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मशरूम की खेती से महिलाएं होंगी समृद्ध
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मशरूम की खेती से महिलाएं होंगी समृृद्ध
हापुड़। मशरूम की खेती से जिले में समूह की महिलाएं समृद्ध होंगी। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने उन्हें मशरूम उगाने का प्रशिक्षण दिया है। मशरूम की खेती के लिए महिलाओं ने भूमि भी लीज पर ली है और उन्हें मिड डे मील के लिए चार क्विंटल मशरूम बेचने का आर्डर भी मिल गया है।
एनआरएलएम की ओर से हापुड़ के तीन ब्लॉक हापुड़, सिंभावली और धौलाना में मशरूम उगाने के लिए 90 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें तीस-तीस महिलाओं को ग्रुपों में शामिल किया गया है। गांव रघुनाथपुर निवासी रूबी एक टीम को लीड कर रही हैं। एफपीओ पर महिलाओं को रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। इसके बाद महिलाएं कहीं भी मशरूम बेचने के लिए अधिकृत होंगी। तीनों ही ग्रुपों ने खेती के भूमि लीज पर ली है और तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रत्येक ग्रुप शुरूआत में 90 से 100 बैग में खेती करेगा। खेती के लिए महिलाओं में खासा उत्साह है।
महिलाओं को दी जाएगी हर संभव मदद
महिलाओं को इस कार्य में बढ़ावा देने के लिए उन्हें हर संभव मदद दी जाएगी। विशेषज्ञों द्वारा समय समय पर निरीक्षण कर उन्हें सलाह दी जाएगी, उत्पादन से लेकर बिक्री तक अधिकारियों की देखरेख में पूरा कार्य होगा। - उदय सिंह, सीडीओ, हापुड़।
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तीन से चार माह होगी खेती-
मशरूम की खेती हॉल, झोंपड़ियों में होती है, इसके लिए बैग तैयार किए जाते हैं, नवंबर माह में इसका सीजन शुरू हो जाता है। थोड़ी सी रखरखाव और देखभाल के बाद मशरूम लोगों को अच्छा मुनाफा देकर जाती है। एक माह में उत्पादन शुरू हो जाता है। सर्दियों में तीन से चार माह में इसकी फसल होती है। कोरोना काल के बाद इसकी डिमांड भी बढ़ी है। होटलों और रेस्टोरेंट के अलावा अब घरों में मशरूम की सब्जी का प्रयोग निरंतर रूप से हो रहा है।
मशरूम खाकर तंदरुस्त होंगे बच्चे
मशरूम की खेती से जहां समूह की महिलाएं समृद्ध होंगी, वहीं इसके मिड डे मील में प्रयोग से परिषदीय स्कूलों के बच्चे भी समृद्ध होंगे। बेसिक शिक्षा विभाग की सप्ताह में एक दिन मशरूम की मेन्यू में शामिल करने की योजना है। ऐसे में प्रोटीन युक्त पौष्टिक भोजन खाकर बच्चे तंदरुस्त होंगे।
आर्डर की कमी नहीं, उत्पादन की होगी चुनौती -
इन महिलाओं द्वारा दस दिन बाद मशरूम का उत्पादन शुरू किया जाएगा। किसी भी कार्य में सबसे बड़ी चुनौती बाजार की होती है, लेकिन मशरूम के मामले में सबसे बड़ी बात है कि विभाग के पास आर्डर की कमी नहीं है, ऐसे में महिलाएं जितनी भी मशरूम का उत्पादन करती हैं, वह तुरंत ही खरीद लिया जाएगा।
बेहतर होगी आर्थिक स्थिति
पहले भी मशरूम की खेती कर चुकी हैं, इसमें लाभ मिला है। अब गांव की 30 से अधिक महिलाएं इस खेती के लिए सामने आई हैं। उम्मीद है कि इन सर्दियों में आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।-रूबी तोमर।-फोटो-13
मशरूम की खेती करने की इच्छा
मैं पहले दूसरी सब्जियों की खेती करती थी। अब समूह से जुड़कर मशरूम की खेती करने की इच्छा है। उम्मीद है कि यह अनुभव अच्छा होगा, विभाग की ओर से पूरी मदद मिल रही है।-संगीता चौहान।-फोटो-14
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हापुड़। मशरूम की खेती से जिले में समूह की महिलाएं समृद्ध होंगी। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने उन्हें मशरूम उगाने का प्रशिक्षण दिया है। मशरूम की खेती के लिए महिलाओं ने भूमि भी लीज पर ली है और उन्हें मिड डे मील के लिए चार क्विंटल मशरूम बेचने का आर्डर भी मिल गया है।
एनआरएलएम की ओर से हापुड़ के तीन ब्लॉक हापुड़, सिंभावली और धौलाना में मशरूम उगाने के लिए 90 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें तीस-तीस महिलाओं को ग्रुपों में शामिल किया गया है। गांव रघुनाथपुर निवासी रूबी एक टीम को लीड कर रही हैं। एफपीओ पर महिलाओं को रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। इसके बाद महिलाएं कहीं भी मशरूम बेचने के लिए अधिकृत होंगी। तीनों ही ग्रुपों ने खेती के भूमि लीज पर ली है और तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रत्येक ग्रुप शुरूआत में 90 से 100 बैग में खेती करेगा। खेती के लिए महिलाओं में खासा उत्साह है।
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महिलाओं को दी जाएगी हर संभव मदद
महिलाओं को इस कार्य में बढ़ावा देने के लिए उन्हें हर संभव मदद दी जाएगी। विशेषज्ञों द्वारा समय समय पर निरीक्षण कर उन्हें सलाह दी जाएगी, उत्पादन से लेकर बिक्री तक अधिकारियों की देखरेख में पूरा कार्य होगा। - उदय सिंह, सीडीओ, हापुड़।
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तीन से चार माह होगी खेती-
मशरूम की खेती हॉल, झोंपड़ियों में होती है, इसके लिए बैग तैयार किए जाते हैं, नवंबर माह में इसका सीजन शुरू हो जाता है। थोड़ी सी रखरखाव और देखभाल के बाद मशरूम लोगों को अच्छा मुनाफा देकर जाती है। एक माह में उत्पादन शुरू हो जाता है। सर्दियों में तीन से चार माह में इसकी फसल होती है। कोरोना काल के बाद इसकी डिमांड भी बढ़ी है। होटलों और रेस्टोरेंट के अलावा अब घरों में मशरूम की सब्जी का प्रयोग निरंतर रूप से हो रहा है।
मशरूम खाकर तंदरुस्त होंगे बच्चे
मशरूम की खेती से जहां समूह की महिलाएं समृद्ध होंगी, वहीं इसके मिड डे मील में प्रयोग से परिषदीय स्कूलों के बच्चे भी समृद्ध होंगे। बेसिक शिक्षा विभाग की सप्ताह में एक दिन मशरूम की मेन्यू में शामिल करने की योजना है। ऐसे में प्रोटीन युक्त पौष्टिक भोजन खाकर बच्चे तंदरुस्त होंगे।
आर्डर की कमी नहीं, उत्पादन की होगी चुनौती -
इन महिलाओं द्वारा दस दिन बाद मशरूम का उत्पादन शुरू किया जाएगा। किसी भी कार्य में सबसे बड़ी चुनौती बाजार की होती है, लेकिन मशरूम के मामले में सबसे बड़ी बात है कि विभाग के पास आर्डर की कमी नहीं है, ऐसे में महिलाएं जितनी भी मशरूम का उत्पादन करती हैं, वह तुरंत ही खरीद लिया जाएगा।
बेहतर होगी आर्थिक स्थिति
पहले भी मशरूम की खेती कर चुकी हैं, इसमें लाभ मिला है। अब गांव की 30 से अधिक महिलाएं इस खेती के लिए सामने आई हैं। उम्मीद है कि इन सर्दियों में आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।-रूबी तोमर।-फोटो-13
मशरूम की खेती करने की इच्छा
मैं पहले दूसरी सब्जियों की खेती करती थी। अब समूह से जुड़कर मशरूम की खेती करने की इच्छा है। उम्मीद है कि यह अनुभव अच्छा होगा, विभाग की ओर से पूरी मदद मिल रही है।-संगीता चौहान।-फोटो-14