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सुबह-शाम की हवा कर रही बीमार
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सुबह-शाम की हवा कर रही बीमार
हापुड़। सुबह शाम टहलना सेहत के लिए लाभदायक होता है, लेकिन यह हवा लोगों को बीमार करने लगी है। सुबह और शाम की हवा में प्रदूषण की मात्रा अत्यधिक पाई गई है। हापुड़ में एक्यूआई साढ़े तीन सौ के आसपास बना हुआ है। सोमवार सुबह भी एक्यूआई 346 दर्ज किया गया।
दीपावली के बाद से जिले की आबोहवा खराब है। कुछ दिन राहत के बाद अब पिछले तीन दिनों से लगातार प्रदूषण का स्तर खतरनाक बना हुआ है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से पूर्व में नियमों को तोड़ने पर कुछ जुर्माना जरूर किया गया। लेकिन अब न तो प्रशासन और न ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से कार्य हो रहा है।
नहीं हो रहा छिड़काव, सड़कों पर उड़ रही धूल
नगर पालिका हापुड़ क्षेत्र में सैकड़ों भवनों का निर्माण चल रहा है, यहां किसी प्रकार की निगरानी नहीं है। खुले में निर्माण सामग्री पड़ी हुई है और सुबह से ही इसका उठान शुरू हो जाता है। सड़कों पर धूल उड़ाते हुए वाहन दौड़ रहे हैं। नगर पालिकाओं द्वारा किसी प्रकार का छिड़काव नहीं हो रहा है।
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सुबह शाम की गुणवत्ता सबसे खराब
-सुबह शाम की हवा की गुणवत्ता दिन भर की हवा से अधिक खराब है। इसका मुख्य कारण सुबह शाम के समय में कोहरे और धुंध की दस्तक हो चुकी है। इसी के कारण सुबह शाम में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। - सलमान राणा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्टेशन इंचार्ज।
सुबह शाम टहलने वाले हो रहे बीमार
बढ़ते प्रदूषण ने रोगियों की संख्या बढ़ा दी है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक में ऐसे मरीज काफी संख्या में हर रोज पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक मरीज चेस्ट विभाग की ओपीडी में आ रहे हैं। ये वे लोग हैं जो सुबह शाम की सैर को नहीं छोड़ पा रहे हैं। करीब 30 प्रतिशत मरीजों को सांस फूलने की शिकायत है। इसके अलावा क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के मरीजों की भी संख्या बढ़ गई है। डॉक्टरों की सलाह है कि सांस, टीबी और दमा के मरीज इस मौसम में सुबह-शाम घर से बाहर बिल्कुल भी न निकलें।
डा. जीवोत्तम नारंग ने बताया कि ठंड का असर अब सांस के मरीजों पर दिखने लगा है। 30 प्रतिशत मरीज सांस फूलने की शिकायत के साथ आ रहे हैं, जबकि अन्य मरीजों में सीओपीडी और दमा के मरीज शामिल हैं। इसके अलावा तीन से चार प्रतिशत मरीज इमरजेंसी में सांस फूलने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इन मरीजों को ठंड के मौसम में इन्हेलर की सलाह दी जा रही है।
35 प्रतिशत मरीजों में बीपी की शिकायत
सांस के मरीजों के साथ ही बीपी (ब्लड प्रेशर) के मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। करीब 35 प्रतिशत मरीज बीपी से पीड़ित हैं, जो इलाज के लिए ओपीडी में पहुंच रहे हैं। ठंड में बीपी बढ़ने का कारण लोगों का ब्लड प्रेशर ऊपर-नीचे होना होता है, क्योंकि ब्लड सप्लाई के लिए हार्ट पर ज्यादा दबाव पड़ता है।
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हापुड़। सुबह शाम टहलना सेहत के लिए लाभदायक होता है, लेकिन यह हवा लोगों को बीमार करने लगी है। सुबह और शाम की हवा में प्रदूषण की मात्रा अत्यधिक पाई गई है। हापुड़ में एक्यूआई साढ़े तीन सौ के आसपास बना हुआ है। सोमवार सुबह भी एक्यूआई 346 दर्ज किया गया।
दीपावली के बाद से जिले की आबोहवा खराब है। कुछ दिन राहत के बाद अब पिछले तीन दिनों से लगातार प्रदूषण का स्तर खतरनाक बना हुआ है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से पूर्व में नियमों को तोड़ने पर कुछ जुर्माना जरूर किया गया। लेकिन अब न तो प्रशासन और न ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से कार्य हो रहा है।
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नहीं हो रहा छिड़काव, सड़कों पर उड़ रही धूल
नगर पालिका हापुड़ क्षेत्र में सैकड़ों भवनों का निर्माण चल रहा है, यहां किसी प्रकार की निगरानी नहीं है। खुले में निर्माण सामग्री पड़ी हुई है और सुबह से ही इसका उठान शुरू हो जाता है। सड़कों पर धूल उड़ाते हुए वाहन दौड़ रहे हैं। नगर पालिकाओं द्वारा किसी प्रकार का छिड़काव नहीं हो रहा है।
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सुबह शाम की गुणवत्ता सबसे खराब
-सुबह शाम की हवा की गुणवत्ता दिन भर की हवा से अधिक खराब है। इसका मुख्य कारण सुबह शाम के समय में कोहरे और धुंध की दस्तक हो चुकी है। इसी के कारण सुबह शाम में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। - सलमान राणा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्टेशन इंचार्ज।
सुबह शाम टहलने वाले हो रहे बीमार
बढ़ते प्रदूषण ने रोगियों की संख्या बढ़ा दी है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक में ऐसे मरीज काफी संख्या में हर रोज पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक मरीज चेस्ट विभाग की ओपीडी में आ रहे हैं। ये वे लोग हैं जो सुबह शाम की सैर को नहीं छोड़ पा रहे हैं। करीब 30 प्रतिशत मरीजों को सांस फूलने की शिकायत है। इसके अलावा क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के मरीजों की भी संख्या बढ़ गई है। डॉक्टरों की सलाह है कि सांस, टीबी और दमा के मरीज इस मौसम में सुबह-शाम घर से बाहर बिल्कुल भी न निकलें।
डा. जीवोत्तम नारंग ने बताया कि ठंड का असर अब सांस के मरीजों पर दिखने लगा है। 30 प्रतिशत मरीज सांस फूलने की शिकायत के साथ आ रहे हैं, जबकि अन्य मरीजों में सीओपीडी और दमा के मरीज शामिल हैं। इसके अलावा तीन से चार प्रतिशत मरीज इमरजेंसी में सांस फूलने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इन मरीजों को ठंड के मौसम में इन्हेलर की सलाह दी जा रही है।
35 प्रतिशत मरीजों में बीपी की शिकायत
सांस के मरीजों के साथ ही बीपी (ब्लड प्रेशर) के मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। करीब 35 प्रतिशत मरीज बीपी से पीड़ित हैं, जो इलाज के लिए ओपीडी में पहुंच रहे हैं। ठंड में बीपी बढ़ने का कारण लोगों का ब्लड प्रेशर ऊपर-नीचे होना होता है, क्योंकि ब्लड सप्लाई के लिए हार्ट पर ज्यादा दबाव पड़ता है।