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धौलाना में 3 साल की बच्ची को दिमागी बुखार, दिल्ली में भर्ती
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धौलाना में 3 साल की बच्ची को दिमागी बुखार, दिल्ली में भर्ती
हापुड़। कोरोना के बाद जिले में खतरनाक मच्छरजनित रोग जेपेनीज इंसेफेलाइटिस/दिमागी बुखार(जे.ई) का मामला सामने आया है। धौलाना क्षेत्र के एक गांव में तीन साल की बच्ची में इस रोग की पुष्टि हुई है। जिसने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। ब्लड की जांच में रोग की पुष्टि के बाद अब रीढ़ की हड्डी से सैंपल लेने की तैयारी विभाग ने की है। अब तक जिला जे.ई मुक्त की श्रेणी में था, लेकिन अब पहला मामला यहां दर्ज हो चुका है।
पिछले डेढ़ साल से मच्छर जनित रोगों मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया का असर जिले में लगभग शून्य रहा है। इस विभाग को देखने वाले अफसर भी काफी उत्साहित थे, क्योंकि इन डेढ़ साल में उन्हें ज्यादा मशक्कत भी नहीं करनी पड़ी। अब धौलाना क्षेत्र के एक गांव निवासी तीन साल की बच्ची में जेपेनीज इंसेफेलाइटिस रोग की पुष्टि ने संक्रामक रोग नियंत्रण विभाग को हैरत में डाल दिया है क्योंकि अभी तक जिला इस रोग से मुक्त थे। बीते एक दशक की बात करें तो यहां इस तरह का कोई मरीज नहीं मिल था, लेकिन पहला मामला आने के बाद अफसर सतर्क हो गए हैं। हालांकि ब्लड जांच में इस रोग की पुष्टि हुई है। मुख्य जांच रीढ़ की हड्डी से सैंपल लेकर की जाती है, जिसकी तैयारी भी अफसरों ने शुरू कर दी है। फिलहाल बच्ची का उपचार दिल्ली के एक अस्पताल में चल रहा है, जहां उसकी हालत गंभीर बतायी जा रही है।
क्यूलेक्स विश्नोई मच्छर से फैलता है यह रोग
जेपेनीज इंसेफेलाइटिस रोग क्यूलेक्स विश्नोई मच्छर से फैलता है। आम तौर पर यह मनुष्य को कम ही काटता है। फिर भी ब्रिडिंग के समय जंगली जानवरों का खून नहीं मिलने पर यह मनुष्यों को काटता है। क्यूलेक्स विश्नोई नामक इस मच्छर को सूकर का खून सबसे ज्यादा पसंद है और इसके खून में बहुत तेजी से जे.ई वायरस फैलता है। सूकर के संक्रमित होने पर यदि दूसरा कोई मच्छर उसे काट ले तो वह मनुष्यों को तेजी से संक्रमित कर सकता है। जेपेनीज इंसेफेलाइटिस रोग बेहद घातक है। इस रोग के होने पर मरीज की अधिकांश मामलों में मौत हो जाती है, या फिर वह विकलांग हो जाता है। इस रोग में जान बचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है।
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पांच से 15 दिन तक रहते हैं लक्षण
इस रोग के होने पर मनुष्य के शरीर में पांच से 15 दिन के अंदर लक्षण आ सकते हैं। इसके लक्षण भी काफी घातक हैं, जो मरीज को परेशानी में डाल देते हैं।
बीमारी के लक्षण
- तेज दिमागी बुखार।
- दौरे पड़ना, शरीर में अकड़न होना।
- बेहोशी छा जाना, सिर में तेज दर्द होना।
- शरीर में बेहद थकावट होना, मल मूत्र त्याग में स्वेच्छा न होना।
- नींद नहीं आना, चिड़चिड़ापन होना।
इस तरह करें बचाव
- सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- एंटी लार्वा का छिड़काव करें।
- आसपास पानी नहीं भरने दें।
- साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।
बीमार बच्ची की करा जाएगी सैंपलिंग
धौलाना क्षेत्र में जो बच्ची बीमार मिली है, उसकी एक जांच हो चुकी है। जबकि मुख्य जांच होनी बाकी है, जो रीढ़ की हड्डी से सैंपल लेकर की जानी है। इस जांच को जल्द ही करा लिया जाएगा। - डॉ. रेखा शर्मा, सीएमओ।
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हापुड़। कोरोना के बाद जिले में खतरनाक मच्छरजनित रोग जेपेनीज इंसेफेलाइटिस/दिमागी बुखार(जे.ई) का मामला सामने आया है। धौलाना क्षेत्र के एक गांव में तीन साल की बच्ची में इस रोग की पुष्टि हुई है। जिसने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। ब्लड की जांच में रोग की पुष्टि के बाद अब रीढ़ की हड्डी से सैंपल लेने की तैयारी विभाग ने की है। अब तक जिला जे.ई मुक्त की श्रेणी में था, लेकिन अब पहला मामला यहां दर्ज हो चुका है।
पिछले डेढ़ साल से मच्छर जनित रोगों मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया का असर जिले में लगभग शून्य रहा है। इस विभाग को देखने वाले अफसर भी काफी उत्साहित थे, क्योंकि इन डेढ़ साल में उन्हें ज्यादा मशक्कत भी नहीं करनी पड़ी। अब धौलाना क्षेत्र के एक गांव निवासी तीन साल की बच्ची में जेपेनीज इंसेफेलाइटिस रोग की पुष्टि ने संक्रामक रोग नियंत्रण विभाग को हैरत में डाल दिया है क्योंकि अभी तक जिला इस रोग से मुक्त थे। बीते एक दशक की बात करें तो यहां इस तरह का कोई मरीज नहीं मिल था, लेकिन पहला मामला आने के बाद अफसर सतर्क हो गए हैं। हालांकि ब्लड जांच में इस रोग की पुष्टि हुई है। मुख्य जांच रीढ़ की हड्डी से सैंपल लेकर की जाती है, जिसकी तैयारी भी अफसरों ने शुरू कर दी है। फिलहाल बच्ची का उपचार दिल्ली के एक अस्पताल में चल रहा है, जहां उसकी हालत गंभीर बतायी जा रही है।
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क्यूलेक्स विश्नोई मच्छर से फैलता है यह रोग
जेपेनीज इंसेफेलाइटिस रोग क्यूलेक्स विश्नोई मच्छर से फैलता है। आम तौर पर यह मनुष्य को कम ही काटता है। फिर भी ब्रिडिंग के समय जंगली जानवरों का खून नहीं मिलने पर यह मनुष्यों को काटता है। क्यूलेक्स विश्नोई नामक इस मच्छर को सूकर का खून सबसे ज्यादा पसंद है और इसके खून में बहुत तेजी से जे.ई वायरस फैलता है। सूकर के संक्रमित होने पर यदि दूसरा कोई मच्छर उसे काट ले तो वह मनुष्यों को तेजी से संक्रमित कर सकता है। जेपेनीज इंसेफेलाइटिस रोग बेहद घातक है। इस रोग के होने पर मरीज की अधिकांश मामलों में मौत हो जाती है, या फिर वह विकलांग हो जाता है। इस रोग में जान बचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है।
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पांच से 15 दिन तक रहते हैं लक्षण
इस रोग के होने पर मनुष्य के शरीर में पांच से 15 दिन के अंदर लक्षण आ सकते हैं। इसके लक्षण भी काफी घातक हैं, जो मरीज को परेशानी में डाल देते हैं।
बीमारी के लक्षण
- तेज दिमागी बुखार।
- दौरे पड़ना, शरीर में अकड़न होना।
- बेहोशी छा जाना, सिर में तेज दर्द होना।
- शरीर में बेहद थकावट होना, मल मूत्र त्याग में स्वेच्छा न होना।
- नींद नहीं आना, चिड़चिड़ापन होना।
इस तरह करें बचाव
- सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- एंटी लार्वा का छिड़काव करें।
- आसपास पानी नहीं भरने दें।
- साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।
बीमार बच्ची की करा जाएगी सैंपलिंग
धौलाना क्षेत्र में जो बच्ची बीमार मिली है, उसकी एक जांच हो चुकी है। जबकि मुख्य जांच होनी बाकी है, जो रीढ़ की हड्डी से सैंपल लेकर की जानी है। इस जांच को जल्द ही करा लिया जाएगा। - डॉ. रेखा शर्मा, सीएमओ।