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नाबालिगों के हाथों में ऑटो की कमान, आफत में सवारियों की जान
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गढ़ में स्याना रोड पर ई रिक्शा पर लटकर जाते युवक।
- फोटो : GARH
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नाबालिगों के हाथों में ऑटो की कमान, आफत में सवारियों की जान
गढ़मुक्तेश्वर। शहर में ऑटो रिक्शा नाबालिग चला रहे हैं, इसके चलते दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं। नियमों को ताक पर रखकर ये क्षमता से अधिक सवारियां ढो रहे हैं। इन्हें न तो पुलिस का खौफ है, और न ही सवारियों की जान की चिंता। वहीं तेज आवाज में संगीत बजाकर राहगीरों को भी परेशान करते हैं।
गढ़ क्षेत्र में हाइवे समेत नगर की सड़कों पर बिना लाइसेंस नाबालिग धड़ल्ले से ऑटो चला रहे हैं। गढ़-मेरठ रोड पर करीब तीन वर्ष पूर्व पहले हुए सड़क हादसे में ऑटो में सवार आधा दर्जन सवारियों की मौत हुई थी, लेकिन पुलिस ने इन घटनाओं से भी सबक नहीं लिया। इस घटना के बाद कुछ दिन के लिए सड़कों पर ऑटो का संचालन बंद सा हो गया था। लेकिन दोबारा सड़कों पर ऑटो की भरमार हो गई। अधिकांश चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस, ऑटो की फिटनेस, आरसी, प्रदूषण तक नहीं होते हैं। अधिक कमाई के लालच में ऑटो चालक चार सवारियों के जगह दस सवारियां तक बैठा लेते है। क्षमता से अधिक सवारियों के बैठने से हादसे की आशंका भी बढ़ जाती है।
पुलिस की सुस्ती के चलते नहीं होती कार्रवाई
लोगों का कहना है कि एसडीएम, सीओ और कोतवाली के सामने से अधिक सवारियों को बैठाकर ऑटो और ई रिक्शा ले जाते हैं, उसके बावजूद भी पुलिस उन्हें अनदेखा कर देती है। यदि चालकों पर कार्रवाई होने लगे, तो हादसों में कमी देखने को मिलेगी।
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कोट-
वाहनों पर कार्रवाई के लिए एआरटीओ और कोतवाली पुलिस को संयुक्त रुप से चेकिंग चलाने के लिए निर्देश दिए जाएंगे। - अरविंद कुमार, एसडीएम
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गढ़मुक्तेश्वर। शहर में ऑटो रिक्शा नाबालिग चला रहे हैं, इसके चलते दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं। नियमों को ताक पर रखकर ये क्षमता से अधिक सवारियां ढो रहे हैं। इन्हें न तो पुलिस का खौफ है, और न ही सवारियों की जान की चिंता। वहीं तेज आवाज में संगीत बजाकर राहगीरों को भी परेशान करते हैं।
गढ़ क्षेत्र में हाइवे समेत नगर की सड़कों पर बिना लाइसेंस नाबालिग धड़ल्ले से ऑटो चला रहे हैं। गढ़-मेरठ रोड पर करीब तीन वर्ष पूर्व पहले हुए सड़क हादसे में ऑटो में सवार आधा दर्जन सवारियों की मौत हुई थी, लेकिन पुलिस ने इन घटनाओं से भी सबक नहीं लिया। इस घटना के बाद कुछ दिन के लिए सड़कों पर ऑटो का संचालन बंद सा हो गया था। लेकिन दोबारा सड़कों पर ऑटो की भरमार हो गई। अधिकांश चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस, ऑटो की फिटनेस, आरसी, प्रदूषण तक नहीं होते हैं। अधिक कमाई के लालच में ऑटो चालक चार सवारियों के जगह दस सवारियां तक बैठा लेते है। क्षमता से अधिक सवारियों के बैठने से हादसे की आशंका भी बढ़ जाती है।
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पुलिस की सुस्ती के चलते नहीं होती कार्रवाई
लोगों का कहना है कि एसडीएम, सीओ और कोतवाली के सामने से अधिक सवारियों को बैठाकर ऑटो और ई रिक्शा ले जाते हैं, उसके बावजूद भी पुलिस उन्हें अनदेखा कर देती है। यदि चालकों पर कार्रवाई होने लगे, तो हादसों में कमी देखने को मिलेगी।
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वाहनों पर कार्रवाई के लिए एआरटीओ और कोतवाली पुलिस को संयुक्त रुप से चेकिंग चलाने के लिए निर्देश दिए जाएंगे। - अरविंद कुमार, एसडीएम

गढ़ में मेरठ रोड पर क्षमता से अधिक सवारी बैठाकर ले जाता चालक।- फोटो : GARH