोट बैंक में अच्छी पैठ है। हालांकि बसपा के मनीष सिंह को अपने पिता की विरासत का भी सियासी फायदा मिल रहा है। युवा होने का फायदा भी मिल सकता है। नगर पालिका के चुनाव में बसपा से टिकट न मिलने पर वो निदर्लीय चुनाव लड़े थे। उसमें भाजपा के प्रत्याशी से कुछ ही वोटों से हारे थे। वहीं धौलाना में पिछली बार के विधायक रहे असलम चौधरी इस बार सपा से मैदान में हैं। उनके जाने के बाद बसपा ने वासिद प्रधान को टिकट दिया है। पूर्व विधायक के समक्ष उनके वोट बैंक में सेंध मारना वासिद के लिए आसान नहीं होगा। दूसरी ओर भाजपा से धर्मेश तोमर भी यहां से जीत चुके हैं।
हापुड़ विधानसभा सीट पर मिली बसपा के प्रत्याशियों को जीत
वर्ष विधायक
2002 धर्मपाल सिंह
2007 धर्मपाल सिंह
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धौलाना विधानसभा सीट -
वर्ष विधायक
2017 असलम चौधरी