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सांस फूलने पर अस्पताल पहुंचे अस्थमा के 854 मरीज
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गढ़ रोड स्थित सरकारी अस्पताल में ओपीडी के बाहर लगी मरीजों की लाइन संवाद
- फोटो : HAPUR
सांस फूलने पर अस्पताल पहुंचे अस्थमा के 854 मरीज
हापुड़। जहरीली हुई हवा का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ने लगा है। दिवाली के बाद से अस्थमा के 854 मरीज उपचार कराने के लिए अस्पतालों में पहुंचे। मंगलवार को भी हवा बेहद खराब रही। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 437 दर्ज किया गया। यह लगातार पांचवां दिन है जब एक्यूआई 400 के ऊपर है। जिला खतरनाक गैसों का चेंबर बना हुआ है।
वातावरण में छाई धुंध (स्मॉग) से लोगों को नाक में खुजली, गले में खराश, आंखों में जलन की शिकायत हो रही है। सांस और टीबी के रोगियों की हालत बिगड़ रही है। अस्थमा के रोगियों पर तो जैसे कहर टूट पड़ा हो। अचानक से अस्पतालों में मरीजों की भीड़ काफी बढ़ गई है। गढ़ रोड सीएचसी में मंगलवार को 1039 मरीज आए, इनमें 412 मरीज प्रदूषण जनित रोगों से पीड़ित रहे। फिजिशियन डॉ गौरव मित्तल ने बताया कि ओपीडी में आने वाले मरीजों में खांसी की सबसे अधिक समस्या आ रही है। बढ़ते प्रदूषण के कारण यह परेशानी बनी है। जुकाम, खांसी के साथ सीने में जकड़न भी हो रही है। जांच करने पर सांस की नली में सूजन और फेफड़ों में भी परेशानी मिली।
अस्थमा के अटैक का खतरा
अस्थमा के रोगियों को काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। सांस लेने में तकलीफ के साथ ही यदि बेचैनी बढ़े तो यह अस्थमा अटैक की आशंका हो सकती है। ऐसी स्थिति में मरीज चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। इसमें किसी तरह की लापरवाही न बरतें।
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-डा.ॅ दिनेश खत्री, सीएचसी अधीक्षक।
-जिले में एक्यूआई का स्तर-
तिथि एक्यूआई
9 नवंबर 437
08 नवंबर 422
07 नवंबर 465
06 नवंबर 468
05 नवंबर 418
इस मौसम में बरतें सावधानी
- दमा रोगी इन्हेलर का प्रयोग करें।
- सांस रोगी चिकित्सक की सलाह पर दवा की डोज बढ़वाएं।
- शाम को गर्म पानी की भाप लें।
- गुनगुने पानी से गरारे करें।
- सुबह शाम न टहलें, घर की खिड़कियां बंद रखें।
- मास्क लगाकर बाहर जाएं।
- आसपास पानी का छिड़काव करें।
प्रदूषण बढ़ाने वाले कारक
- खुले में जगह जगह जलाया जा रहा कूड़ा।
- सड़क किनारे खुले में पड़ी निर्माण सामग्री।
- शहर में जगह जगह चल रही खोदाई।
---
न निर्माण कार्य में रोक लगी, न पानी का छिड़काव हो रहा
लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किया जा रहा है। शहर में न निर्माण कार्य पर रोक लग सकी और न ही धूल उड़ाती सड़कों पर पानी का छिड़काव किया गया। खुले में पड़ी निर्माण सामग्री और शहर में सीवर लाइन के लिए हो रही खोदाई के चलते उड़ रही धूल भी प्रदूषण बढ़ा रही है। लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है।
यह होनी थी कार्रवाई
- जिले की सीमा में ट्रकों को रोकना, निर्माण कार्य बंद करवाना।
- खुले में रखी निर्माण सामगी जब्त करना, निर्माण सामग्री का परिवहन रोकना।
- खोदाई और माइनिंग पर रोक लगाना, पानी का छिड़काव करना।
- ईंट भट्ठे, हॉट मिक्स को बंद करना था।
----
प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है। इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। ग्रेप के नियमों का जिले में सख्ती से पालन कराया जाएगा। -श्रद्धा शांडिल्यायन, एडीएम।
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हापुड़। जहरीली हुई हवा का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ने लगा है। दिवाली के बाद से अस्थमा के 854 मरीज उपचार कराने के लिए अस्पतालों में पहुंचे। मंगलवार को भी हवा बेहद खराब रही। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 437 दर्ज किया गया। यह लगातार पांचवां दिन है जब एक्यूआई 400 के ऊपर है। जिला खतरनाक गैसों का चेंबर बना हुआ है।
वातावरण में छाई धुंध (स्मॉग) से लोगों को नाक में खुजली, गले में खराश, आंखों में जलन की शिकायत हो रही है। सांस और टीबी के रोगियों की हालत बिगड़ रही है। अस्थमा के रोगियों पर तो जैसे कहर टूट पड़ा हो। अचानक से अस्पतालों में मरीजों की भीड़ काफी बढ़ गई है। गढ़ रोड सीएचसी में मंगलवार को 1039 मरीज आए, इनमें 412 मरीज प्रदूषण जनित रोगों से पीड़ित रहे। फिजिशियन डॉ गौरव मित्तल ने बताया कि ओपीडी में आने वाले मरीजों में खांसी की सबसे अधिक समस्या आ रही है। बढ़ते प्रदूषण के कारण यह परेशानी बनी है। जुकाम, खांसी के साथ सीने में जकड़न भी हो रही है। जांच करने पर सांस की नली में सूजन और फेफड़ों में भी परेशानी मिली।
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अस्थमा के अटैक का खतरा
अस्थमा के रोगियों को काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। सांस लेने में तकलीफ के साथ ही यदि बेचैनी बढ़े तो यह अस्थमा अटैक की आशंका हो सकती है। ऐसी स्थिति में मरीज चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। इसमें किसी तरह की लापरवाही न बरतें।
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-डा.ॅ दिनेश खत्री, सीएचसी अधीक्षक।
-जिले में एक्यूआई का स्तर-
तिथि एक्यूआई
9 नवंबर 437
08 नवंबर 422
07 नवंबर 465
06 नवंबर 468
05 नवंबर 418
इस मौसम में बरतें सावधानी
- दमा रोगी इन्हेलर का प्रयोग करें।
- सांस रोगी चिकित्सक की सलाह पर दवा की डोज बढ़वाएं।
- शाम को गर्म पानी की भाप लें।
- गुनगुने पानी से गरारे करें।
- सुबह शाम न टहलें, घर की खिड़कियां बंद रखें।
- मास्क लगाकर बाहर जाएं।
- आसपास पानी का छिड़काव करें।
प्रदूषण बढ़ाने वाले कारक
- खुले में जगह जगह जलाया जा रहा कूड़ा।
- सड़क किनारे खुले में पड़ी निर्माण सामग्री।
- शहर में जगह जगह चल रही खोदाई।
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न निर्माण कार्य में रोक लगी, न पानी का छिड़काव हो रहा
लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किया जा रहा है। शहर में न निर्माण कार्य पर रोक लग सकी और न ही धूल उड़ाती सड़कों पर पानी का छिड़काव किया गया। खुले में पड़ी निर्माण सामग्री और शहर में सीवर लाइन के लिए हो रही खोदाई के चलते उड़ रही धूल भी प्रदूषण बढ़ा रही है। लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है।
यह होनी थी कार्रवाई
- जिले की सीमा में ट्रकों को रोकना, निर्माण कार्य बंद करवाना।
- खुले में रखी निर्माण सामगी जब्त करना, निर्माण सामग्री का परिवहन रोकना।
- खोदाई और माइनिंग पर रोक लगाना, पानी का छिड़काव करना।
- ईंट भट्ठे, हॉट मिक्स को बंद करना था।
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प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है। इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। ग्रेप के नियमों का जिले में सख्ती से पालन कराया जाएगा। -श्रद्धा शांडिल्यायन, एडीएम।