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ढाई लाख बच्चों को नहीं मिली पोलियो ड्रॉप
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ढाई लाख बच्चों को नहीं मिली पोलियो ड्रॉप
हापुड़। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में इस बार पल्स पोलियो अभियान का सुरक्षा चक्र टूट गया है। ढाई लाख बच्चे पोलियो की दवा पीने से वंचित रह गए हैं। जनवरी में एनआईडी अभियान चला था, इसके बाद से अब तक पोलियो की दवा पिलाने का कार्यक्रम रद्द रहा है। अब जून महीने के अंत में यह अभियान शुरू हो सकता है, जिसकी तैयारियां शुरू करा दी गई हैं।
पिछले पांच महीने से शून्य से पांच साल तक के ढाई लाख बच्चों को दो बूंद जिंदगी की नहीं मिल पाई है। यह काम आशा, आंगनबाड़ी वर्कर करती हैं जो अब कोरोना महामारी की चुनौतियों से निपटने में जुटी हैं। लिहाजा, डोर टू डोर पोलियो ड्राप पिलाने का अभियान पूरी तरह से बंद है।
जानकारी के अनुसार तीसरी लहर में विशेषज्ञ बच्चों को खतरा ज्यादा बता रहे हैं। इन सबके बीच अभी पिछले छह माह से पोलिया अभियान नहीं चलाया गया। अब अभियान कब चलेगा, इसकी पुख्ता जानकारी नहीं है। हालांकि अफसर जून महीने के अंत में इसे शुरू करने की बात कह रहे हैं।
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बूथ पर भी नहीं पिलाई जा रही दवा
अस्पतालों में बच्चों के लिए बनाए गए टीकाकरण केंद्रों पर भी पोलियो की दवा नहीं पिलाई जा रही है। जिसके चलते छोटे बच्चों को लेकर अभिभावक खासे परेशान हैं, कोरोना महामारी में लगी ड्यूटी के कारण ही यह अभियान छह महीने से बंद पड़ा है।
530 बूथों पर 670 टीमें करती हैं काम
पोलियो की दवा पिलाने के जिला जिले में हर अभियान पर 530 बूथ बनाए जाते हैं, इन बूथों पर 670 टीमें काम करती हैं। इसके अलावा ट्रांजिट, मोबाइल वैन भी क्षेत्र में कार्य करती हैं।
बच्चों के लिए ये टीके बेहद जरूरी
- जन्म के समय-बीसीजी, पोलियो और हेपेटाइटिस-बी।
- जन्म से छह सप्ताह पर-पोलियो-1, रोटा वायरस-1,
आईपीवी-1, पेंटावैलेंट-1, पीसीवी-1।
- जन्म से 10 सप्ताह पर-पोलियो-2, रोटा वायरस-2, पेंटोवैलेंट-2।
- जन्म से 14 सप्ताह तक-पोलियो-3, रोटा वायरस-3, आईपीवी-3, पेंटावैलेंट-3, पीसीवी-2।
- नौ से 12 महीने पर-मीजैल्स रूबैला-1, पीसीवी बूस्टर डोज और जापानी इंसेफेलाइटिस-1।
-14 से 24 महीने पर-पोलियो बूस्टर डोज, मीजेल्स रूबैला-2, डीपीटी बूस्टर-1, जापानी इंसेफेलाइटिस-2।
अधिकारी कहिन
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव कुमार ने बताया पोलियो अभियान जनवरी के बाद से कोरोना महामारी के कारण नहीं चल सका है। जून के अंत में यह अभियान शुरू होगा। बच्चों को दो बूंद जिंदगी की अवश्य पिलाई जाएगी।
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हापुड़। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में इस बार पल्स पोलियो अभियान का सुरक्षा चक्र टूट गया है। ढाई लाख बच्चे पोलियो की दवा पीने से वंचित रह गए हैं। जनवरी में एनआईडी अभियान चला था, इसके बाद से अब तक पोलियो की दवा पिलाने का कार्यक्रम रद्द रहा है। अब जून महीने के अंत में यह अभियान शुरू हो सकता है, जिसकी तैयारियां शुरू करा दी गई हैं।
पिछले पांच महीने से शून्य से पांच साल तक के ढाई लाख बच्चों को दो बूंद जिंदगी की नहीं मिल पाई है। यह काम आशा, आंगनबाड़ी वर्कर करती हैं जो अब कोरोना महामारी की चुनौतियों से निपटने में जुटी हैं। लिहाजा, डोर टू डोर पोलियो ड्राप पिलाने का अभियान पूरी तरह से बंद है।
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जानकारी के अनुसार तीसरी लहर में विशेषज्ञ बच्चों को खतरा ज्यादा बता रहे हैं। इन सबके बीच अभी पिछले छह माह से पोलिया अभियान नहीं चलाया गया। अब अभियान कब चलेगा, इसकी पुख्ता जानकारी नहीं है। हालांकि अफसर जून महीने के अंत में इसे शुरू करने की बात कह रहे हैं।
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बूथ पर भी नहीं पिलाई जा रही दवा
अस्पतालों में बच्चों के लिए बनाए गए टीकाकरण केंद्रों पर भी पोलियो की दवा नहीं पिलाई जा रही है। जिसके चलते छोटे बच्चों को लेकर अभिभावक खासे परेशान हैं, कोरोना महामारी में लगी ड्यूटी के कारण ही यह अभियान छह महीने से बंद पड़ा है।
530 बूथों पर 670 टीमें करती हैं काम
पोलियो की दवा पिलाने के जिला जिले में हर अभियान पर 530 बूथ बनाए जाते हैं, इन बूथों पर 670 टीमें काम करती हैं। इसके अलावा ट्रांजिट, मोबाइल वैन भी क्षेत्र में कार्य करती हैं।
बच्चों के लिए ये टीके बेहद जरूरी
- जन्म के समय-बीसीजी, पोलियो और हेपेटाइटिस-बी।
- जन्म से छह सप्ताह पर-पोलियो-1, रोटा वायरस-1,
आईपीवी-1, पेंटावैलेंट-1, पीसीवी-1।
- जन्म से 10 सप्ताह पर-पोलियो-2, रोटा वायरस-2, पेंटोवैलेंट-2।
- जन्म से 14 सप्ताह तक-पोलियो-3, रोटा वायरस-3, आईपीवी-3, पेंटावैलेंट-3, पीसीवी-2।
- नौ से 12 महीने पर-मीजैल्स रूबैला-1, पीसीवी बूस्टर डोज और जापानी इंसेफेलाइटिस-1।
-14 से 24 महीने पर-पोलियो बूस्टर डोज, मीजेल्स रूबैला-2, डीपीटी बूस्टर-1, जापानी इंसेफेलाइटिस-2।
अधिकारी कहिन
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव कुमार ने बताया पोलियो अभियान जनवरी के बाद से कोरोना महामारी के कारण नहीं चल सका है। जून के अंत में यह अभियान शुरू होगा। बच्चों को दो बूंद जिंदगी की अवश्य पिलाई जाएगी।