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निजी चिकित्सकों की हड़ताल से बंद रहीं ओपीडी, मरीज रहे परेशान
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निजी चिकित्सकों की हड़ताल से बंद रहीं ओपीडी, मरीज रहे परेशान
हापुड़। चिकित्सा शिक्षा में बदलाव और आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी करने की मंजूरी दिए जाने के विरोध में निजी चिकित्सकों ने शुक्रवार को हड़ताल रख ओपीडी सेवाएं बद कर दीं। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सिर्फ इमरजेंसी व कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार की सुविधा जारी रही। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ काफी बढ़ गई। निजी चिकित्सकों ने मांगों को लेकर कलक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा।
आईएमए के सचिव डॉ. योगेश गोयल ने कहा कि अधिकांश लोग आधुनिक चिकित्सा पद्धति से अपना उपचार कराते हैं। सघन चिकित्सा सुविधा और आधुनिक चिकित्सा पद्धति द्वारा संपादित होती है। सभी चिकित्सा पद्धतियों का अपना-अपना महत्व होता है। सभी चिकित्सा पद्धतियों को स्वतंत्र रूप से पूर्ण वैज्ञानिक तरीके से विकसित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आईएमए मिक्सोपेथी यानि खिचड़ी तंत्र के सख्त खिलाफ है। मिक्सोपेथी के कारण देश में चिकित्सकों की गुणवत्ता कम हो जाएगी और चिकित्सा स्तर में गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि देश में चिकित्सकों की गुणवत्ता के कारण देश-विदेश में मरीजों का उपचार करते हैं। भारतीय चिकित्सकों की विदेशों में एक अच्छी छवि है। गुणवत्ता कम होने से विदेशों में चिकित्सकों की मांग कम हो जाएगी और विदेशों से मरीज अपना उपचार कराने भारत नहीं आएंगे।
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पदाधिकारियों ने ज्ञापन में मिक्सोपेथी को लागू न करने और हर विधा में स्वतंत्र रूप से वैज्ञानिक तरीके से विकसित किए जाने की प्रधानमंत्री से मांग की है। इन समस्याओं के विरोध में चिकित्सकों ने शुक्रवार को हड़ताल रखी।
ऐसे में ओपीडी सेवाएं बंद रहने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़। इमरजेंसी व कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार की सुविधा चालू रखी गई। चिकित्सकों ने अपने अस्पतालों पर 24 घंटे की हड़ताल का नोटिस चस्पा किया। जिसे देख मरीज वापस लौट गए। ज्ञापन देने वालों में डा.योगेश गोयल, डा.पराग शर्मा, डा.विक्रांत बंसल, डा.दिनेश गर्ग आदि मौजूद रहे।
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हापुड़। चिकित्सा शिक्षा में बदलाव और आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी करने की मंजूरी दिए जाने के विरोध में निजी चिकित्सकों ने शुक्रवार को हड़ताल रख ओपीडी सेवाएं बद कर दीं। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सिर्फ इमरजेंसी व कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार की सुविधा जारी रही। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ काफी बढ़ गई। निजी चिकित्सकों ने मांगों को लेकर कलक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा।
आईएमए के सचिव डॉ. योगेश गोयल ने कहा कि अधिकांश लोग आधुनिक चिकित्सा पद्धति से अपना उपचार कराते हैं। सघन चिकित्सा सुविधा और आधुनिक चिकित्सा पद्धति द्वारा संपादित होती है। सभी चिकित्सा पद्धतियों का अपना-अपना महत्व होता है। सभी चिकित्सा पद्धतियों को स्वतंत्र रूप से पूर्ण वैज्ञानिक तरीके से विकसित करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि आईएमए मिक्सोपेथी यानि खिचड़ी तंत्र के सख्त खिलाफ है। मिक्सोपेथी के कारण देश में चिकित्सकों की गुणवत्ता कम हो जाएगी और चिकित्सा स्तर में गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि देश में चिकित्सकों की गुणवत्ता के कारण देश-विदेश में मरीजों का उपचार करते हैं। भारतीय चिकित्सकों की विदेशों में एक अच्छी छवि है। गुणवत्ता कम होने से विदेशों में चिकित्सकों की मांग कम हो जाएगी और विदेशों से मरीज अपना उपचार कराने भारत नहीं आएंगे।
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पदाधिकारियों ने ज्ञापन में मिक्सोपेथी को लागू न करने और हर विधा में स्वतंत्र रूप से वैज्ञानिक तरीके से विकसित किए जाने की प्रधानमंत्री से मांग की है। इन समस्याओं के विरोध में चिकित्सकों ने शुक्रवार को हड़ताल रखी।
ऐसे में ओपीडी सेवाएं बंद रहने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़। इमरजेंसी व कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार की सुविधा चालू रखी गई। चिकित्सकों ने अपने अस्पतालों पर 24 घंटे की हड़ताल का नोटिस चस्पा किया। जिसे देख मरीज वापस लौट गए। ज्ञापन देने वालों में डा.योगेश गोयल, डा.पराग शर्मा, डा.विक्रांत बंसल, डा.दिनेश गर्ग आदि मौजूद रहे।